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    कन्नौज के गौरीशंकर मन्दिर का 10 कुंतल फूलों से श्रृंगार:श्रृंगार से पहले हल्दी का लेप लगाने की परंपरा निभाई, दर्शन को पहुंची भक्तों की भीड़

    5 hours ago

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    महाशिवरात्रि पर कन्नौज के प्राचीन गौरीशंकर मन्दिर में 10 कुंतल फूलों से श्रृंगार किया गया। जिसमें कमल, गुलाब और गेंदा के फूल शामिल हैं। यहां तीन टाइम अलग-अलग तरह से श्रृंगार किया जाएगा। इससे पहले मन्दिर के स्वंम्भू शिवलिंग पर हल्दी का लेप किया गया। इस परंपरा का निर्वहन सौभाग्य, समृद्धि और सुख-शान्ति के लिए किया जाता है। महाशिवरात्रि पर कन्नौज का वातावरण भक्तिमय हो गया। सुबह से ही प्राचीन बाबा गौरीशंकर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने लग गए। यहां महिलाओं ने प्राचीन शिवलिंग को हल्दी का लेप लगाकर परिवार की खुशहाली और उन्नति की कामना की। हल्दी की इस रस्म को सौभाग्य, समृद्धि और सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है। मुख्य पुजारी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हल्दी रस्म की पूजा संपन्न कराई। इसके बाद कमल, गुलाब और गेंदा के फूलों से शिवलिंग का श्रृंगार किया गया। मुख्य पुजारी अनिरुद्ध दीक्षित ने बताया कि शिवरात्रि की पूजा से पहले भगवान भोलेनाथ को हल्दी अर्पण करने की यह परंपरा अत्यंत शुभ होती है। हल्दी अर्पित करने वाले भक्तों को भगवान शिव और माता पार्वती का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। 10 कुंतल फूल से तीन टाइम भोलेनाथ का श्रृंगार किया जाएगा। सुबह से ही घण्टे-घड़ियाल, 'हर-हर महादेव', 'जय शिव शंभू' और 'जय मां पार्वती' के जयघोष से मन्दिर गूंज उठा। मंदिर परिसर में भक्ति और उत्साह का माहौल नजर आया। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि बाबा गौरीशंकर मंदिर का शिवलिंग स्वयंभू है और यह जमीन में काफी गहराई तक है। 1 लाख रुपए कीमत के फूल से मन्दिर को सजवाया गया है। टीले पर विराजमान बाबा विश्वनाथ कन्नौज के चौधरियापुर गांव स्थित प्राचीन टीले पर बाबा विश्वनाथ मंदिर स्थापित है। यहां शिवरात्रि पर पूजा-अर्चना के लिए हजारों भक्त पहुंचे। मन्दिर तक पहुंचने के लिए तीन ओर सीढ़ियां बनी हैं। बताया गया कि 11वीं सदी में महोबा राज्य से निकाले जाने के बाद महाप्रतापी आल्हा और ऊदल को कन्नौज के राजा जयचंद ने रिजगिर में शरण दी थी। यहां रहते हुए दोनों भाई प्रतिदिन बाबा विश्वनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए मन्दिर आते थे।
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