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    कानपुर में अचानक मौसम बदला, सुबह घना कोहरा छाया:विजिबिलिटी 30 मीटर रही, मार्च में ही मई जैसी गर्मी; पारा 34 डिग्री पार

    13 hours ago

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    कानपुर के कई इलाकों में मंगलवार सुबह मौसम अचानक बदला दिखा। नरवल और बिल्हौर एरिया में सुबह घना कोहरा छाया रहा। मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों ने कहा- दिसंबर और जनवरी जैसा कोहरा छाया दिखा। बिल्हौर में विजिबिलिटी करीब 30 मीटर रही। ड्राइवर डीपर जलाकर गाड़ी चलाते दिखे। अब दिन में मौसम साफ रहेगा। धूप के साथ गर्मी का एहसास होगा। आज गंगा मेला भी है, ऐसे में रंग खेलने वालों को दिन में धूप राहत देगी। जिससे पानी पड़ने के बाद भी ठंडक का ज्यादा एहसास नहीं होगा। गंगा मेला के दिन शहर में तेज धूप के बीच रंग, गुलाल और पानी की बौछारों के साथ लोग बिना मौसम की चिंता के उत्सव का आनंद ले सकेंगे। मार्च के शुरुआती दिनों में ही पारा 34 डिग्री पार कर गया है। सोमवार को कानपुर का अधिकतम पारा 34.6 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम पारा 18.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। 2 तस्वीरें देखिए- दिन का पारा पहुंचा 34 के पार शहर में मार्च के शुरुआती दिनों में ही तापमान तेजी से बढ़ने लगा है। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की ओर से जारी वेदर रिपोर्ट के अनुसार सोमवार को अधिकतम तापमान 34.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 6.9 डिग्री अधिक है। वहीं न्यूनतम तापमान 18.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2.2 डिग्री ज्यादा है। यह इस सीजन का अधिकतम तापमान है। सामान्य से अधिक रहेंगे तापमान मौसम विशेषज्ञ डॉ. एस.एन. सुनील पांडेय के अनुसार मंगलवार को कानपुर में सुबह से दिनभर तेज धूप निकलने की संभावना है। दोपहर में उत्तर-पश्चिमी हवाओं की गति लगभग 1 से 6 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है। हवाओं की रफ्तार कम होने से आने वाले दिनों में गर्मी बढ़ने के संकेत हैं। उन्होंने बताया कि अगले कुछ दिनों में दिन और रात के तापमान में क्रमिक वृद्धि दर्ज की जाएगी और दोनों ही सामान्य से अधिक रह सकते हैं। मार्च के अंत तक 40 के करीब पहुंचेगा तापमान मार्च के अंत तक अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचने की संभावना भी जताई जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल अगले तीन दिनों तक बारिश की कोई संभावना नहीं है। वहीं किसानों को खेतों में नमी बनाए रखने की सलाह दी गई है। अब तापमान जानिए- मार्च में ही क्यों बढ़ रही है गर्मी? स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पलावत का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) का असर मौसम पर साफ दिखाई दे रहा है। इसी कारण मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। गर्मी पहले की तुलना में जल्दी शुरू हो रही है। इसका असर यह है कि अब तापमान ज्यादा तेजी से बढ़ने लगा है। गर्म दिनों की संख्या भी बढ़ रही है। कई बार लू (हीटवेव) का दौर भी पहले से ज्यादा दिनों तक चलता है। बीते कुछ सालों में देश के कई शहरों में गर्मी के पुराने रिकॉर्ड भी टूटे हैं। कुछ जगहों पर तापमान 48 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तक दर्ज किया गया है। पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय, यूपी में क्या असर दिखेगा? महेश पलावत के अनुसार, एक पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है, जिसके चलते 11 मार्च तक पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र (जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) में हल्की बारिश और बर्फबारी देखने को मिल सकती है। जिसका असर यूपी में भी देखने को मिलेगा। दरअसल, उत्तरी ओडिशा और बंगाल क्षेत्र में बने चक्रवाती सर्कुलेशन (हवा का किसी एक क्षेत्र में गोल-गोल घूमते हुए ऊपर उठना) से एक ट्रफ लाइन उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्सों तक फैली हुई है। इस सिस्टम की वजह से प्रदेश के मौसम में हल्का बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, फिलहाल उत्तर प्रदेश में मौसम ज्यादातर शुष्क रहने की संभावना है, लेकिन कुछ इलाकों में बादल छा सकते हैं और तापमान में हल्का उतार-चढ़ाव हो सकता है। लंबे समय तक चल सकती है हीटवेव IMD के अनुमान के अनुसार, इस साल कुछ इलाकों में लंबे समय तक हीटवेव की स्थिति बन सकती है। इसका मतलब है कि कई शहरों में लगातार कई दिनों तक तापमान बहुत ज्यादा रह सकता है और लोगों को तेज गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। कब मानी जाती है हीटवेव? मौसम विभाग के मुताबिक, हीटवेव तब मानी जाती है, जब मैदानों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा पहुंच जाए या फिर सामान्य तापमान से 4 से 6 डिग्री ज्यादा दर्ज किया जाए। ऐसी स्थिति में लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है और लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। गर्मी से फसलों को होगा नुकसान बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में कृषि विभाग के प्रोफेसर पीके सिंह कहते हैं- मार्च महीना किसानों के लिए चुनौती भरा साबित हो सकता है। तापमान बढ़ने का असर रबी की फसल पर पड़ेगा, खासतौर गेहूं पर। गर्मी से दाने पूरी तरह विकसित नहीं होंगे। इससे पैदावार कम होगी। पीके सिंह के अनुसार, गर्म हवाएं चलने से सरसों, चना और मटर जैसी फसल को भी नुकसान हो सकता है। बढ़ते तापमान से खेतों की मिट्टी जल्दी सूख जाती है। इससे सिंचाई का खर्च बढ़ता है। फसलों पर तनाव पड़ता है।
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