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    कानपुर में फेफड़ों की भाषा समझेगा वेंटिलेटर:20 सेकंड में खुद सेट करेगा इलाज, GSVM बना प्रदेश का पहला AI मेडिकल कॉलेज

    17 hours ago

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    यूपी की चिकित्सा व्यवस्था में तकनीक के समावेश ने एक नया अध्याय जोड़ दिया है। कानपुर का जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रदेश का पहला ऐसा संस्थान बन गया है, जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से गंभीर मरीजों का इलाज पूरी तरह व्यवस्थित रूप से शुरू हो गया है। जीएसवीएम से संबद्ध एलएलआर अस्पताल के मेडिसिन विभाग में अब ऐसे आधुनिक वेंटिलेटर्स का उपयोग किया जा रहा है, जो खुद मरीज की स्थिति भांपकर उसका उपचार तय करते हैं। मरीज की सांसों को खुद समझने वाली मशीन मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. एस. के. गौतम ने बताया कि, अस्पताल के आईसीयू में हैमिल्टन कंपनी के एआई-आधारित वेंटिलेटर्स तैनात किए गए हैं। इन वेंटिलेटर्स की सबसे बड़ी खूबी इनका 'एडैप्टिव सपोर्टिव वेंटिलेशन' (ASV) मोड है। यह मोड पूरी तरह एआई पर आधारित है। जैसे ही किसी मरीज को वेंटिलेटर पर डाला जाता है, यह सिस्टम मात्र 10 से 20 सेकंड के भीतर मरीज के फेफड़ों की क्षमता और जरूरत का आकलन कर लेता है। इसके बाद रेस्पिरेटरी रेट, टाइडल वॉल्यूम और FiO2 जैसे महत्वपूर्ण मानक मशीन द्वारा अपने आप सेट कर दिए जाते हैं, जिससे मरीज को तत्काल सटीक सहायता मिलती है। मानकों में बदलाव होते ही अलर्ट होता है सिस्टम इन एडवांस मशीनों की सक्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यदि निर्धारित मानकों में जरा भी विचलन या बदलाव होता है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देता है। इससे डॉक्टरों को समय रहते उपचार की दिशा बदलने या आवश्यक सुधार करने में मदद मिलती है। प्राचार्य प्रो. संजय काला के अनुसार, करीब 3.95 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित ये वेंटिलेटर्स निमोनिया, सेप्सिस, आघात, सीओपीडी और न्यूरोमस्कुलर विकारों से जूझ रहे मरीजों के लिए जीवनदान साबित हो रहे हैं। वर्तमान में मेडिसिन आईसीयू में 12, हाई डिपेंडेंसी यूनिट में 10 और सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में लगभग 12 ऐसे वेंटिलेटर्स सक्रिय हैं। टेलीमेडिसिन से जुड़ा एआई वार्ड और विशेषज्ञ सलाह अस्पताल ने तकनीक के इस सफर को केवल मशीनों तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि पूरे एआई वार्ड को टेलीमेडिसिन सुविधा से भी जोड़ दिया है। इसके माध्यम से देश के नामी चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ सीधे कानपुर के मरीजों की रिपोर्ट देख रहे हैं और परामर्श दे रहे हैं। जटिल सर्जरी या किसी गंभीर आपात स्थिति में विशेषज्ञों की राय तुरंत उपलब्ध होने से मरीजों और उनके परिजनों में विश्वास बढ़ा है। अब मरीजों को कानपुर में ही राष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा सलाह सुलभ हो रही है। साढ़े तीन हजार मरीजों के लिए बना सहारा प्रतिदिन तीन से साढ़े तीन हजार ओपीडी और औसतन सौ से अधिक भर्ती मरीजों के भारी दबाव वाले इस अस्पताल में एआई ने काम को बेहद सरल बना दिया है। बड़े सड़क हादसों और गंभीर श्वसन संकट वाले मामलों में यह तकनीक समयबद्ध इलाज सुनिश्चित कर रही है
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