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    लखनऊ में एंबुलेंस ड्राइवरों ने भाजपा कार्यालय घेरा:स्वास्थ्य विभाग की अर्थी निकाली, डिप्टी CM की तस्वीर लगाई; पुलिस ने ईको गार्डन भेजा

    3 hours ago

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    लखनऊ में नौकरी बहाली की मांग को लेकर एंबुलेंस ड्राइवरों ने बुधवार दोपहर भाजपा कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने स्वास्थ्य विभाग की अर्थी निकाली। अर्थी पर डिप्टी CM ब्रजेश पाठक की तस्वीर लगाई गई थी। उस पर ‘इस्तीफा दो’ लिखा था। प्रदर्शनकारी 2021 में नौकरी से निकाले गए कर्मचारी हैं। उनका कहना है कि नौकरी जाने के बाद से वे बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। कोरोना काल में जान जोखिम में डालकर सेवाएं देने के बावजूद उन्हें सेवा से हटा दिया गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे एंबुलेंस ड्राइवरों को हिरासत में लिया। इसके बाद उन्हें इको गार्डन भेज दिया गया। प्रदर्शन की 3 तस्वीरें देखिए… 2021 में गई नौकरी एंबुलेंस चालकों ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान दिन-रात सेवाएं दीं। कई कर्मचारियों ने अपनी जान भी गंवाई, लेकिन अब उन्हें नौकरी से निकालकर बेरोजगार कर दिया गया है। 2021 में नौकरी गंवाने के बाद 5 साल से भटक रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने निजी कंपनी पर नौकरी से निकालने, शारीरिक और मानसिक शोषण करने सहित कई गंभीर आरोप लगाए। GVKEMRI सर्विस कंपनी पर गंभीर आरोप विरोध प्रदर्शन करने वाले एंबुलेंस चालकों ने बताया कि प्रदेश में करीब 20 हजार एंबुलेंस कर्मचारी GVKEMRI कंपनी के तहत काम करते हैं। कंपनी कर्मचारियों का शारीरिक और मानसिक शोषण कर रही है। मेंटेनेंस का पैसा भी कंपनी कर्मचारियों के वेतन से काट रही है। विरोध करने वालों को बर्खास्त कर दिया जाता है। कई एंबुलेंस पर फर्जी केस भी दर्ज कराए गए हैं। भर्ती के नाम पर वसूली का आरोप शरद यादव ने बताया कि एंबुलेंस कंपनी भर्ती के नाम पर 25 हजार और 50 हजार रुपए वसूलती है। ड्राइवर से 25 हजार और टेक्नीशियन से 50 हजार रुपये लिए जाते हैं। कंपनी ने विरोध करने वाले करीब हजारों लोगों को नौकरी से निकाल दिया। कर्मचारियों ने कहा कि 2021 में विरोध करने वाले 3 हजार कर्मचारियों को निकाला गया। अब तक कंपनी करीब 9 हजार लोगों को निकाल चुकी है। स्थिति यह हो गई कि डिलीवरी बॉय के रूप में काम करके परिवार का पेट पाल रहे हैं। प्रदर्शन करने आए अजय अपना हाल बताते हुए रोने लगे। उन्होंने बताया कि 2021 में नौकरी से निकाल दिया गया, जिसके बाद न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के आवास के 100 चक्कर लगा चुके हैं, मगर सुनवाई नहीं हुई। कोरोनाकाल में हम लोगों ने सेवा दी और इस दौरान लगभग हमारे 100 साथियों की मौत हो गई। हमारे लोगों के साथ अन्याय हो रहा है। भ्रष्टाचार हो रहा है। शिकायत कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। हम कहां जाएं? हमारे गले में जो मेडल टंगा है, यह कोरोनाकाल में मिलने वाला सम्मान और संघर्ष का प्रतीक है। इतना कहते ही अजय फफक-फफककर रोने लगे।
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