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    लखनऊ में दो दिवसीय नवप्रवर्तक महोत्सव शुरू:रमेश चंद्र ने किया उद्घाटन, 1200 से अधिक आगंतुक पहुंचे

    12 hours ago

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    लखनऊ की आंचलिक विज्ञान नगरी में मंगलवार को दो दिवसीय नवप्रवर्तक महोत्सव शुरू हो गया हैं। उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के सचिव एवं निदेशक रमेश चंद्र (आईएएस) ने इसका उद्घाटन किया। इस महोत्सव में विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम जनता सहित 1200 से अधिक लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। महोत्सव में 58 जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों ने अपने अनूठे मॉडल और विचार प्रदर्शित किए। इसके अतिरिक्त, स्कूल, कॉलेज और इंजीनियरिंग संस्थानों की 40 से अधिक परियोजनाएं भी आकर्षण का केंद्र रहीं। इन प्रदर्शनों में छात्रों की वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और समस्या-समाधान क्षमता स्पष्ट रूप से दिखाई दी। वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सतत विकास को आवश्यक उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए रमेश चंद्र ने कहा कि नवाचार की शुरुआत जिज्ञासा और अवलोकन से होती है। उन्होंने 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सतत विकास को आवश्यक बताया। उन्होंने युवाओं से विज्ञान और तकनीक के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। इस अवसर पर सीएसआईआर-सीडीआरआई के निदेशक संजय बत्रा ने एक लोकप्रिय विज्ञान व्याख्यान दिया। उन्होंने मानव विकास और पर्यावरण संतुलन में नवाचार की भूमिका पर प्रकाश डाला। बत्रा ने सड़कों के निर्माण में पुनर्चक्रित प्लास्टिक के उपयोग जैसे उदाहरण साझा किए और विज्ञान आधारित पहलों को बढ़ावा देने के लिए UPCST के प्रयासों की सराहना की। विज्ञान के व्यावहारिक उपयोग पर आधारित प्रस्तुतियां महोत्सव में ड्रोन कार्यशाला, इनोवेटिव चैलेंज और कई संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए। प्रतिभागियों ने विज्ञान के व्यावहारिक उपयोग पर आधारित प्रस्तुतियां भी दीं। जमीनी नवप्रवर्तक लक्षन धारी द्वारा बनाई गई साइकिल से चलने वाली मोटरसाइकिल ने विशेष ध्यान आकर्षित किया। इसके अलावा, क्रोशिया और सिल्क थ्रेड से बनी हस्तनिर्मित चूड़ियों के स्टॉल ने पारंपरिक कौशल और आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन किया।
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