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    लखनऊ संग्रहालय में 'भारत की प्राचीन मौद्रिक यात्रा' पर व्याख्यान:संस्कृति विभाग ने कला अभिरुचि पाठ्यक्रम के तहत किया आयोजन

    12 hours ago

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    राज्य संग्रहालय, लखनऊ में उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग ने एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया। यह आयोजन कला अभिरुचि पाठ्यक्रम की व्याख्यान श्रृंखला के तहत 'भारत की प्राचीन मौद्रिक यात्रा' विषय पर केंद्रित था। इसमें इतिहास, पुरातत्व और मुद्राशास्त्र में रुचि रखने वाले छात्र-छात्राओं और शोधकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य वक्ता डॉ. अमित कुमार उपाध्याय के स्वागत से हुई। डॉ. उपाध्याय काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। सहायक निदेशक डॉ. मीनाक्षी खेमका ने उनका परिचय कराया और कला अभिरुचि कार्यक्रम के उद्देश्यों के बारे में बताया । प्राचीन मुद्राओं के बारे में सरल ढंग से बताया इस मौके पर अपने व्याख्यान में डॉ. अमित कुमार उपाध्याय ने भारत की प्राचीन मौद्रिक यात्रा को सरल और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि प्राचीन मुद्राएं केवल लेन-देन का माध्यम नहीं थीं, बल्कि वे इतिहास के महत्वपूर्ण दस्तावेज भी हैं। सिक्कों के माध्यम से किसी भी काल की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्थिति को समझा जा सकता है। उन्होंने सिक्कों की टंकण तकनीक, वैज्ञानिक विश्लेषण और राजवंशीय वर्गीकरण पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में आधुनिक भारत, विशेषकर आजादी के बाद के सिक्कों पर भी प्रकाश डाला गया। मुद्राशास्त्र अधिकारी एवं निदेशक डॉ. विनय कुमार सिंह ने देश के चार प्रमुख मिंट और स्मारकीय सिक्कों की विशेषताओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्मारकीय सिक्के राष्ट्र की ऐतिहासिक घटनाओं और महान व्यक्तित्वों की स्मृति को संजोने का माध्यम हैं। ये लोग शामिल हुए इसके साथ ही , प्रतिभागियों के लिए संग्रहालय में संरक्षित कलाकृतियों का शैक्षिक भ्रमण भी आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य उन्हें इतिहास और कला के विभिन्न आयामों को करीब से समझने में मदद करना था। इस अवसर पर रेनू द्विवेदी, अलशाज फातमी, कृष्ण सिंह, चन्द्र मोहन वर्मा, शारदा प्रसाद, प्रीती साहनी, अनीता चौरसिया, धनंजय कुमार राय, शालिनी श्रीवास्तव, प्रमोद कुमार, राहुल सैनी, गायत्री गुप्ता, अनुराग द्विवेदी, अरुण कुमार मिश्रा सहित संग्रहालय के कर्मचारी उपस्थित रहे।
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