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    लेम्बोर्गिनी कांड-अरबपति कारोबारी का बेटा गिरफ्तार:पिता की बचाने की कोशिशें नाकाम, नकली ड्राइवर पेश किया, लेकिन कोर्ट ने नहीं माना

    8 hours ago

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    कानपुर लेम्बोर्गिनी केस में अरबपति कारोबारी का बेटा आरोपी शिवम मिश्रा गिरफ्तार हो चुका है। तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा ने बेटे को बचाने की तमाम कोशिशें कीं। पहले पुलिस को मैनेज करने की कोशिश की, लेकिन जब यह पैतरा एक्सपोज हो गया तो कोर्ट में नकली ड्राइवर कोसरेंडर करवा दिया। हालांकि, कोर्ट ने ड्राइवर मोहन की अर्जी खारिज कर दी और उसे आरोपी नहीं माना। कोर्ट ने कहा- पुलिस रिपोर्ट में आरोपी शिवम है, मोहन का कहीं नाम नहीं है। इसके बाद गुरुवार सुबह पुलिस ने शिवम को आर्यनगर से घर के सामने से अरेस्ट कर लिया, फिर AJCM कोर्ट में उसे पेश किया। शिवम को बचाने की क्या कोशिशें हुईं, जो नाकाम रहीं, 4 पॉइंट में पढ़िए— 1- VIP ट्रीटमेंट दिया, फिर FIR में नाम जोड़ा कानपुर के वीआईपी रोड पर 8 फरवरी को तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी ने 6 लोगों को घायल कर दिया। यह कार आर्यनगर में रहने वाले तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा की है। हादसे के बाद रसूखदार परिवार के आगे पहले तो पुलिस सरेंडर हो गई और लेम्बोर्गिनी कार को थाने में वीआईपी ट्रीटमेंट दिया गया। कार को वहां खड़ा किया गया, जहां थानेदार की कार खड़ी होती है। उसे कवर से ढक दिया गया। रखवाली के लिए बाउंसर खड़े किए गए। पहले तो पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की। सोशल मीडिया पर मामला वायरल होने के बाद पुलिस ने रात 8:30 बजे कार नंबर के आधार पर अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज की। बाद में अखिलेश यादव ने ट्वीट कर इस मामले को सियासी तूल दिया। सीएम योगी आदित्यनाथ ने पूरे मामले में कार्रवाई के आदेश दिए। इसके बाद पुलिस ने 24 घंटे बाद कार चला रहे शिवम मिश्रा का नाम जांच में जोड़ दिया। कमिश्नर के दावे पर कारोबारी ने कहा- झूठ बोल रहे हैं 10 फरवरी को कानपुर कमिश्नर रघुबीर लाल सामने आए। उन्होंने कहा कि जांच में सामने आया है कि शिवम मिश्रा ही गाड़ी चला रहा था, इसलिए FIR में उसका नाम जोड़ा गया है। अगले दिन कारोबारी पिता केके मिश्रा ग्वालटोली थाने पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि हादसे के वक्त बेटा शिवम नहीं, बल्कि ड्राइवर मोहन लेम्बोर्गिनी चला रहा था। शिवम उस वक्त सो रहा था। हादसे के बाद कार लॉक हो गई थी, जिससे बेटे की तबीयत बिगड़ गई। ठीक होने पर बेटे को लेकर मैं खुद थाने आऊंगा। FIR कराने वाले से समझौते की खबर आई, पुलिस ने नकारा 11 फरवरी को इस केस में बड़ा यू-टर्न हुआ। घायल और मुकदमा दर्ज कराने वाले वादी मो. तौसीफ ने ड्राइवर के साथ समझौता कर लिया। कारोबारी के बेटे के वकील धर्मेंद्र सिंह ने कोर्ट में जो समझौतानामा पेश किया, उसमें तौसीफ की ओर से कहा गया कि इलाज का खर्च दे दिया गया है। इस वजह से वह पूरी तरह संतुष्ट है और इस केस में कोई कार्रवाई नहीं चाहता। यह आपसी समझौता बिना किसी दबाव के किया गया है। हादसे के वक्त गाड़ी मोहन ही चला रहा था। हालांकि, DCP सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने इस बात से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पुलिस के पास किसी तरह का कोई समझौतानामा नहीं आया है। अचानक कारोबारी का ड्राइवर कोर्ट पहुंचा, बोला- कार मैं ही चला रहा था बुधवार दोपहर तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के कथित ड्राइवर मोहन अचानक कानपुर कोर्ट पहुंचा और सरेंडर कर दिया। वह अपने वकील नरेंद्र कुमार यादव के साथ कोर्ट पहुंचा। मोहन ने कहा कि शिवम मिश्रा की गाड़ी वही चला रहा था। शिवम को दौरा पड़ गया था। उस वक्त वह घबरा गया और उसे कुछ समझ नहीं आया। तभी हादसा हो गया। जब शीशा तोड़ा गया और दरवाजा खोला गया, तो वह नीचे से निकल गया था। बाउंसर ने शिवम को बाहर निकाला। हादसे के बाद वह एक कोने में खड़ा हो गया था। शिवम को दूसरी गाड़ी में ले जाया गया था। कोर्ट ने ड्राइवर की याचिका खारिज की, आरोपी नहीं माना हालांकि, कोर्ट ने ड्राइवर मोहन की अर्जी खारिज कर दी और उसे आरोपी नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि पुलिस रिपोर्ट में आरोपी शिवम है, मोहन का कहीं नाम नहीं है। जब मोहन से पूछा गया कि इस कार में कितने गियर होते हैं, तो उसने बताया कि 9 गियर होते हैं, जबकि एक्सपर्ट से बात करने पर सामने आया कि इस कार में 7 गियर और एक बैक गियर, यानी कुल 8 गियर होते हैं। इससे साफ हो गया कि वह झूठ बोल रहा था। अब जानिए कि किन साक्ष्य और गवाहों के आधार पर खारिज हुई याचिका 1. हादसा का वीडियो पुलिस ने अपनी जांच में हादसे के बाद का एक वीडियो शामिल किया। इसमें हादसे के बाद लेम्बोर्गिनी के पीछे चल रही दूसरी कार से बाउंसर निकलते हैं। ईंट से लेम्बोर्गिनी का शीशा तोड़कर गेट खोलते हैं। फिर लेम्बोर्गिनी की ड्राइविंग सीट से शिवम को बाहर निकालते हैं और उसे दूसरी गाड़ी से लेकर अस्पताल चले जाते हैं। पुलिस का दावा किया था कि शिवम को ड्राइविंग सीट से निकालते साफ देखा जा सकता है। वीडियो देखने से साफ होता है कि गाड़ी में कोई दूसरा व्यक्ति था ही नहीं। इस वजह से ईंट से शीशा तोड़ना पड़ा। तब कार का दरवाजा खोलकर शिवम को बाहर निकाला जा सका था। 2. 10 से ज्यादा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान पुलिस की जांच रिपोर्ट में दूसरा सबसे बड़ा सबूत प्रत्यक्षदर्शियों के बयान हैं। जांच कर रहे दरोगा दिनेश सिंह ने 10 से ज्यादा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए। इन सबने बताया कि कार शिवम मिश्रा ही चला रहा था। गाड़ी में कोई दूसरा व्यक्ति मौजूद नहीं था। हादसे के बाद शिवम को बाउंसर कार से निकालकर ले गए। ड्राइवर के गाड़ी चलाने या कार में किसी दूसरे व्यक्ति के मौजूद होने की बात को सभी प्रत्यक्षदर्शियों ने खारिज कर दी थी। पुलिस ने इन सभी प्रत्यक्षदर्शियों के बयान अपनी जांच रिपोर्ट में दर्ज किए। 3. शिवम की मोबाइल लोकेशन घटनास्थल पर मिली पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट में बतौर इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य शिवम की मोबाइल लोकेशन को भी शामिल किया। हादसे के दौरान शिवम की मोबाइल लोकेशन भी VIP रोड पर हादसे वाली जगह पर ही थी। 4. CCTV में कैद हुई है पूरी घटना पुलिस ने जांच रिपोर्ट में CCTV फुटेज भी शामिल किया। नगर निगम से मिले CCTV में पूरा हादसा कैद हुआ था। इस फुटेज से भी साफ है कि गाड़ी में कोई ड्राइवर नहीं था, सिर्फ एक व्यक्ति ही मौजूद था। 5. वादी ने शिवम को पहचाना था पुलिस ने हादसे की FIR दर्ज कराने वाले चमनगंज घुसियाना निवासी मो. तौफीक के बयान दर्ज किए थे। उसने बताया था कि लेम्बोर्गिनी में सिर्फ एक ही व्यक्ति ड्राइविंग सीट पर था। वीडियो देखकर तस्दीक किया कि कार शिवम मिश्रा ही चला रहा था। वादी का बयान भी किसी केस में सबसे अहम माना जाता है। ……………. यह खबर भी पढ़िए- कारोबारी बोले-कानपुर पुलिस कमिश्नर झूठ बोल रहे, लेम्बोर्गिनी बेटा नहीं, ड्राइवर चला रहा था कानपुर में लेम्बोर्गिनी कार से 6 लोगों को कुचलने के मामले में नया ट्विस्ट आ गया है। कारोबारी पिता केके मिश्रा मंगलवार को ग्वालटोली थाने पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि हादसे के वक्त बेटा शिवम नहीं, बल्कि ड्राइवर मोहन लेम्बोर्गिनी कार चला रहा था। शिवम उस वक्त सो रहा था। पढ़ें पूरी खबर…
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