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    मानसून सत्र का 10वां दिन:लोकसभा में राहुल के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस, गृह मंत्री के खिलाफ असंसदीय भाषा बोलने का आरोप

    4 hours ago

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    संसद के मानसून सत्र का शुक्रवार को 10वां दिन है। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने गुरुवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का नोटिस सौंपा है। अनुराग का आरोप है कि राहुल गांधी ने को गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ असंसदीय और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। गंभीर व बेबुनियाद आरोप लगाए। दरअसल, बुधवार को राहुल ने पेपर लीक संशोधन बिल पर बोलते हुए गृह मंत्री अमित शाह पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। राहुल के भाषण के एक हिस्से को स्पीकर ओम बिरला ने कार्यवाही से हटा दिया था। संसद में पेपर लीक और वंदमातरम बिल पास गुरुवार को वंदे मातरम् बिल राज्यसभा के बाद लोकसभा से भी पास हो गया है। इस दौरान काफी हंगामा हुआ। स्पीकर ने इसके बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। वहीं, पेपर लीक संशोधन बिल गुरुवार को राज्यसभा में भी पास हो गया। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बिल पेश किया जिसके बाद इस पर 7 घंटे बहस हुई। इस दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि शिक्षा संस्थानों में मनुस्मृति मानने वाले बढ़ गए हैं, इससे शूद्रों का पढ़ने का अधिकार छिन गया है। इस पर सदन में हंगामा शुरू हो गया। मनुस्मृति पर हंगामा क्यों हुआ, दावे और फैक्ट से समझें फैक्ट चैक: खड़गे ने जो सजाएं बताईं, वे मूल मनुस्मृति में नहीं, बल्कि 'गौतम धर्मसूत्र' (अध्याय 12, श्लोक 4-6) में लिखी हैं। हालांकि, खड़गे ने बाद में कहा कि गौतम ऋषि ने लिखा है। सुधांशु त्रिवेदी ने जवाब में कहा- मैं उन्हें बताना चाहूंगा कि विलियम जोन्स कलकत्ता हाईकोर्ट के जज थे। उन्होंने 1790 मनु स्मृति का अनुवाद किया। आधुनिक युग के शेड्यूल कास्ट का मनु काल के वैदिक शूद्र के साथ कोई कनेक्शन नहीं है। विलियम जोन्स से पहले की 2 और मनुस्मृति कहीं अवेलेबल नहीं हैं। मासिर-ए-आलमगीरी, शाहनामा, जहांगीरनामा, तुज़ुक-ए-बाबरी, फुतूहात-ए-फिरोजशाही और तहकीके हिंद भी उपलब्ध हैं। इसलिए मैंने कहा कि मुझे प्रमाण चाहिए, क्योंकि जो खड़गे ने कहा- उसे अंग्रेजों ने बनाया है। विलियम जोन्स से पहले का कोई टेक्स्ट अवेलेबल नहीं हैं। फैक्ट चेक: विलियम जोन्स ने मनुस्मृति का पहला अंग्रेजी अनुवाद 1794 में 'Institutes of Hindu Law, or the Ordinances of Menu' नाम से पब्लिश किया था। यह किताब आज भी सार्वजनिक डोमेन में है। इसे गूगल बुक्स, इंटरनेट आर्काइव और ब्रिटिश लाइब्रेरी की वेबसाइटों पर मुफ्त में पढ़ा जा सकता है। सुधांशु त्रिवेदी ने आगे कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर कि किताब 'हू वर द शुद्राज' के चैप्टर के पहले पेज के पैराग्राफ 3 में लिखा है कि आधुनिक अनुसूचित जातियों और प्राचीन वैदिक काल के शूद्रों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। फैक्ट चेक: अंबेडकर ने लिखा है कि आधुनिक शूद्र और प्राचीन वैदिक काल के शूद्र एक ही वर्ग नहीं थे। प्राचीन शूद्र मूल रूप से क्षत्रिय थे, जिन्हें ब्राह्मणों से विवाद के बाद 'उपनयन संस्कार' से वंचित कर दिया गया, जिससे वे चौथे वर्ण में गिर गए। वे आज की अनुसूचित जातियों से अलग थे। प्रमोद तिवारी ने एक किताब दिखाते हुए कहा कि यह इनके कार्यकाल में छपी है, चल रही है, प्रतिबंधित नहीं है। अगर ये कह रहे हैं, दिखा रहे हैं, तो गलती इनकी है।12 साल से इनकी सरकार है। जेपी नड्डा ने कहा कि ब्रिटिश टाइम से पहले का ओरिजिनल टेक्स्ट लाइए। सबूत दीजिए।
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