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    'मेरे पति की अधिकारियों ने ली जान':गोरखपुर में शिक्षक की पत्नी का झलका दर्द, बेटा बोला- 'पापा कब आएंगे'

    1 hour ago

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    फूट-फूट कर रोती बिलखती यह महिला शिक्षक कृष्ण मोहन की पत्नी गुड़िया हैं। पति के मौत के बाद उनका रो- रो कर बुरा हाल है। वहीं 6 साल के मासूम बेटे को समझ नहीं आ रहा है कि उसके पापा कहा चले गए हैं। पत्नी ने बताया- बेटा बार- बार पूछता है पापा कब आएंगे। ऊपर क्यों चले गए। बार- बार उनके नंबर पर कॉल करता है और पूछता है कि फोन क्यों नहीं उठा रहे पापा। उसको कुछ पता नहीं है। उनके फोटो से बाते करता है। कहता है पापा आ जाओ। उसकी बाते सुनकर मेरा दिल और बैठ जाता है। वहीं 8 साल की बेटी को गहरा सदमा लगा है। वह खुलकर रोई भी नहीं। बस सब कुछ चुपचाप देखती है। किसी से बात नहीं कर रही। घर का माहौल उसे पूरी तरह तोड़ दिया है। बिना कुछ बोले फोटो के सामने घंटों खड़ी रहती है। मेरे दोनों बच्चे पिता के बहुत करीब थे। 4 दिन से उन्हें देखा नहीं है। उन्हें पता ही नहीं है कि कभी देख भी नहीं पाएंगे। बच्चों के बारे में सोच कर दिल फटा जाता है। उन्हें क्या बताऊंगी। कैसे समझाऊंगी कि उनकी पापा की जान किसी और के वजह से गई है। फांसी की सजा की मांग की उन्होंने मौत का जिम्मेदार देवरिया बेसिक शिक्षा अधिकारी और बाबू को बताया है। उनका कहना है कि 20 फरवरी को बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी पांडेय ने मेरे पति को देवरिया BSA ऑफिस बुलाया। वहां से उनको एक कमरे में अकेले ले कर गए। पहले उनसे चार लाख रुपया डिमांड किया। पति के इंकार करने पर वे भड़क गए और उन पर फर्जी मुकदमा करवाने की धमकी देने लगे। बोले कि तुम्हारे ऊपर इतना मुकदमा ठोक देंगे कि जेल में सड़ोगे। बच कर निकल नहीं पाओगे। पत्नी गुड़िया ने बताया- जब वे घर लौटे तो बहुत परेशान थे। चुपचाप रहने लगे। मैंने पूछा कि क्या हुआ तो सब बात बताए। उन्हें बहुत समझाया गया कि परेशान मत हो लेकिन वे मायूस थे। रात में खाना भी ठीक से नहीं खाएं। फिर सोने चले गए। पता नहीं कब वह उठ कर दूसरे कमरे में जाकर फंदे से लटक गए। उनके मौत के जिम्मेदार शालिनी श्रीवास्तव और बाबू संजीव सिंह हैं। उन्होंने ही मुझसे मेरा सब कुछ छीना है। मैं कहा जाउंगी। मेरे बच्चों का क्या होगा। दोषियों की फांसी की सजा होनी चाहिए। तभी मेरे मन को शांति मिलेगी। मौत के बदला मौत ही मेरे लिए न्याय होगा। उन लोगों ने पैसों की लालच में मेरे पति को मार दिया। उन्हें सजा जरूर मिलनी चाहिए। जानिए क्यों मांगे गए थे रुपए जानकारी के मुताबिक कृष्ण मोहन सिंह की नियुक्ति 2016 में सहायक अध्यापक के पद पर हुई थी। 2023 में गलत तरीके से उनकी और दो अन्य सहायक अध्यापक ओंकार सिंह और अपर्णा तिवारी की नियुक्ति रद्द कर दी गई थी। मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा। फरवरी 2025 में हाई कोर्ट ने तीनों लोगों की नियुक्ति बहाल करने का आदेश दिया। आरोप है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और बाबू संजीव सिंह ने नियुक्ति कराने के लिए सभी से 16 लाख रुपए मांगे। तीनों शिक्षकों ने कुल 48 लाख रुपए दे भी दिए। उसके बाद 4 लाख रुपए और मांगे गए। पैसे वापस मांगने पर भड़के अफसर मृतक के बड़े भाई अवधेश सिंह ने बताया- मेरे भाई ने 4 लाख देने से इंकार कर दिया और कहा कि आप लोग मेरे 16 लाख रुपए भी लौटा दीजिए। मैं दुबारा कोर्ट में अप्लाई करूंगा। यह सुनते ही अधिकारियों ने बाकी लोगों को भेज दिया और मेरे भाई को अकेले कमरे में रुकने को कहा। उसके बाद उन्होंने उसे खूब जलील किया और कहा कि क्या लगता ऑफिस में दिया गया पैसा वापस होगा। तुम्हारे ऊपर इतने मुकदमें लाद दिए जाएंगे कि पूरी जिंदगी जेल में रहोगे। मेरा भाई बिना कुछ कहे घर वापस लौट आया। जब मैंने उससे फोन पर बात की सारी बात बताया। मैंने उसे समझाया भी कोई बात नौकरी छोड़ दो परेशान मत रहो। लेकिन अपनी बेज्जती वह सहन नहीं कर पाया और अपनी जान दे दी। जानिए अब तक क्या कार्रवाई हुई बयान लेने के लिए आज देवरिया जाएगी गुलरिहा पुलिस टीम गुलरिहा थाना प्रभारी इत्यानंद के अनुसार इस मामले में गोरखपुर गुलरिहा थाने की पुलिस मंगलवार को देवरिया जाएगी। BSA शालिनी श्रीवास्तव और निलंबित बाबू संजीव के साथ अन्य दो सहायक शिक्षक का बयान दर्ज किया जाएगा। इन सहायक शिक्षकों में ओंकार सिंह और अपर्णा तिवारी का नाम मृतक ने सुसाइड नोट में लिखा था। इन लोगों ने भी नियुक्ति बहाल कराने के लिए अधिकारियों को रुपए दिए थे। फोरेंसिक जांच के लिए लैब गया हैंडराइटिंग सैंपल इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। सुसाइड नोट की वास्तविकता का पता लगाने के लिए हैंडराइटिंग की फोरेंसिक जांच की जाएगी। जिसके लिए टीम ने कृष्ण मोहन की हैंड राइटिंग का सैंपल ले लिया है। सैंपल को फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया है। जल्द ही जांच रिपोर्ट सामने आएगी। आरोपी बाबू परिवार के साथ फरार इस मामले में आरोपी बाबू संजीव सिंह अपने परिवार के साथ फरार है। जिसकी तलाश की जा रही है। हालांकि देवरिया की डीएम के आदेश पर उसे सस्पेंड कर दिया गया। जबकि शालिनी श्रीवास्तव के सस्पेंशन पर तलवार अटकी है। जांच के कमिटी गठित जांच के लिए सीडीओ की अध्यक्षता में सात सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। साथ ही जॉइंट मजिस्ट्रेट श्रुति शर्मा और डीआईओएस शिव नारायण सिंह शामिल किया गया है। जांच कर एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट मांगी गई है। CBI जांच की मांग की वहीं जानकारी मिली है कि मृतक शिक्षक ने चार पन्नों की सुसाइड नोट में इस मामले को लेकर CBI जांच की मांग की है। उसने यह भी बात लिखी है कि दो किश्तों में 16 लाख रुपए दिए थे। पहली किश्त का एक्सीडेंट होने की वजह से 7 लाख रुपए भाई से भिजवाया था। जबकि दूसरी बार 9 लाख खुद देकर आएं। कोर्ट के आदेश का पालन कर नौकरी बहाल करने के लिए पहले उन लोगों ने तीनों से 20- 20 लाख रुपए मांगे थे। फिर 16 लाख पर बात तय हुई। बाद में 4- 4 लाख और की मांग करने की बात कही है। लखनऊ से देवरिया पहुंची टीम जांच के लिए गठित टीम सोमवार को लखनऊ से देवरिया पहुंच कर अपना काम शुरू कर दी है। एक हफ्ते के अंदर जांच रिपोर्ट सौंपी जाएगी। जिसके बाद दोषियों पर उचित कारवाई होगी।
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