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    मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद सफेद हुईं आंखें, ऑपरेशन थिएटर सील:रोशनी जाने का खतरा; गंभीर हालत में 5 मरीज जयपुर और 2 अजमेर रेफर

    21 hours ago

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    सरकारी हॉस्पिटल में मोतियाबिंद (कैटरेक्ट) के ऑपरेशन के बाद मरीजों की हालत बिगड़ गई। उनकी आंखें सफेद पड़ गईं। 7 मरीजों की आंखों में ऐसा इंफेक्शन (संक्रमण) हुआ कि इनमें से 5 को बुधवार रात फौरन जयपुर के सवाई मान सिंह (SMS) हॉस्पिटल लाना पड़ा। वहीं 2 मरीजों को गुरुवार सुबह अजमेर के JLN अस्पताल रेफर किया गया। इन मरीजों की आंखों की रोशनी खतरे में है। यह पूरा मामला डीडवाना-कुचामन जिले के कुचामन सिटी स्थित राजकीय आई हॉस्पिटल का है। ऑपरेशन थिएटर को सील कर दिया गया है। जांच के लिए SMS और JLN हॉस्पिटल से मेडिकल टीम भेजी गई हैं। उधर, पिछले दिनों कोटा और बीकानेर के सरकारी हॉस्पिटल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं (महिलाओं) की तबीयत बिगड़ गई थी, जिसमें से कई की जान चली गई थी। 7 पॉइंट में पूरा मामला समझिए... 1- 28 जुलाई को मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ था SMS मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी ने बताया- सभी मरीजों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन 28 जुलाई को कुचामन सिटी में हुआ था। सभी ऑपरेशन डॉ. विनोद और डॉ. राजकुमारी ने किए थे। इसके लगभग 24 घंटे बाद इंफेक्शन फैलने लगा और आंखें सफेद पड़ गईं। 2- 5 मरीज जयपुर रेफर किए गए मरीजों की बिगड़ती हालत को देखते हुए कुचामन सिटी के डॉक्टरों ने उन्हें बुधवार रात जयपुर के SMS हॉस्पिटल रेफर किया था। 5 मरीज रात करीब 9:30 बजे एसएमएस हॉस्पिटल पहुंच गए थे। घासीराम (65), हीराराम (73), गोकुल (70), मीरा देवी (68) और नारायणी को (67) ट्रॉमा/इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया। 3- मेडिकल प्रशासन अलर्ट मोड में इन मरीजों की स्थिति को देखते हुए मेडिकल प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी ने बताया- हमने रात में ही सीनियर डॉक्टर्स का मेडिकल बोर्ड गठित कर ट्रीटमेंट शुरू करवा दिया है। 4- स्थिति गंभीर, रोशनी बचाने की पूरी कोशिश मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने 4 डॉक्टरों का विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन किया है। जो मरीजों के इलाज और पल-पल की मॉनिटरिंग के लिए जिम्मेदार होगा। मेडिकल बोर्ड के अध्यक्ष और नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नगेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया- SMS अस्पताल पहुंचते ही सभी मरीजों का स्टैंडर्ड मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत इलाज शुरू कर दिया गया है। इंफेक्शन के कारण मरीजों की आंखों की स्थिति फिलहाल काफी गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों की टीम का पूरा प्रयास है कि इंफेक्शन को आगे फैलने से रोका जाए और मरीजों की आंखों की रोशनी सुरक्षित बचाई जा सके। 5- 2 मरीज अजमेर रेफर हुए कुचामन उपखंड अधिकारी सुरेंद्र चौधरी ने कहा कि कुचामन के राजकीय आई हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद 5 मरीजों को कुछ परेशानी होने के कारण उन्हें जयपुर रेफर किया गया। 2 मरीजों को आज (गुरुवार) अजमेर के जेएलएन हॉस्पिटल रेफर किया गया। कुचामन के राजकीय अस्पताल में अब तक 700 से ज्यादा सफल ऑपरेशन किए जा चुके हैं। इस तरह की दिक्कत पहली बार सामने आई है। हॉस्पिटल प्रशासन के अनुसार, सभी मरीजों के रूटीन ऑपरेशन हुए थे। जिला अस्पताल में एक महीने में 100 से ज्यादा ऑपरेशन होते हैं। नागौर के लुणवा निवासी खेमाराम (61) पुत्र अर्जुनराम और कुचामन निवासी कानूड़ी (80) पत्नी बीरदाराम को जेएनएन हॉस्पिटल रेफर किया। दोनों की आंखों के पर्दों में सूजन आ गई थी। दोनों का जेएलएन हॉस्पिटल में आई डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश पोरवाल के नेतृत्व में ऑपरेशन किया गया। 6- दूसरे मरीजों में इंफेक्शन फैलने का डर SMS अस्पताल में भर्ती सभी पांचों मरीजों को डॉक्टर ने अलग वार्ड में शिफ्ट कर दिया है। डॉक्टर को डर है कि कहीं यह इंफेक्शन दूसरे मरीजों की आंखों में न फैल जाए। डॉक्टर ने बताया- गुरुवार को इन मरीजों का विट्रेक्टॉमी प्रोसीजर किया है। इस प्रोसीजर के दौरान मरीजों की आंखों की पुतली के पीछे जमा मवाद को निकाला गया है। चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर भी सवाई मानसिंह अस्पताल पहुंचे। उन्होंने डॉक्टर से बातचीत कर पांचों मरीजों की स्थिति के बारे में जानकारी ली। 7- SMS और JLN हॉस्पिटल से डॉक्टरों की टीम भेजी चार डॉक्टर की टीम SMS हॉस्पिटल से कुचामन भेजी गई है। इनमें सीनियर नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार नेनीवाल, एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. महिपाल सिंह, माइक्रो बायोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर रेजिडेंट डॉ. अखिल सांगवान और टेक्नीशियन डॉ. सीताराम शर्मा हैं। उधर, जेएलएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अनिल सामरिया के निर्देश पर हॉस्पिटल के आई, एनेस्थीसिया और माइक्रोबायोलॉजी विभाग के वरिष्ठ डॉक्टरों की 5 सदस्यीय टीम डीडवाना-कुचामन के लिए रवाना की गई है। टीम वहां ऑपरेशन थिएटर का निरीक्षण करेगी और यह जांच करेगी कि किन कारणों से ऑपरेशन के बाद मरीजों की स्थिति बिगड़ी। -------- ये खबरें भी पढ़िए… 1- कोटा के सरकारी हॉस्पिटल में 6 महिलाओं की तबीयत बिगड़ी, एक की मौत कोटा के सरकारी हॉस्पिटल में सीजेरियन डिलीवरी के बाद 6 महिलाओं (प्रसूताओं) की तबीयत बिगड़ गई। कुछ ही देर बाद एक महिला ने दम तोड़ दिया। एक अन्य महिला की स्थिति गंभीर बनी हुई है। पढ़ें पूरी खबर... 2- सीलन-फंगस वाले वार्ड में भर्ती थीं गर्भवती महिलाएं:कोटा के सरकारी हॉस्पिटल में 2 मौत, कई की हालत गंभीर, दवाओं के सैंपल लिए कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में खुशियां मातम में बदल गई हैं। सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक-एक कर दो महिलाओं ने दम तोड़ दिया। 4 की हालत गंभीर बनी हुई है। उधर, दैनिक भास्कर की पड़ताल में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। हॉस्पिटल प्रशासन ने न सिर्फ महिलाओं को संक्रमण (इंफेक्शन) के बीच धकेला, बल्कि मौत के बाद अपनी गर्दन बचाने के लिए पुख्ता सबूतों को भी मिटाने की कोशिश की। पढ़ें पूरी खबर...
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