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    सावन में श्रीकोटेश्वर-श्रीकृष्णेश्वर महादेव में रुद्राभिषेक:वैदिक मंत्रोच्चारण से गूंजे शिवालय, आचार्य ने कराया रुद्र अस्ढाई पाठ

    3 hours ago

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    संभल में सनातन धर्म के पवित्र श्रावण मास का शुभारंभ गुरुवार से श्रद्धा और उत्साह के साथ हुआ। सावन के पहले दिन शहर के प्राचीन श्रीकोटेश्वर महादेव मंदिर, श्रीकृष्णेश्वर नाथ महादेव सूर्यकुंड मंदिर समेत एक दर्जन से अधिक शिवालयों में भगवान शिव का विधि-विधान से रुद्राभिषेक और जलाभिषेक किया गया। इस वर्ष श्रावण मास 30 जुलाई से 28 अगस्त तक रहेगा। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हुआ अभिषेक गुरुवार शाम करीब 4 बजे कोट पूर्वी स्थित श्रीकोटेश्वर महादेव मंदिर में और दोपहर 12 बजे बरेली सराय स्थित प्राचीन श्रीकृष्णेश्वर नाथ महादेव सूर्यकुंड मंदिर में विशेष रुद्राभिषेक आयोजित हुआ। आचार्य पंडित शोभित शास्त्री ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजन संपन्न कराया। इस अवसर पर कुशल मदान, श्याम मदान, मीनाक्षी सिंघल, सार्थक सिंघल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। अन्य शिवालयों में भी उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर, श्री चंद्रेश्वर महादेव मंदिर और श्री समलेश्वर महादेव मंदिर सहित अन्य शिवालयों में भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। भक्तों ने भगवान शिव का जल, दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित कर सुख-समृद्धि तथा परिवार की खुशहाली की कामना की। श्रावण मास का धार्मिक महत्व आचार्य शोभित शास्त्री ने बताया कि श्रावण मास भगवान शिव की आराधना, तप और साधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस माह में श्रद्धापूर्वक शिव पूजन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि का वास होता है। समुद्र मंथन से जुड़ी है परंपरा धार्मिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष का पान भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए किया था। विष की उष्णता शांत करने के लिए देवताओं ने उनका जलाभिषेक किया था। तभी से श्रावण मास में शिवलिंग पर जल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है, जिसे शिवभक्त अत्यंत पुण्यदायी मानते हैं।
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