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    मथुरा में कैनवास पर साकार हुईं कृष्ण की लीलाएं:हेमा मालिनी बोलीं- 3 नहीं, 5 दिन का हो आर्ट कैंप, 20 कलाकारों ने हिस्सा लिया

    11 hours ago

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    मथुरा में श्रीकृष्ण की लीलाओं को कैनवास पर उतारने वाले आर्ट कैंप की अवधि अब तीन दिन के बजाय पांच दिन होनी चाहिए। समापन समारोह में सांसद एवं अभिनेत्री हेमा मालिनी ने कहा- एक उत्कृष्ट और भावपूर्ण चित्र तैयार करने में कलाकार को समय चाहिए। उन्होंने ब्रज में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को चित्रों के जरिए सहेजने का यह सिलसिला आगे भी जारी रखने की अपील की। गीता शोध संस्थान में श्री कृष्ण नेशनल आर्ट वर्कशॉप-2026 में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए 20 ख्यातिप्राप्त चित्रकारों ने तीन दिनों तक अपनी कला का प्रदर्शन किया। कलाकारों ने बाल लीलाओं, राधा-कृष्ण प्रेम, माखन चोरी, गौ-प्रेम, बांसुरी, गिरिराज धारण और ब्रज की सांस्कृतिक परंपराओं को रंगों और रेखाओं के जरिए कैनवास पर जीवंत किया। हेमा मालिनी ने एक-एक कलाकार की पेंटिंग देखी समापन समारोह की मुख्य अतिथि हेमा मालिनी ने एक-एक चित्रकार के पास जाकर उनकी पेंटिंग देखी। उन्होंने चित्रों के विषय, शैली और उनमें छिपे भाव को समझा। कलाकारों ने भी अपनी रचना के पीछे की कल्पना और उससे जुड़ी कथा के बारे में उन्हें जानकारी दी। कैनवास पर कृष्ण लीलाओं को देखकर हेमा मालिनी प्रभावित हुईं। उन्होंने कहा कि उन्हें आश्चर्य है कि कलाकारों ने केवल दो दिनों में इतनी सुंदर और भावपूर्ण तरीके से श्रीकृष्ण की लीलाओं को रंगों में उतार दिया। ब्रज की लीलाओं को चित्रों में सहेजने पर जोर हेमा मालिनी ने कहा कि ब्रज में भगवान श्रीकृष्ण की अनेक लीलाएं हुई हैं। उन्हें चित्रों के माध्यम से सहेजने का काम आगे भी जारी रहना चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के अधिकारियों से भविष्य में चित्रांकन शिविर की अवधि पांच दिन करने का आग्रह किया। अलग-अलग शहरों से पहुंचे 20 कलाकार उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की CEO लक्ष्मी नागप्पन ने हेमा मालिनी सहित सभी कलाकारों का आभार जताया। पटना की चित्रकार अलका दास ने कार्यशाला और गीता शोध संस्थान में की गई व्यवस्थाओं की सराहना की। पद्मश्री शांति देवी ने मधुबनी चित्रकला शैली की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। मध्य प्रदेश की अलका मनीष पाठक ने श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता को भावपूर्ण ढंग से चित्रित किया। दिल्ली की सुमित्रा अहलावत ने माखन चोरी के दौरान गोपियों के आनंद और नृत्य को कैनवास पर उतारा। पटना की सोमा आनंद ने मनमोहन कृष्ण की छवि में भक्तिभाव और रस को उभारा। अलका दास ने मिथिला शैली में राधा-कृष्ण की मनोहारी छवि प्रस्तुत की। लखनऊ के विनोद कुमार ने ‘ब्रह्मांड नायक’ की संकल्पना के जरिए लोक से परलोक तक की प्रेम यात्रा को आधुनिक भावबोध में चित्रित किया। नाथद्वारा की वंदना जोशी ने श्रीनाथजी की आकर्षक छवि और ताज बीबी द्वारा उन्हें पहनाए गए वस्त्राभूषण के प्रसंग को प्रमुखता दी। बांसुरी, गौ-प्रेम और गिरिराज धारण भी कैनवास पर लखनऊ की नेहा ने किशनगढ़ शैली में राधा-कृष्ण को प्रकृति से जोड़कर चित्र बनाया। गाजियाबाद की खुशबू शर्मा ने बालकृष्ण की माखन चोरी लीला को चित्रित किया। उज्जैन के जयेश त्रिवेदी ने श्रीकृष्ण के गौ-प्रेम को भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त किया। पटना की विनीता सिंह ने ध्यानमग्न कृष्ण की शांत और आध्यात्मिक छवि को कैनवास पर उतारा। आगरा की ललित कला अकादमी से जुड़े डॉ. मनोज कुमार सिंह ने बंसी बजाते श्रीकृष्ण की लीला को चित्रित किया, जबकि मेरठ के डॉ. प्रिंस राज ने अपने विशिष्ट रंग संयोजन से बांसुरी बजाते कृष्ण को प्रभावशाली रूप दिया। मोहाली, चंडीगढ़ की मनजीत कौर ने श्रीकृष्ण और श्रीनाथजी की छवियों को एक संयुक्त रचना में प्रस्तुत किया। जयपुर के विनीत शर्मा ने माखन खाते बालकृष्ण के चंचल और वात्सल्यपूर्ण स्वरूप को कैनवास पर उतारा। पद्मश्री शांति देवी ने मधुबनी शैली में दिखाई कृष्ण की लीला पद्मश्री चित्रकार शांति देवी ने मधुबनी शैली में वासुदेव द्वारा बालकृष्ण को सिर पर रखकर यमुना पार ले जाने का प्रसंग चित्रित किया। उनकी रचना में पारंपरिक रेखाओं और रंगों के साथ प्रसंग का भाव पक्ष भी उभरकर आया। ग्रेटर नोएडा की कंचन प्रकाश ने बज्जिका शैली में गिरिराज धारण लीला को आकर्षक रूप दिया। उज्जैन की सुमन डोंगरे ने राधा-कृष्ण और सखियों के प्रेम, माधुर्य और रासभाव को चित्रित किया। इंदौर की अलका झा ने बांसुरी बजाते श्रीकृष्ण और राधा की प्रेममयी छवि बनाई। अलीगढ़ के मंगलायतन विश्वविद्यालय की फाइन आर्ट फैकल्टी की प्रो. पूनम रानी ने बालकृष्ण की वैणी गूथन लीला को अपने चित्र का विषय बनाया। चित्रकार महेंद्र सिंह ने आधुनिक शैली में ब्रज की संगीत परंपरा और श्रीकृष्ण से जुड़े संगीत के भाव को कैनवास पर अभिव्यक्त किया।
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