Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    मायावतीं बोली- सपा-कांग्रेस के दलित चमचे चुप रहें, बेहतर होगा:चुनाव नजदीक आया तो कांशीराम जयंती मनाने लगे

    3 hours ago

    1

    0

    यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस की दलित राजनीति पर बसपा प्रमुख मायावती भड़क उठी हैं। मंगलवार को तल्ख अंदाज में बसपा प्रमुख ने कहा, सपा-कांग्रेस के दलित चमचे चुप ही रहें तो बेहतर होगा। सपा-कांग्रेस हमेशा से दलित विरोधी पार्टियां रही हैं। लेकिन इस बार यूपी विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही इन्हें दलित वोटों की चिंता सताने लगी। यही कारण है कि ये दल अचानक कांशीराम जयंती मनाने लगे। सपा-कांग्रेस की असलियत जाननी हो तो कांशीराम की लिखित 'चमचा युग' किताब पढ़नी चाहिए। दरअसल, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 13 मार्च को लखनऊ आए थे। उन्होंने कांशीराम जयंती मनाई। राहुल की मौजूदगी में कांग्रेस नेताओं ने कांशीराम को भारत रत्न देने का प्रस्ताव पास किया गया। खुद राहुल ने भी PM मोदी को लेटर लिखकर भारत रत्न देने की डिमांड की थी। मायावती की 3 बड़ी बातें… 1. मैंने खुद भारत रत्न देने की मांग की थी, कांग्रेस ने नहीं दिया कांशीराम का निधन हुआ तो केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। मैंने खुद 2007 में केंद्र से कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग की थी। तब कांग्रेस के नेता बोलते थे कि ये सम्मान राष्ट्रीय स्तर पर योगदान देने के लिए दिया जाता है। आज इनके नेता राहुल गांधी को अचानक कांशीराम में दिलचस्पी जाग गई। अपनी केंद्र की सरकार में रहकर भारत रत्न की उपाधि न देकर अब दूसरी पार्टी की सरकार से देने की मांग करना हास्यास्पद नहीं तो क्या है? दलितों ने आजादी के बाद से कांग्रेस को ही वोट दिया। लेकिन बदले में कांग्रेस ने क्या किया? वह हमेशा वोट तो दलितों से लेती थी, लेकिन कुर्सी पर उन्हें नहीं बैठाती थी। कांग्रेस ने हमेशा सिर्फ दलितों को वोटबैंक ही समझा। ये तो कांशीरामजी थे, जिन्होंने रात-दिन एक करके दलितों के स्वाभिमान को जगाया और बसपा जैसी राजनीतिक पार्टी की स्थापना कर दलितों को उनकी राजनीतिक ताकत का अहसास कराया। 2. क्या उनके महापुरुषों में कोई जान नहीं रही कांग्रेस की तरह सपा ने भी सोची-समझी रणनीति के तहत कांशीराम की जयंती मनाई है। यूपी विधानसभा चुनाव में उन्हें दलित वोटों के स्वार्थ ने ऐसा करने पर मजबूर किया। कांग्रेस-सपा की शुरू से ही बसपा को खत्म करने की मंशा रही है। कांशीराम ने खुद बसपा पार्टी की नींव रखी थी। उन्होंने ही मुझे अपने जीते-जी अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। वर्तमान में मैं बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष हूं। और मेरे रहते हुए बसपा पार्टी को कोई हिला भी नहीं सकता। ऐसा लगता है कि इन पार्टियों के महापुरुषों में कोई जान नहीं रही है। इसी कारण ये हमारे महापुरुषों को भुनाने में लगे हैं। जबकि कांशीराम के जीते-जी हर मामले में हमेशा इन पार्टियों ने उनकी उपेक्षा की थी। 3. सपा ने तो बसपा सरकार के कामों को ही बदल दिया था कांशीराम की जयंती मनाने वाली सपा के दोगले चाल-चरित्र से सावधान रहना होगा। बसपा सरकार में कांशीराम के सम्मान में किए गए कार्यों को सपा सरकार ने बदल दिया था। मायावती ने चुटीले अंदाज में सपा-कांग्रेस पार्टियों के नेताओं, खासकर दलित नेताओं को चमचा संबोधित करते हुए कहा, वे चुप रहें तो उनके लिए बेहतर होगा। ऐसे लोगों से दूरी बनाने के लिए ही कांशीराम ने 'चमचा युग' नाम से अंग्रेजी में किताब लिखी है। इसे उन्हें जरूर पढ़ना चाहिए। पहली बार राहुल गांधी ने कांशीराम की जयंती मनाई बोले- नेहरू जिंदा होते तो कांशीराम यूपी के CM होते राहुल गांधी ने 13 मार्च को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में कांग्रेस ने कांशीराम की जयंती मनाई थी। राहुल ने कहा था, कांशीरामजी समाज में बराबरी की बात करते थे। अगर कांग्रेस पार्टी अपना काम सही से करती तो कांशीराम जी सक्सेस नहीं हो पाते। लेकिन, अगर जवाहरलाल नेहरू जिंदा होते तो कांशीराम जी यूपी में कांग्रेस के चीफ मिनिस्टर होते। आज भाजपा ने समाज को 15 और 85 बांट दिया गया है। फायदा सिर्फ 15% वालों को मिल रहा है। राहुल का भाषण खत्म हुआ तो प्रस्ताव पास हुआ कि कांशीराम को भारत रत्न मिलना चाहिए और कहा गया कि हम गारंटी देते हैं कि राहुल गांधी जब भी इस देश के प्रधानमंत्री बनेंगे तो यह काम हो के रहेगा। इसके बाद राहुल गांधी ने PM को पत्र लिखकर कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग की। सपा ने प्रदेश भर में कार्यक्रमों के जरिए मनाई कांशीराम जयंती सपा ने भी पहली बार प्रदेश भर में कांशीराम जयंती मनाई। इसके लिए जिला मुख्यालयों पर आयोजन भी हुए। इस पर भी मायावती ने दूसरे दिन प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, सपा सरकार ने कांशीराम के सम्मान में घोषित प्रतिष्ठानों के नाम बदले थे। कांशीराम का निधन हुआ तो सूबे में सपा की सरकार थी, लेकिन तब उसने एक दिन का भी राजकीय शोक घोषित नहीं किया था। जिस कांशीराम ने समर्थन देकर 1993 में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव की सरकार बनाई थी, उन्होंने बदले में क्या किया? उनकी शिष्या यानी कि मुझे 2 जून 1995 को गेस्ट हाउस में जान से मारने की कोशिश की थी। -------------------------- ये खबर भी पढ़ें- अफसरों का दावा- अवसरवादी का 'पंडित' विकल्प देना अपराध नहीं:यूपी दरोगा भर्ती परीक्षा का दोबारा पेपर नहीं होगा; समय पर आएगा रिजल्ट यूपी दरोगा भर्ती परीक्षा में अवसरवादी के लिए ‘पंडित’ विकल्प देने पर सियासत गरमा गई है। अब सवाल उठ रहा है कि जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी? भर्ती बोर्ड, बोर्ड के पूर्व अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में कोई बड़ा एक्शन हो, ऐसा नहीं लगता। न कंपनी ब्लैक लिस्ट होगी और न ही कोई अपराध बनेगा। रिजल्ट भी समय पर जारी हो जाएगा। CM योगी ने पुलिस भर्ती बोर्ड से पूरी प्रक्रिया की जांच करने के लिए कहा था, लेकिन अभी तक एक्शन कुछ नहीं हुआ। दैनिक भास्कर ने दरोगा भर्ती परीक्षा कराने वाली एजेंसी के बारे में छानबीन की। देखा, ‘पंडित’ विकल्प रखने के 3 असली जिम्मेदार कौन हैं? पढ़ें पूरी खबर…
    Click here to Read more
    Prev Article
    वरुण गांधी परिवार के साथ PM मोदी से मिले:लोकसभा में टिकट कटने के बाद पहली मुलाकात, अहम जिम्मेदारी मिल सकती है
    Next Article
    यूपी में अंडे पर एक्सपायरी डेट लिखनी होगी:1 अप्रैल से लागू होगा नियम; ताजा बताकर खराब अंडे बेच नहीं पाएंगे दुकानदार

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment