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    MSP की कानूनी गारंटी समेत 6 मुद्दों की मांग:मैनपुरी में किसानों ने राष्ट्रपति को भेजा मांगों का ज्ञापन

    1 hour ago

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    संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के आह्वान पर देशभर में 'जेल भरो' और अन्य विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए। भारत छोड़ो दिवस की 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर किसानों, कृषि श्रमिकों और मजदूरों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम एक मांग पत्र जिलाधिकारी/उपजिलाधिकारी के माध्यम से भेजा। इस ज्ञापन में केंद्र सरकार से कृषि और श्रमिकों से जुड़े मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है। संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति को भेजे अपने मांग पत्र में कहा कि 9 दिसंबर 2021 को दिल्ली की सीमाओं पर हुए किसान आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने MSP, कर्जमाफी, बिजली के निजीकरण और किसानों पर दर्ज मामलों को वापस लेने के संबंध में लिखित आश्वासन दिए थे। संगठन ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इन आश्वासनों को अभी तक लागू नहीं किया गया है और राष्ट्रपति से केंद्र सरकार के स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की है। ज्ञापन में भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते का विरोध किया गया है। किसानों ने संसद में बिना चर्चा के अपनाए गए मौजूदा मुक्त व्यापार समझौतों को रद्द करने की मांग की। संगठन का कहना है कि ऐसे समझौतों का भारतीय कृषि, उद्योग और श्रमिकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके साथ ही कृषि उपज के मुक्त आयात पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई है। किसानों से जुड़े प्रमुख मुद्दों में सभी फसलों के लिए C2+50 प्रतिशत के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी और सुनिश्चित सरकारी खरीद का कानून बनाने की मांग शामिल है। इसके अलावा, ग्रामीण ऋणग्रस्तता को समाप्त करने के लिए किसानों और दिहाड़ी मजदूरों की व्यापक कर्जमाफी लागू करने की मांग भी की गई है। संयुक्त किसान मोर्चा ने किसान आत्महत्या के मामलों में पीड़ित परिवारों को 25 लाख रुपये मुआवजा देने और उनके पूर्ण पुनर्वास की जिम्मेदारी तय करने की मांग भी रखी। संगठन ने कृषि विपणन के लिए राष्ट्रीय नीति ढांचे के कार्यान्वयन को तत्काल रोकने की मांग करते हुए इसे निरस्त कृषि कानूनों की कथित 'बैकडोर एंट्री' बताया। श्रमिकों से जुड़ी मांगों में चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने और सभी श्रमिकों के लिए 42 हजार रुपये प्रतिमाह के वैधानिक न्यूनतम वेतन की मांग की गई। वहीं मनरेगा को बहाल और मजबूत करते हुए साल में 200 दिनों के रोजगार की गारंटी देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि देश में किसानों, कृषि मजदूरों, औद्योगिक श्रमिकों, ग्रामीण मजदूरों, आदिवासियों, कर्मचारियों, युवाओं और महिलाओं समेत मेहनतकश तबकों के सामने गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट है। संगठन ने राष्ट्रपति से मांगों पर केंद्र सरकार को तत्काल कार्रवाई के निर्देश देने की अपील की।
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