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    नोएडा में AI बताएगा कहां और कब लगता है जाम:गूगल मैप से जुड़ेगा सिस्टम, कैमरे-आप्टिकल लाइन की जरूरत नहीं

    4 hours ago

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    नोएडा में ट्रैफिक जाम की समस्या का स्थायी समाधान खोजने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद ली जाएगी। इसके लिए प्रस्तावित AI सॉफ्टवेयर को Google Maps से जोड़ा जाएगा। इससे किसी भी इलाके की मौजूदा ट्रैफिक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी। साथ ही रोजाना का ट्रैफिक डेटा भी करीब 1 से 2 महीने तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। इस पुराने डेटा का AI के जरिए विश्लेषण कर पता लगाया जाएगा कि किस सड़क पर किस समय नियमित रूप से जाम लगता है और कितनी देर तक रहता है। इसके आधार पर जाम की वजह समझने और उसके समाधान की योजना बनाने में मदद मिलेगी। रोजाना कितनी गाड़ियां गुजरती हैं, पता चलेगा सिस्टम से किसी सड़क या स्थान पर वाहनों की आवाजाही का डेटा जुटाया जा सकेगा। इससे पता चलेगा कि किस समय ट्रैफिक का दबाव बढ़ता है और जाम कितनी देर रहता है। डेटा के आधार पर यह तय करने में मदद मिलेगी कि संबंधित सड़क पर क्या बदलाव जरूरी हैं। इसमें ट्रैफिक डायवर्जन, सड़क की क्षमता बढ़ाना, सिग्नल व्यवस्था में बदलाव या दूसरे ट्रैफिक मैनेजमेंट उपाय शामिल हो सकते हैं। नए कैमरे और फाइबर बिछाने की जरूरत नहीं प्रस्तावित सिस्टम की खासियत यह होगी कि हर जगह नए कैमरे या फाइबर ऑप्टिकल लाइन बिछाने की जरूरत नहीं होगी। जहां पहले से कैमरे लगे हैं, वहां उनकी फीड का इस्तेमाल किया जा सकेगा। प्रस्ताव के मुताबिक, कुछ जगहों पर Google Maps और सैटेलाइट आधारित डेटा से भी ट्रैफिक की जानकारी जुटाई जा सकती है। इससे नया इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की लागत और समय बचाने की कोशिश होगी। अभी ITMS में रियल टाइम जानकारी मिलती है नोएडा में फिलहाल इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के जरिए ट्रैफिक की निगरानी की जा रही है। इसमें GPS और Google Maps की मदद से रियल टाइम ट्रैफिक और जाम की जानकारी मिलती है। हालांकि, मौजूदा व्यवस्था में लंबे समय का ट्रैफिक डेटा उपलब्ध नहीं है। कैमरों की फीड को स्टोर किया जा सकता है, लेकिन उसका व्यवस्थित तरीके से लंबे समय के ट्रैफिक पैटर्न के तौर पर विश्लेषण नहीं हो रहा है। AI सिस्टम को ITMS से जोड़ने की तैयारी अब प्रस्तावित AI सिस्टम को मौजूदा ITMS के साथ जोड़कर चलाने की तैयारी है। इससे एक तरफ रियल टाइम ट्रैफिक की जानकारी मिलती रहेगी, वहीं दूसरी तरफ पुराने डेटा का विश्लेषण कर जाम के पैटर्न को समझा जा सकेगा। इस प्रस्ताव का प्रेजेंटेशन नोएडा प्राधिकरण में किया जा चुका है। फिलहाल अधिकारी स्तर पर योजना पर विचार किया जा रहा है। सब कुछ तय होने के बाद इसके लिए RFP (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) जारी की जाएगी।
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