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    नेपाल में आम चुनाव के लिए वोटिंग जारी:275 सीटों पर मतदान, गगन थापा-बालेन शाह और केपी शर्मा ओली के बीच मुकाबला

    2 hours ago

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    नेपाल में आम चुनाव के लिए वोटिंग जारी है। इन चुनावों पर दुनिया के कई देशों की नजर है, क्योंकि सितंबर 2025 में युवाओं के हिंसक प्रदर्शनों के बाद यह पहला आम चुनाव है। तब तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार गिर गई थी। ओली के इस्तीफे के बाद नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी, जो अब चुनाव करा रही है। इस चुनाव में काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह, केपी शर्मा ओली और गगन थापा को प्रधानमंत्री पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। 24 घंटे में नतीजे आ जाएंगे चुनाव में कुल 65 राजनीतिक दल मैदान में हैं। मतदान खत्म होते ही मतगणना शुरू हो जाएगी। उम्मीद है कि अगले 24 घंटे के भीतर सामने आ जाएंगे। देश के सभी 77 जिलों में एक ही चरण में सुबह 7 बजे (भारतीय समय के मुताबिक 6:45 बजे) से शाम 5 बजे (भारतीय समय के मुताबिक 4:45 बजे) तक वोटिंग होगी। इसके लिए देशभर में 23 हजार से ज्यादा मतदान केंद्र बनाए गए हैं। करीब 1.9 करोड़ वोटर्स ने चुनाव के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। इनमें लगभग 8 लाख युवा पहली बार वोट देंगे। नेपाल में मतदान की न्यूनतम उम्र 18 साल है। नवंबर 2022 के पिछले संसदीय चुनाव की तुलना में इस बार करीब 10 लाख ज्यादा वोटर रजिस्टर्ड हुए हैं। युवा आंदोलन के बाद राजनीति में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। नेपाल में वोटिंग कैसे होती है? नेपाल में 2015 से मिश्रित (मिक्सड) चुनाव प्रणाली लागू है। इसके तहत संसद की कुल 275 सीटों में से 165 सांसद सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं। यानी इन सीटों पर लोग अपने क्षेत्र के उम्मीदवार को वोट देकर चुनते हैं। बाकी 110 सीटें अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से भरी जाती हैं। इसमें राजनीतिक दलों को देशभर में जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं, उसी अनुपात में उन्हें संसद में सीटें मिलती हैं और पार्टियां अपने सांसदों को नामित करती हैं। बालेन शाह और गगन थापा में मुकाबला एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस चुनाव के जरिए काठमांडू में प्रभाव जमाने की होड़ चल रही है। भारत और चीन के बीच फंसे नेपाल में अमेरिका भी अपना असर बढ़ा रहा है। भारत के बारे में माना जाता है कि वह नहीं चाहता कि ओली फिर से प्रधानमंत्री बनें। GenZ आंदोलन के बाद ओली की लोकप्रियता कम हुई है। उनकी पार्टी CPN-UML को इस चुनाव में ज्यादा सीटें मिलती नहीं दिख रही है। अगर ओली की पार्टी का प्रदर्शन खराब रहता है तो प्रधानमंत्री पद की सीधी टक्कर नेपाली कांग्रेस के गगन थापा और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के बालेन शाह के बीच हो सकती है। नेपाली कांग्रेस के भारत के साथ पुराने और अच्छे रिश्ते रहे हैं। यह पार्टी नेपाल-चीन व्यापारिक रिश्तों को लेकर सतर्क रहती है, खासकर बीआरआई परियोजनाओं के कर्ज को लेकर। यही वजह है कि यह पार्टी अमेरिका और पश्चिमी देशों को भी पसंद है। वहीं बालेन शाह के साथ काम करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, क्योंकि उन्हें ज्यादा भावुक और अप्रत्याशित नेता माना जाता है। भारत की नाराजगी का कारण यह भी रहा कि जब शाह काठमांडू के मेयर थे, तब उन्होंने अपने दफ्तर में ‘ग्रेटर नेपाल’ का नक्शा लगाया था। उन्होंने कुछ भारतीय फिल्मों पर भी रोक लगाने की कोशिश की थी। शाह ने खुद को ऐसे नेता के तौर पर पेश किया है जो किसी भी देश के प्रभाव में नहीं है। तभी उन्होंने चीन का दौरा करने का न्योता ठुकरा दिया था। हालांकि वह जिस राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी से जुड़े हैं, वह भारत के ज्यादा करीब मानी जाती है।
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