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    नदियों में प्लास्टिक कचरे की ट्रैकिंग के लिए बनाया प्रोटोकॉल:दूध और खाद्य पदार्थों में घुल रहे माइक्रोप्लास्टिक के खतरे पर कसेगा शिकंजा

    3 hours ago

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    भारतीय नदियों को प्लास्टिक प्रदूषण के बढ़ते गंभीर खतरे से मुक्त कराने की दिशा में देश को बड़ी सफलता मिली है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 9वें इंडिया इंटरनेशनल वॉटर वीक (IIWW) 2026 में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने स्वदेशी रूप से विकसित 'रिवरिन मैक्रोप्लास्टिक्स मॉनिटरिंग' (नदियों में मैक्रोप्लास्टिक कचरे की निगरानी) प्रोटोकॉल लॉन्च किया। जल शक्ति मंत्रालय के 'नमामि गंगे मिशन' (NMCG) के तहत तैयार किया गया यह देश का पहला वैज्ञानिक ढांचा (प्रोटोकॉल) है, जो भारतीय नदियों में प्लास्टिक कचरे के प्रवाह को रोकने और सबूत-आधारित प्रबंधन में क्रांतिकारी साबित होगा। प्रोटोकॉल को तैयार करने में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के रसायन शास्त्र (केमिस्ट्री) विभाग के प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. कृपा राम की मुख्य भूमिका रही है। उनके साथ देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की उच्च स्तरीय टास्क फोर्स ने दिन-रात मेहनत कर इसे आकार दिया। खाने-पीने की चीजों तक पहुंचा प्लास्टिक माइक्रोप्लास्टिक (आकार में 5 मिलीमीटर से छोटे प्लास्टिक कण) इंसानी सेहत और पर्यावरण के लिए एक साइलेंट किलर बन चुके हैं। नदियों में फेंका जाने वाला मैक्रोप्लास्टिक धीरे-धीरे टूटकर माइक्रोप्लास्टिक में बदल जाता है। यह जलीय जीवों, मछलियों से होता हुआ दूध और खाद्य पदार्थों के जरिए इंसानी शरीर में पहुंच रहा है। मानव शरीर के भीतर पहुंचकर ये प्लास्टिक कण गंभीर सूजन (इनफ्लेमेशन), ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और हार्मोनल गड़बड़ियों (हार्मोनल असंतुलन) का कारण बन रहे हैं। नमामि गंगे मिशन के तहत शुरू किया गया यह प्रोटोकॉल गंगा नदी के पुनरुद्धार में मील का पत्थर साबित होगा। नदियों में प्लास्टिक कचरे की सटीक निगरानी और हॉट-स्पॉट्स की पहचान से गंगा किनारे रहने वाले करोड़ों लोगों को स्वच्छ और safe पीने का पानी मिल सकेगा। जलीय जीवों और मछलियों के पेट में जाने वाले माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा में भारी कमी आएगी, जिससे मत्स्य पालन और रिवर इकोसिस्टम सुरक्षित होगा। यह टास्क फोर्स प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए डीपीआर (DPR), शोध प्रस्तावों की समीक्षा करेगी और नई तकनीकों व जन-भागीदारी (समुदाय-आधारित प्रयासों) को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत सुझाव सरकार को सौंपेगी। टास्क फोर्स में शामिल प्रमुख सदस्य प्रो. गुलाम जीलानी: अर्थ साइंसेज विभाग, कश्मीर यूनिवर्सिटी (श्रीनगर) डॉ. बी.के. दास: निदेशक, ICAR-सेंट्रल इनलैंड फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट (कोलकाता) डॉ. महुआ साहा: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी (गोवा) प्रो. अभयानंद सिंह मौर्य: अर्थ साइंसेज विभाग, IIT रुड़की डॉ. प्रदीप डे: ICAR-CIFRI डॉ. स्मिता मोहंती: CIPET जी. त्रिमूर्ति: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) अरुण कंसल: द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) सुश्री रूबी राजू: NMCG इस विशेष टास्क फोर्स के संयोजक धीरज जोशी और सदस्य सचिव डॉ. सहजप्रीत कौर गरेवाल (NMCG) रहे। पूरे प्रोजेक्ट की समग्र देखरेख और मार्गदर्शन NMCG के महानिदेशक (डायरेक्टर) राजीव कुमार मित्तल तथा उप निदेशक नलिन कुमार श्रीवास्तव द्वारा किया गया।
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