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    ऑक्सीजन मास्क निकलने से नवजात शिशु की मौत:झांसी में पिता बोले- अस्पतापल की लापरवाही से जान गई, शादी के 8 साल बाद हुआ था

    5 hours ago

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    “हमारी शादी को 8 साल हो गए थे। बच्चा नहीं हो रहा था। मन्नत मांगने हम लोग मेहंदीपुर बालाजी, मैहर समेत दर्जनों धार्मिक स्थान पर गए। आखिरकार भगवान ने हमारी सुन ली और पत्नी प्रेग्नेंट हो गई। 9 फरवरी को ऑपरेशन से बेटा हुआ। मगर अस्पताल की लापरवाही के कारण हमने 12 दिन में ही अपने बच्चे को खो दिया। उसका ऑक्सीजन मास्क निकल गया, मगर स्टाफ ने ध्यान नहीं दिया। वो तड़पने लगा और फिर मुंह से खून आ गया। इसके बाद उसकी डेथ हो गई। हम चाहते हैं जो दोषी हैं, उन पर कार्रवाई हो।” ये आरोप शिवम अहिरवार ने डॉक्टर व स्टाफ पर लगाए हैं। उनके नवजात शिशु की 21 फरवरी को मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। पुलिस को बुला लिया। अब पुलिस शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम करा रही है। घटना मेडिकल कॉलेज के सामने वात्सल्य हॉस्पीटल की है। अब पूरा मामला विस्तार से पढ़िए 8 साल पहले हुई थी शादी उल्दन निवासी शिवम अहिरवार ने बताया- मैं प्राइवेट काम करता हूं। 8 साल पहले मेरी शादी रविता से हुई थी। शादी के बाद बच्चा नहीं हो रहा था। एक बार पत्नी प्रेंग्नेंट हुई तो बच्चा शराब हो गया। हम लोग ने धार्मिक स्थलों पर जाकर कापी मन्नतें मांगी। आखिरकार भगवान ने हमारी सुन ली और पत्नी प्रेग्नेंट हो गई। प्रसव पीड़ा होने पर रानीपुर के एक क्लीनिक पर ले गए। वहां 9 फरवरी को ऑपरेशन से पत्नी ने एक बेटे को जन्म दिया। बच्चा एकदम स्वस्थ्य था। 13 फरवरी को डिस्चार्ज होने पर हम लोग घर चले गए। दो दिन बाद बच्चे को बुखार आ गया। तब 17 फरवरी को डाॅ. प्रमोद गुप्ता के पास लेकर आए। उन्होंने बच्चे को भर्ती कर लिया। कांच से देखा तो तड़प रहा था बच्चा शिवम ने आगे बताया- बच्चे का इलाज चला तो उसकी हालत में सुधार आने लगा। डॉक्टर ने ही जल्द ही डिस्चार्ज करने की बात कही। आरोप है कि 21 फरवरी को नर्स खाना खाने चली गई। इस बीच बच्चे के मुंह से ऑक्सीजन माक्स निकल गया। जब हम लोगों ने कांच से देखा तो वो झटके लेते हुए तड़प रहा था। उसके मुंह से खून आ गया। इसके बाद हालात बिगड़ते चली गई। मगर डॉक्टर नहीं आए। इसके बाद बच्चे की मौत हो गई। मगर स्टाफ ने जानकारी नहीं दी। तब हम लोगों ने पुलिस को बुला लिया। इसके बाद माने की बच्चे की मौत हो चुकी है। हम लोगों ने शिकायत दे दी है। जो दोषी हैं, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। बच्चा बहुत सीरिसय था, अब झूठे आरोप लगा रहे हैं डॉ. प्रमोद गुप्ता का कहना है कि जब परिजन नवजात शिशु को लेकर आए तो वो सीरियस था। सांस लेने में दिक्कत थी। इसके बारे में परिजनों को भी बता दिया था। इलाज चला तो थोड़ी सुधार आया। मगर अचानक उसकी हालत बिगड़ गई। वेंटीलेटर पर रखा, लेकिन हम लोग बच्चे को बचा नहीं पाए। कोई भी डॉक्टर नहीं चाहता है कि उसके पेसेंट की मौत हो। अब परिजन झूठे और निराधार आरोप लगा रहे हैं। जिनमें कोई सच्चाई नहीं है। पोस्टमार्टम हो रहा है तो सबकुछ सामने आ जाएगा।
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