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    प्रयागराज कोर्ट ने भास्कर इन्वेस्टिगेशन को जांच में शामिल किया:आशुतोष महाराज ने शंकराचार्य के खिलाफ साजिश रची थी, अब FIR का दायरा बढ़ेगा

    11 hours ago

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    प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने दैनिक भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन को डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के तौर पर जांच का हिस्सा बनाने का आदेश दिया है। मामला शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद स्वामी पर दो बटुकों से यौन शोषण के आरोपों से जुड़ा है। दैनिक भास्कर ने अपने इन्वेस्टिगेशन पाया कि यह आशुतोष महाराज की साजिश थी। शंकराचार्य के शिष्य स्वामी मुकुंदानंद के वकील पीएन मिश्र ने सोमवार को कोर्ट में ये स्टिंग ऑपरेशन दिखाया। इसके बाद कोर्ट ने पुलिस को इसे जांच में शामिल करने का आदेश दिया। पढ़िए खबर का असर… भास्कर स्टिंग से केस की जांच का एंगल बदला शंकराचार्य के शिष्य स्वामी मुकुंदानंद के वकील पीएन मिश्र ने कोर्ट में ‘दैनिक भास्कर’ की चार महीने की जांच रिपोर्ट और स्टिंग से जुड़े सबूत पेनड्राइव में पेश किए। पीएन मिश्र ने बताया, “हमने कोर्ट में एक जरूरी आवेदन दिया था। कोर्ट ने हमारे तर्क और सबूतों को गंभीरता से लेते हुए इन्हें FIR संख्या 58/2026 की जांच में शामिल करने का आदेश दिया है। अब तक इस मामले में सिर्फ दो लोगों पर ही कार्रवाई की जा रही थी। लेकिन इन सबूतों के सामने आने के बाद शंकराचार्य के खिलाफ साजिश में शामिल बाकी लोगों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होगी। अब पढ़िए शंकराचार्य के खिलाफ साजिश कैसे बेनकाब हुई शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर आरोप था कि उन्होंने जनवरी, 2025 के महाकुंभ से फरवरी, 2026 के माघ मेले के बीच प्रयागराज में दो किशोरों के साथ यौन उत्पीड़न किया। स्पेशल जज के आदेश पर शंकराचार्य और उनके शिष्य के खिलाफ झूंसी थाने में कई धाराओं में FIR दर्ज की गई थी। इस मामले में शंकराचार्य ने अग्रिम जमानत के लिए प्रयागराज कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। कोर्ट ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की अर्जी स्वीकार करते हुए उन्हें अग्रिम जमानत दे दी थी। मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने चार महीने तक इन्वेस्टिगेशन किया। टीम उस बटुक और उसके परिवार तक पहुंची, जिसके नाम पर FIR दर्ज कराई गई थी। खुफिया कैमरे के सामने बटुक और उसके परिजनों ने जो बातें बताईं, उससे मामले ने नया मोड़ ले लिया। स्टिंग ऑपरेशन में बटुक और उसके परिवार ने दावा किया कि वे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को जानते तक नहीं। न ही कभी उनके आश्रम में पढ़ने या रहने गए। इन्वेस्टिगेशन में यह भी सामने आया कि इस पूरे मामले के पीछे आशुतोष महाराज की भूमिका थी। उन्होंने एक साधारण ग्रामीण परिवार को कथित तौर पर इस मामले में मोहरा बनाया। आशुतोष महाराज ने गांव के दो साधारण बटुक क्यों चुने? दैनिक भास्कर की पड़ताल के मुताबिक, आशुतोष महाराज ने करीब एक साल पहले यूपी के दो अलग-अलग शहरों में हुए यज्ञ के दौरान इन बटुकों से संपर्क किया था। यज्ञ में दोनों बटुकों को 60-60 हजार रुपए दक्षिणा मिली थी। रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में इन्हीं बटुकों को कथित साजिश में शामिल किया गया। इसके पीछे तीन वजहें बताई गईं… 1. आर्थिक मजबूरी- दोनों बटुक बेहद साधारण और गरीब ग्रामीण परिवारों से आते हैं। परिवारों के पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं था। 2. धार्मिक आस्था का फायदा- बटुक और उनके परिवार धर्म-कर्म में विश्वास रखते थे। इसी आस्था का इस्तेमाल कर उन्हें धर्म और देव-कार्य के नाम पर प्रभावित किया गया। 3. पहले से पहचान- आशुतोष महाराज की दोनों बटुकों से पहले से पहचान थी। इसी वजह से उन्हें लगा कि पैसों या दबाव के जरिए परिवार को अपनी बात मानने के लिए तैयार किया जा सकता है। केस में अब अब आगे क्या होगा? प्रयागराज कोर्ट के भास्कर स्टिंग को आधार बनाने के आदेश के बाद अब झूंसी पुलिस को मामले की जांच का दायरा बढ़ाना होगा। पुलिस को आशुतोष महाराज और उनके सहयोगियों की भूमिका के साथ-साथ अपहरण, फेक डॉक्यूमेंट तैयार करने और आपराधिक साजिश जैसे आरोपों की भी जांच करनी होगी। कोर्ट के आदेश के बाद जांच में सामने आने वाले नए तथ्यों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई तय करेगी। अगर किसी व्यक्ति की भूमिका और अपराध में संलिप्तता के सबूत मिलते हैं, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होना तय है। ------------- ये भी पढ़ें- आशुतोष महाराज ने शंकराचार्य के खिलाफ रची थी साजिश:बटुक को स्कूल से उठवाया, पिता को बंधक बनाया; खुफिया कैमरे पर षड्यंत्र का खुलासा 4 महीने की इन्वेस्टिगेशन के बाद दैनिक भास्कर सच सामने लाया। भास्कर उस बटुक तक पहुंचा, जिसने कहा था शंकराचार्य ने यौन शोषण किया। खुफिया कैमरे में बटुक और उसके परिवार ने कबूला कि वे शंकराचार्य को जानते तक नहीं हैं। न कभी मुलाकात की। पढ़िए शंकराचार्य के खिलाफ आशुतोष के षड्यंत्र की पूरी कहानी…
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