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    राजमिस्त्री के बेटे विशाल निषाद का IPL तक का सफर:पंजाब किंग्स का बने हिस्सा, बोले- इंटरनेशनल टीम में जगह बनाना है लक्ष्य

    5 hours ago

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    गोरखपुर के 22 साल के स्पिनर विशाल निषाद की कहानी उन हजारों युवाओं जैसी है जो छोटे शहरों में बड़े सपने देखते हैं, लेकिन उन्हें सच करने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ता है। राजमिस्त्री के घर जन्मे विशाल ने बचपन से ही जिंदगी की जिम्मेदारियों को करीब से देखा। सीमित साधनों के बीच भी उन्होंने क्रिकेट खेलने का सपना नहीं छोड़ा और उसी जुनून ने आज उन्हें IPL तक पहुंचा दिया। IPL ऑक्शन में पंजाब किंग्स ने उन्हें 30 लाख रुपए में अपनी टीम में शामिल किया है। ऑक्शन के बाद पहली बार गोरखपुर पहुंचे विशाल ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपने सफर को याद करते हुए कहा कि यहां तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं था, लेकिन परिवार का साथ, कोच का भरोसा और खुद की मेहनत ने हर मुश्किल को छोटा कर दिया। विशाल के पिता उमेश निषाद राजमिस्त्री हैं। घर की जिम्मेदारियां निभाने के लिए विशाल भी उनके साथ मजदूरी करते थे। दिन में काम और मन में क्रिकेट का सपना- यही उनकी जिंदगी थी। लेकिन कोच के भरोसे और अपने जुनून ने उन्हें हिम्मत दी और उन्होंने मजदूरी छोड़ पूरी तरह क्रिकेट पर ध्यान देना शुरू कर दिया। लगातार अभ्यास, धैर्य और खुद पर विश्वास ने धीरे-धीरे उनकी राह आसान की। आज जब वह पीछे मुड़कर देखते हैं तो उन्हें हर वह पल याद आता है जिसने उन्हें मजबूत बनाया। विशाल कहते हैं कि यह सफलता सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि उनके परिवार और कोच की भी है, जिन्होंने मुश्किल समय में उनका हौसला बढ़ाया। अब उनकी नजर आगे के सफर पर है। उनका सपना है IPL में अच्छा प्रदर्शन करना, लगातार सीखते रहना और इंटरनेशनल टीम में जगह बनाकर शहर और प्रदेश का नाम रोशन करना है। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल- गोरखपुर के छोटे मैदान से IPL ड्रेसिंग रूम तक पहुंचने का सफर आपको अंदर से कितना बदला है? जवाब- यह सफर मेरे लिए बहुत बड़ा बदलाव लेकर आया है। पहले मैं सिर्फ खेलना चाहता था, लेकिन अब जिम्मेदारी का एहसास है। इस यात्रा ने मुझे अनुशासन, धैर्य और खुद पर भरोसा करना सिखाया है। बात करें ड्रेसिंग रूम के माहौल की तो वह अच्छा रहता है। सीनियर खिलाड़ी काफी सहयोग करते हैं और अपनी सलाह से स्किल्स को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, जिससे सीखने का अच्छा मौका मिलता है। सवाल- क्रिकेट की शुरुआत कैसे हुई? जवाब- मैं गोरखपुर में टेनिस बॉल से क्रिकेट खेलता था। वहीं कोच कल्याण सिंह ने मुझे देखा और अकादमी में आने के लिए कहा। यहीं से मेरी सही ट्रेनिंग शुरू हुई और मैंने क्रिकेट को गंभीरता से लेना शुरू किया। सवाल- परिवार की आर्थिक स्थिति कैसी थी? जवाब- मेरे पिता राजमिस्त्री हैं और मैं भी पहले उनके साथ मजदूरी करता था। घर की जिम्मेदारी थी इसलिए काम करना पड़ता था, लेकिन परिवार ने हमेशा मेरा साथ दिया। सवाल- क्रिकेट खेलने का फैसला कैसे हुआ? जवाब- जब कोच ने पापा से कहा कि मुझे क्रिकेट खेलने दें तो उन्होंने पूछा कि क्रिकेट से क्या मिलेगा। कोच ने एक साल का समय मांगा और भरोसा दिलाया कि मेहनत करूंगा तो आगे बढ़ सकता हूं। इसके बाद मैंने मजदूरी छोड़ दी और पूरी तरह क्रिकेट पर ध्यान देना शुरू कर दिया। सवाल- उस समय सबसे बड़ी चुनौती क्या थी? जवाब- सबसे बड़ी चुनौती खुद को साबित करना था। शुरुआत में संसाधन कम थे, लेकिन मैंने लगातार अभ्यास किया और खुद को बेहतर बनाने की कोशिश की। सवाल- टीम मैनेजमेंट ने आपसे किस रोल की उम्मीद जताई है और आप खुद को किस भूमिका में देखते हैं? जवाब- टीम मैनेजमेंट ने मुझसे एक स्पिन गेंदबाज के रूप में अपनी ताकत के साथ खेलने को कहा है। मैं खुद को ऐसे गेंदबाज के रूप में देखता हूं जो टीम को जरूरत के समय विकेट दिला सके और मैच का रुख बदल सके। सवाल- अपनी सफलता का श्रेय किसे देते हैं? जवाब- मैं अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच और गुरुजनों को देता हूं। उन्होंने हमेशा मेरा मार्गदर्शन किया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। सवाल- छोटे शहर के खिलाड़ियों के लिए आपका चयन कितना बड़ा संदेश है और आप उन्हें क्या कहना चाहेंगे? जवाब- मेरा मानना है कि अगर मेहनत और लगन हो तो छोटे शहर से भी बड़े मंच तक पहुंचा जा सकता है। मैं यही कहना चाहूंगा कि अपने सपने पर भरोसा रखें और लगातार मेहनत करते रहें। सवाल- जब आप पहली बार पंजाब किंग्स कैंप में जाएंगे तो किस खिलाड़ी से सीखने का सबसे ज्यादा इंतजार रहेगा और क्यों? जवाब- मुझे वरुण चक्रवर्ती से मिलने और उनसे सीखने का सबसे ज्यादा इंतजार है। उनकी गेंदबाजी मुझे बहुत पसंद है और मैं भी उनकी तरह गेंदबाजी करने की कोशिश करता हूं, इसलिए उनसे बहुत कुछ सीखना चाहता हूं। सवाल- आपका आदर्श कौन है और आगे का लक्ष्य क्या है? जवाब- विराट कोहली मेरे आदर्श हैं। मेरा लक्ष्य अच्छा प्रदर्शन करना और देश व प्रदेश का नाम रोशन करना है। मैं आगे भी पूरी मेहनत से खेलता रहूंगा और इंटरनेशनल टीम में जगह बनाकर शहर और प्रदेश का नाम रोशन करूंगा। कोच कल्याण सिंह बोले- पहली नजर में दिख गया था अलग हुनर, मेहनत ने दिलाई पहचान गोरखपुर के स्पिनर विशाल निषाद की सफलता के पीछे उनके कोच कल्याण सिंह का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने न सिर्फ उनकी प्रतिभा को पहचाना बल्कि सही दिशा भी दी। दैनिक भास्कर से बातचीत में कल्याण सिंह ने बताया कि पहली बार देखने पर ही उन्हें विशाल की गेंदबाजी में अलग आत्मविश्वास नजर आया था। उन्होंने कहा कि परिवार को समझाना आसान नहीं था, लेकिन विशाल की मेहनत और लगन ने हर भरोसे को सही साबित किया। पढ़िए कोच से हुई बातचीत… सवाल- आपने विशाल को पहली बार कब और कैसे देखा? उस समय क्या खास लगा? जवाब- करीब तीन साल पहले मैंने उसे टेनिस बॉल से क्रिकेट खेलते देखा था। वह दोस्तों के साथ खेल रहा था, लेकिन उसकी गेंदबाजी में अच्छा कंट्रोल और आत्मविश्वास नजर आया। तभी लगा कि इस लड़के में कुछ खास है और अगर सही ट्रेनिंग मिले तो आगे जा सकता है। सवाल- फिर उसके क्रिकेट करियर की शुरुआत कैसे हुई? जवाब- मैंने उसे अकादमी में बुलाया और नियमित ट्रेनिंग शुरू कराई। शुरू से ही उसमें सीखने की ललक थी और वह काफी मेहनत करता था। धीरे-धीरे उसका खेल निखरता गया और उसने खुद को पूरी तरह क्रिकेट के लिए समर्पित कर दिया। सवाल- परिवार को मनाना कितना मुश्किल था? आपने उसके पिता को कैसे समझाया? जवाब- शुरुआत में उसके पिता को समझाना आसान नहीं था। उन्होंने पूछा कि क्रिकेट से क्या मिलेगा। मैंने उनसे कहा कि बस एक साल का समय दीजिए, अगर मेहनत करेगा तो आगे जरूर बढ़ेगा। बाद में उन्होंने भरोसा किया और विशाल ने अपनी मेहनत से उसे सही साबित किया। सवाल- पंजाब किंग्स को अब तक IPL ट्रॉफी नहीं मिली है, क्या आपको लगता है कि इस बार संभावना बढ़ी है? जवाब- मुझे पूरा विश्वास है कि इस बार पंजाब ही IPL जीतेगी। विशाल का पैर बहुत शुभ है और जिस तरह वह क्रिकेट खेलता है उससे टीम को काफी फायदा मिलेगा। मुझे भरोसा है कि वह टीम के लिए अहम भूमिका निभाएगा।
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