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    रेणुका शहाणे को मिली थी खून से लिखी चिट्ठी:बोलीं- मैं डर गई, यह प्यार नहीं बल्कि डराने वाली दीवानगी थी

    19 hours ago

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    90 के दशक में टीवी शो 'सुरभि' ने रेणुका शहाणे को घर-घर तक पहुंचा दिया था। उस दौर में सोशल मीडिया नहीं था, लेकिन लाखों चिट्ठियां कलाकारों तक पहुंचती थीं। दैनिक भास्कर से बातचीत में रेणुका शहाणे ने 'सुरभि' के दिनों की यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि फैंस के खत उनके लिए खास होते थे। एक दिन उन्हें खून से लिखा पत्र मिला, जिसने उन्हें बुरी तरह डरा दिया था। उन्होंने 'हम आपके हैं कौन' के बाद फिल्मों के बजाय टीवी चुनने की वजह भी बताई। सवाल: आप करीब 10 साल तक 'सुरभि' जैसे ऐतिहासिक शो का हिस्सा रहीं। आज जब हर चीज सोशल मीडिया पर आ गई है, तो क्या आपको चिट्ठियों वाला दौर याद आता है? जवाब: बहुत याद आता है। वह बेहद खूबसूरत एहसास था, जिसे आज हम मिस करते हैं। उस समय फैंस लंबे खत लिखा करते थे। उन चिट्ठियों में सिर्फ हमारे लिए प्यार नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी की बातें भी होती थीं। ऐसा लगता था कि हमारा उनसे व्यक्तिगत रिश्ता बन गया है। आज लोगों से संपर्क करना आसान हो गया है, लेकिन उस इंतजार की मिठास खो गई है। किसी जवाब का इंतजार करना भी अपने आप में खुशी होती थी। पुराने पोस्ट ऑफिस बॉक्स देखती हूं तो लगता है कि एक पूरा दौर वहीं छूट गया। सवाल: उस दौर में फैंस के खतों से जुड़ा कोई ऐसा किस्सा जो आज भी याद हो? जवाब: बहुत सारे हैं। सबसे ज्यादा मुझे स्कूल के बच्चों की चिट्ठियां याद आती हैं। 'सुरभि' उस समय बच्चों का भी पसंदीदा कार्यक्रम था। कई बच्चे नौवीं-दसवीं से मुझे खत लिखना शुरू करते थे और कॉलेज तक लिखते रहे। उनकी पढ़ाई, दोस्त और सपने, सब उन चिट्ठियों में होते थे। ऐसा रिश्ता आज शायद सोशल मीडिया पर बन पाना मुश्किल है। एक घटना मैं कभी नहीं भूल सकती। बचपन में सुनते थे कि राजेश खन्ना जी को खून से लिखे खत आते थे। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे साथ भी ऐसा होगा। एक दिन मेरे घर पर खून से लिखा खत आया। उसे देखकर मैं सचमुच डर गई थी। मुझे लगा कि अगर कोई इंसान इस हद तक जा सकता है, तो ये प्यार नहीं बल्कि डराने वाली दीवानगी है। उस खत ने मुझे बहुत असहज कर दिया था। सवाल: इतना प्यार, इतनी लोकप्रियता, फिर भी क्या कभी लगा कि अभी बहुत कुछ हासिल करना बाकी है? जवाब: नहीं। सच कहूं तो मुझे जितना मिला, उसकी मैंने कभी कल्पना नहीं की थी। मैंने कभी आईने के सामने खड़े होकर अवॉर्ड लेने की स्पीच की प्रैक्टिस नहीं की। मैं इस क्षेत्र में इसलिए आई थी क्योंकि मुझे थिएटर से प्यार था। कब थिएटर मेरा पेशा बन गया और कब मुझे ऐसे मौके मिले जिन्होंने इतिहास रच दिया, यह मेरे लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं है। इसलिए मुझे कभी नहीं लगा कि कुछ छूट गया। सवाल: 'हम आपके हैं कौन' के बाद भी आपने कई फिल्में ठुकरा दीं। ऐसा फैसला लेना आसान नहीं रहा होगा? जवाब: उस समय फिल्मों में लगभग एक जैसे किरदार मिल रहे थे। एक भूमिका पसंद आने के बाद उसी तरह के रोल बार-बार मिलने लगते थे। मुझे लगा कि टेलीविजन पर महिलाओं के लिए ज्यादा मजबूत और अर्थपूर्ण किरदार लिखे जा रहे हैं। वहां हर बार कुछ नया करने का मौका मिलता था। इसलिए मैंने फिल्मों की बजाय टीवी को प्राथमिकता दी। सवाल: लेकिन उस दौर में फिल्मों को मना करना बहुत बड़ी बात मानी जाती थी? जवाब: शायद इसलिए कि मेरी महत्वाकांक्षा अलग थी। मेरा लक्ष्य सिर्फ लोकप्रिय होना नहीं था। मैं अच्छा काम करना चाहती थी। थिएटर ने मुझे सिखाया कि दर्शक पांच हों या पांच हजार, काम पूरी ईमानदारी से करना है। सफलता का मतलब सिर्फ स्टार बनना नहीं, बल्कि हर काम से कुछ नया सीखना भी है। मैंने हमेशा उसी सोच के साथ काम किया। सवाल: यानी आपके लिए लोकप्रियता से ज्यादा काम की गुणवत्ता मायने रखती थी? जवाब: बिल्कुल। मैं प्रशिक्षित अभिनेत्री नहीं थी। मैंने हर काम करते हुए सीखा। हर नए प्रोजेक्ट ने मुझे कुछ नया सिखाया। लोकप्रियता अपने आप मिलती चली गई। इसलिए मैंने कभी नहीं सोचा कि मुझे क्या हासिल करना है। मेरे लिए अच्छा काम करना ही सबसे बड़ी उपलब्धि रही। __________________________________ यह इंटरव्यू भी पढ़ें.. शाहरुख फिल्मों के बारे में नहीं सोचते थे:रेणुका शहाणे बोलीं- टीवी के बड़े स्टार थे, उन्हें देखने हजारों की भीड़ जुटती थी थिएटर से अभिनय की शुरुआत, पीएचडी छोड़कर एक्टिंग को करियर बनाना, शाहरुख खान के साथ 'सर्कस' में काम करने का अनुभव, निर्देशन की नई पारी और सोशल मीडिया पर बेबाक राय। दैनिक भास्कर से बातचीत में रेणुका शहाणे ने करियर के कई किस्से साझा किए, जिनसे पता चलता है कि उन्होंने लोकप्रियता से ज्यादा अच्छे काम को महत्व दिया।पूरा इंटरव्यू पढ़ें.. सास मां बन जाए तो रिश्ते खूबसूरत बनते हैं:रेणुका शहाणे बोलीं- नहीं तो बेटा और पति सास-बहू के झगड़ों में पिसेंगे मराठी वेब सीरीज 'अगं आई अहो आई' में रेणुका शहाणे ऐसी मां का किरदार निभा रही हैं, जो रिश्तों को जोड़ने में विश्वास रखती है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि 'अगं आई' और 'अहो आई' का मतलब क्या है, सास-बहू के रिश्तों को लेकर धारणाएं कैसे बदल सकती हैं, परिवार क्यों टूट रहे हैं और बेटी की शादी के बाद मां किन भावनाओं से गुजरती है।पूरा इंटरव्यू पढ़ें...
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