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    सीएम से सनातन धर्म का प्रमाण-मांगने पर शंकराचार्यों में मतभेद:चित्रकूट में स्वामी अधोक्षतानंद बोले– अनावश्यक विवाद

    22 hours ago

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    चित्रकूट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सनातन धर्म और हिंदू होने का प्रमाण मांगने के बयान को लेकर शंकराचार्यों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। गोवर्धन पीठ के स्वामी अधोक्षतानंद ने इस पूरे विवाद को अनावश्यक बताते हुए इसे हिंदू समाज के हित में नहीं बताया है। चित्रकूट दौरे पर भरतकूप क्षेत्र में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शंकराचार्य स्वामी अधोक्षतानंद ने कहा कि देश में सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार सही दिशा में हो रहा है और ऐसे समय में इस तरह के बयान समाज को भ्रमित करने वाले हैं। उन्होंने शंकराचार्य अवीमुक्तेश्वरानंद स्वामी द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली पर सवाल उठाने और उनसे हिंदू होने का प्रमाण मांगने पर नाराजगी जताई। शंकराचार्य अधोक्षतानंद ने कहा कि इस तरह की बातें हिंदू समाज को कमजोर करती हैं और धर्म के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने विपक्षी दलों और कुछ धर्माचार्यों द्वारा धर्म को राजनीतिक मुद्दा बनाने पर भी आपत्ति जताई। शंकराचार्य ने स्पष्ट कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनना सनातन धर्म की मजबूती का प्रतीक है। इसके लिए भाजपा सरकार के प्रयासों को श्रेय दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब सनातन धर्म मजबूत स्थिति में है, तब उससे जुड़े विषयों को विवाद का रूप देना उचित नहीं है। चित्रकूट में बनेगा देश का आधुनिक संस्कृत गुरुकुलम्- स्वामी अधोक्षजानन्द स्वामी अधोक्षजानन्द देवतीर्थ महाराज ने चित्रकूट में एक आधुनिक संस्कृत गुरुकुलम् स्थापित करने का निर्णय लिया है। लगभग आठ एकड़ भूमि पर बनने वाला यह गुरुकुलम् देश के सबसे आधुनिक और अनूठे संस्कृत शिक्षण संस्थानों में शामिल होगा। इसका मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म, वेद-शास्त्र और भारतीय ज्ञान परंपरा की शिक्षा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। यह गुरुकुलम् चित्रकूट के मड़फा महादेव क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा। संस्थान का वातावरण आरण्यक, शांत और आध्यात्मिक होगा, जिससे छात्रों को अध्ययन और साधना के लिए अनुकूल वातावरण मिल सके। यहां देशभर के प्रतिष्ठित संस्कृत विद्वान प्रोफेसरों की नियुक्ति की जाएगी, जो छात्रों को उच्च स्तरीय शिक्षा प्रदान करेंगे। इस पहल की सराहना करते हुए राजस्थान के जयपुर स्थित संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मृदंग मोहन झा ने कहा कि केंद्र सरकार ने संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय संस्कृत शिक्षा बोर्ड का गठन किया है। इसके अंतर्गत केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय को भी मान्यता दी गई है। यह बोर्ड सीबीएसई की तरह ही पूरे देश में संस्कृत शिक्षा के लिए एक समान ढांचा उपलब्ध कराएगा। प्रोफेसर झा ने कुछ गुरुकुलों में व्याप्त अव्यवस्थाओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश में कई पारंपरिक गुरुकुलों पर तथाकथित “एजुकेशन माफिया” का कब्जा हो गया है, जहां शिक्षा को व्यवसाय बना दिया गया है। ऐसे संस्थानों में छात्रों से भारी शुल्क वसूला जाता है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं दी जाती। चित्रकूट में प्रस्तावित इस गुरुकुलम् में प्रवेश के लिए छात्रों को प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। परीक्षा में सफल होने वाले छात्रों को भोजन, वस्त्र, आवास और शिक्षा सहित सभी आवश्यक सुविधाएं पूर्णतः निःशुल्क प्रदान की जाएंगी। इस पहल को संस्कृत और सनातन शिक्षा के संरक्षण एवं पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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