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    स्कूलों में छात्र बनेंगे सांसद-मंत्री और स्पीकर:यूपी के सभी माध्यमिक विद्यालयों में होगी युवा संसद प्रतियोगिता; 50-55 छात्र करेंगे संसद कार्यवाही का अभ्यास

    5 hours ago

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    माध्यमिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को अब संसद की कार्यवाही को करीब से समझने और उसका अभ्यास करने का मौका मिलेगा। जिले के सभी माध्यमिक विद्यालयों में युवा संसद प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसमें छात्र सांसद, मंत्री, विपक्षी सदस्य और सदन के अध्यक्ष की भूमिका निभाएंगे और उसी तरह संसदीय कार्यवाही का अभ्यास करेंगे। जिले में इस समय 32 सरकारी, 60 गैर-सरकारी सहायता प्राप्त और 277 निजी माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इन सभी स्कूलों में युवा संसद का आयोजन किया जाना है। संसदीय कार्य मंत्रालय के निर्देश के बाद शिक्षा विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। जिला स्तर पर जिला विद्यालय निरीक्षक कौस्तुभ सिंह को नोडल अधिकारी बनाया गया है। कक्षा 6 से 12 तक के छात्र होंगे शामिल स्कूलों को राष्ट्रीय युवा संसद योजना के पोर्टल पर किशोर सभा के तहत रजिस्ट्रेशन कराना होगा। प्रधानाचार्य की मंजूरी के बाद कक्षा छह से 12वीं तक के छात्रों का चयन किया जाएगा। प्रत्येक युवा संसद में करीब 50 से 55 छात्र हिस्सा लेंगे। छात्रों को उनकी भूमिका के अनुसार सवाल पूछने, जवाब देने, चर्चा करने, प्रस्ताव रखने और सदन की कार्यवाही संचालित करने का अभ्यास कराया जाएगा। बनेगी पूरी मंत्रिपरिषद, विपक्ष भी उठाएगा सवाल युवा संसद के दौरान छात्रों की पूरी मंत्रिपरिषद बनाई जाएगी। सदन के अध्यक्ष का चुनाव भी होगा। सत्ता पक्ष विपक्ष के सवालों का जवाब देगा, जबकि विपक्ष अलग-अलग मुद्दों को सदन में उठाएगा। छात्रों के ज्ञान और लोकतांत्रिक समझ को बढ़ाने वाले विषयों पर चर्चा कराई जाएगी। नेतृत्व और तर्क-वितर्क की क्षमता होगी विकसित प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य छात्रों को संसद के काम करने के तरीके, लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था और संसदीय प्रक्रियाओं से परिचित कराना है। इसके जरिए छात्रों में नेतृत्व क्षमता, तर्क-वितर्क, निर्णय लेने और प्रभावी ढंग से अपनी बात रखने की कला विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। प्रधानाचार्य होंगे स्कूल स्तर पर नोडल अधिकारी जिला विद्यालय निरीक्षक कौस्तुभ सिंह ने बताया कि जिले के सभी सरकारी, गैर-सरकारी सहायता प्राप्त और निजी माध्यमिक स्कूलों के प्रधानाचार्यों को युवा संसद प्रतियोगिता कराने के निर्देश दिए जाएंगे। प्रतियोगिता सरकारी आदेश और निर्धारित नियमों के अनुसार आयोजित होगी। स्कूल स्तर पर प्रधानाचार्य को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा।
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