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    सपा पार्षद को दिलानी होगी शपथ:BJP पार्षद का निर्वाचन कराया था कैंसिल, लखनऊ नगर निगम ने कोर्ट का आदेश नहीं माना

    13 hours ago

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    लखनऊ हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट से भी भाजपा पार्षद प्रदीप कुमार शुक्ला को तगड़ा झटका लगा है। हलफनामे में गलत जानकारी देने पर उनकी पार्षदी चली गई थी। कोर्ट ने कहा था- शपथ पत्र में जरूरी कागजात नहीं देना, तथ्य छिपाना धांधली करना है। इसलिए निर्वाचन रद्द किया जाता है। कोर्ट ने चुनाव में रनरअप रहे समाजवादी पार्टी के नेता ललित तिवारी को पार्षद घोषित किया था। 12 मई को हाईकोर्ट ने ललित तिवारी को एक सप्ताह में शपथ दिलाने का आदेश दिया था। इस पर प्रदीप कुमार शुक्ला की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसे कोर्ट ने रद्द किया है। यानी अब 12 मई के हाईकोर्ट के फैसले को मानना होगा। यानी ललित तिवारी को शपथ दिलाना पड़ेगा। मामला लखनऊ नगर निगम के वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज (तृतीय) का है। दरअसल, नगरीय निकाय चुनाव-2023 के दौरान भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला उर्फ टिंकू शुक्ला और समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी ललित तिवारी के बीच सीधा मुकाबला हुआ था। मतगणना में प्रदीप कुमार शुक्ला को 4,972 और ललित तिवारी को 3,298 वोट मिले थे। इस आधार पर प्रदीप कुमार शुक्ला को निर्वाचित घोषित कर दिया गया था। हारे सपा प्रत्याशी कोर्ट पहुंचे थे चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी ललित तिवारी ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसमें आरोप लगाया कि भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला ने नामांकन पत्र दाखिल करते समय निर्वाचन प्रपत्रों में कुछ जरूरी जानकारियां नहीं दी थीं। ये जानकारियां देना कानूनन जरूरी था। याचिका में यह भी कहा गया था कि नामांकन प्रक्रिया में की गई यह चूक चुनावी नियमों का उल्लंघन है। इसे कदाचार की श्रेणी में माना जाना चाहिए। इसी आधार पर प्रदीप कुमार शुक्ला के निर्वाचन को चुनौती दी गई थी। साथ ही चुनाव परिणाम निरस्त करने की मांग की गई थी। पांच महीने पहले रद्द हुआ था निर्वाचन नगर निगम पार्षदी को लेकर वार्ड-73 फैजुल्लागंज (तृतीय) में उठा विवाद 13 मई, 2023 को लखनऊ के अपर जिला जज की अदालत तक पहुंचा था। करीब ढाई साल तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने निर्वाचन के समय दाखिल एफिडेविट, शपथ पत्र और निर्वाचन फार्म की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाया था। कोर्ट ने उपलब्ध दस्तावेजों, तथ्यों और दलीलें देखीं। कोर्ट ने पाया कि नामांकन के दौरान आवश्यक जानकारी न देना गंभीर अनियमितता है। इससे चुनाव की वैधता प्रभावित होती है। इसी आधार पर कोर्ट ने प्रदीप कुमार शुक्ला का निर्वाचन रद्द कर दिया था। साथ ही ललित तिवारी को वार्ड-73 से निर्वाचित घोषित कर दिया था। अब पढ़िए आगे की कार्रवाई… मेयर-आयुक्त को पेश होना होगा लखनऊ हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार एक सप्ताह भीतर ललित किशोर को शपथ नहीं दिलाई जाती तो अगली सुनवाई पर हाईकोर्ट में लखनऊ की मेयर, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर जवाब देना होगा। पार्षद ललित किशोर ने बताया कि निर्वाचन न्यायाधिकरण ने उन्हें 19 दिसंबर 2025 को निर्वाचित घोषित किया था, लेकिन अब तक शपथ नहीं दिलाई गई है। इस बीच पूर्व निर्वाचित सदस्य अभी भी अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। आदेशों का पालन नहीं किया सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि जिला मजिस्ट्रेट ने 23 जनवरी और 10 फरवरी 2026 को नगर आयुक्त, लखनऊ को निर्वाचन न्यायाधिकरण के फैसले की जानकारी दी थी। उन्होंने धारा 85 के तहत शपथ दिलाने की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश भी दिए थे। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार ने भी 4 फरवरी 2026 को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए थे। इन तथ्यों को संज्ञान में लेते हुए न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 13 मई 2026 को निर्धारित की है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि तब तक याचिकाकर्ता को शपथ नहीं दिलाई गई, तो संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर देरी का कारण स्पष्ट करेंगे। …………………………………. संबंधित खबर भी पढ़िए… लखनऊ कोर्ट से भाजपा को झटका, सपा की जीत:झूठा हलफनामा देने पर प्रदीप शुक्ला की पार्षदी गई; सपा के ललित नए पार्षद बने लखनऊ कोर्ट ने भाजपा पार्षद को तगड़ा झटका दिया। हलफनामे में गलत जानकारी देने पर उनकी पार्षदी चली गई। कोर्ट ने कहा- शपथ पत्र में जरूरी कागजात नहीं देना, तथ्य छिपाना धांधली करना है। यहां पढ़ें पूरी खबर
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