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    संस्कार और योग्यता से ही शिखर पर टिकता है व्यक्ति:सनातन संस्कृति जागरण महोत्सव में सुधांशु महाराज और डॉ. अर्चिका दीदी ने श्रोताओं को दिए संस्कार और राष्ट्र गौरव का संदेश

    1 hour ago

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    साकेत स्थित आईटीआई मैदान में विश्व जागृति मिशन द्वारा आयोजित चार दिवसीय सनातन संस्कृति जागरण महोत्सव के दूसरे दिन संतों और विद्वानों ने धर्म, संस्कार और योग्यता का महत्व बताते हुए समाज को जागरूक किया। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान के स्मरण और श्रीराम नाम के संकीर्तन के साथ हुई। कार्यक्रम में सुधांशु महाराज, ध्यान गुरु डॉ. अर्चिका दीदी, हरिद्वार से पधारे जगद्गुरु सहित सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय, अश्विनी गुप्ता और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। अपने संबोधन में सुधांशु महाराज ने कहा कि जीवन में हर पल कोई न कोई शिखर पर बैठा होता है, लेकिन जब उससे अधिक योग्य व्यक्ति आता है तो वही स्थान उसे मिल जाता है। उन्होंने कहा कि शिखर तक पहुंचना आसान है, लेकिन वहां टिके रहना कठिन है और वही व्यक्ति टिक पाता है जो योग्य और संयमित होता है। उन्होंने मेरठ को क्रांतिकारियों की भूमि बताते हुए कहा कि यह शहर स्वतंत्रता और राष्ट्र गौरव की परंपरा को आगे बढ़ाने वाला रहा है। उन्होंने कहा कि भारत को उन्नत बनाने में महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। महाभारत में सत्यभामा और द्रौपदी के संवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिस घर में महिलाएं धर्म और संस्कारों को आगे बढ़ाती हैं, वह घर और समाज दोनों उन्नति करते हैं। सुधांशु महाराज ने काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के पुनर्निर्माण का प्रसंग भी सुनाया और बताया कि अहिल्याबाई होल्कर ने अपने निजी धन से मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था। उन्होंने कहा कि जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। वहीं ध्यान गुरु डॉ. अर्चिका दीदी ने विद्यार्थियों को जीवन के नैतिक मूल्यों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति अपने जीवन में सर्वश्रेष्ठ बनना चाहता है और यह उसका अधिकार भी है। इसलिए जीवन को भी मोबाइल की तरह समय-समय पर अपडेट करते रहना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा कि तकनीक का सदुपयोग करना चाहिए। साथ ही अभिभावकों और शिक्षकों से आह्वान किया कि वे बच्चों को देश के क्रांतिकारियों, महापुरुषों और अपने धर्म के बारे में अवश्य बताएं।
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