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    संतकबीरनगर में बदइंतजामी के बीच गोवंश:6 महीने से खराब पंखे, बारिश में टपकता टीनशेड; स्टोर रूम में मिला सड़ा भूसा

    2 hours ago

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    संतकबीरनगर के मेंहदावल नगर पंचायत की कान्हा गौशाला में अव्यवस्थाओं का मामला सामने आया है। बहबोलिया वार्ड स्थित गौशाला में 32 गोवंश रखे गए हैं। इनमें एक गोवंश बीमार बताया जा रहा है। वहीं चारे और गर्मी से बचाव के इंतजामों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। गौशाला के स्टोर रूम में सड़ा हुआ भूसा रखा मिला। हालांकि केयरटेकर का कहना है कि यह भूसा पशुओं को खिलाया नहीं जा रहा है। गौशाला में गर्मी से बचाव के लिए लगाए गए पंखे पिछले करीब 6 महीने से खराब बताए जा रहे हैं। केयरटेकर शुक्ला के अनुसार, पंखों की कुछ समय पहले मरम्मत कराई गई थी, लेकिन वे दोबारा खराब हो गए। उनका कहना है कि भीषण गर्मी के दौरान गोवंश को काफी परेशानी होती है। इसके अलावा बारिश के दौरान टीनशेड से पानी टपकने की समस्या भी है। केयरटेकर के मुताबिक, इस संबंध में ईओ पंकज कुमार को कई बार जानकारी दी गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं कराया गया। फिलहाल कुछ जगह तिरपाल लगाकर काम चलाया जा रहा है। स्टोर रूम में पड़ा मिला सड़ा भूसा गौशाला के स्टोर रूम में सड़ा हुआ भूसा भी रखा हुआ है। हालांकि केयरटेकर ने स्पष्ट किया कि इस भूसे को गोवंश को नहीं खिलाया जा रहा है। वहीं गौशाला में मौजूद पशुओं की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि पर्याप्त खुराक नहीं मिलने से कई गोवंश कमजोर नजर आ रहे हैं। एक गोवंश के बीमार होने की भी जानकारी दी गई है। 2016 में बनी थी कान्हा गौशाला मेंहदावल नगर पंचायत के बहबोलिया वार्ड में कान्हा गौशाला का निर्माण नवंबर 2016 में तत्कालीन चेयरमैन मोतीलाल जायसवाल के कार्यकाल में कराया गया था। इसका उद्देश्य बेसहारा और लावारिस गोवंश को आश्रय देना था। वर्तमान में यहां 32 गोवंश रखे गए हैं। सरकार की ओर से गौशालाओं में चारा, पानी और पशुओं के संरक्षण के लिए व्यवस्थाएं किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन यहां जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। 10-15 दिन में एक बार आते हैं ईओ केयरटेकर शुक्ला के मुताबिक, अधिशासी अधिकारी पंकज कुमार 10 से 15 दिन में एक बार गौशाला का निरीक्षण करने आते हैं। कई बार किसी वरिष्ठ अधिकारी के निरीक्षण के दौरान भी वह मौके पर पहुंचते हैं। केयरटेकर का कहना है कि पंखे और टीनशेड की समस्या के बारे में कई बार अधिकारियों को बताया गया है। इसके बावजूद अभी तक स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है। गौशाला की बदइंतजामी का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब जिले में प्रशासन की ओर से गौशालाओं के निरीक्षण और व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में स्थानीय जिम्मेदारों की निगरानी और व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं।
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