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    श्री कृष्ण जन्मस्थान पर भगवान ने राधारानी संग खेली होली:फूल-अबीर और रंग उड़ाए, परसादी लुटाई, भजनों पर थिरके भक्त

    2 hours ago

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    श्रीकृष्ण जन्मभूमि की प्रसिद्ध लठामार होली का बहुत ही धूमधाम, भव्यता के साथ में आयोजन रंगभरी एकादशी को हुआ। केशव वाटिका के लीलामंच पर फाग महोत्सव में गाये जाने वाले लोकगीत, भजन, रसिया, छन्द आदि के आयोजन से बड़ी संख्या में आये श्रद्धालु आनन्दित एवं उत्साहित होकर नृत्य कर उठे। फूलों से खेली होली ब्रज चौरासी कोस में होली के अवसर पर जिन परंपराओं का पालन किया जाता है उन सभी का दर्शन भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर करना स्वयं में ही एक अलौकिक अनुभूति है। प्रिया प्रियतम की प्रिय होली लीला में पुष्प होली रंगारंग लठामार होली का आकर्षण रहा। 10 मन फूलों की पंखुड़ियों को प्रिया-प्रियतम के स्वरूप गोपी-ग्वाल संग होली खेलते बरबस ही भगवान श्रीराधाकृष्ण के इस भाव को आनन्दित कर रहे थे। पुष्प होली के मध्य टेसू पुष्प के रंग की वर्षा एवं गुलाल से आसमान सतरंगा हो उठा एवं संपूर्ण जन्मभूमि का प्रांगण अलौकिक रूप में प्रकट हो रहा था। श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर परिसर में स्थित केशव वाटिका में लठामार होली,फूलों की होली के मध्य रसिया गायन एवं लठ और ढाल के साथ परस्पर होली खेलते रावल गांव एवं विभिन्न स्थानों से सहभागिता के लिए आये भक्त आनंद में सराबोर हो गए। हुरियारे-हुरियारिनों के द्वारा खेली जा रही अद्भुद भावमय लठामार होली साक्षात प्रतिया-प्रियतम की होली लीला को सजीव और साकार कर रहे थे। हुरियारे-हुरियारिनों को देखकर प्रिया-प्रियतम की प्रिय होली लीला सजीव एवं साकार हो उठी। इस अवसर विशिष्ट रूप से सुगन्धित द्रव्य, पुष्पार्क एवं वनस्पति रंग का छिड़काव, वातावरण को अनूठा बना रहा था। काशी विश्वनाथ से आया गुलाल भगवान को किया अर्पित शालिनी शर्मा, पूनम, जगदीश ब्रजवासी,उदय ब्रजवासी एवं राजू उपाध्याय के होली गायन के मध्य राजेश प्रसाद शर्मा गोवर्धन की मंडली द्वारा प्रस्तुत होली गीत भी भक्तों को अलौकिक आनन्द प्रदान कर रहे थे। इस वर्ष की होली में काशी विश्वनाथ धाम से प्राप्त प्रसादी-गुलाल को भगवान को अर्पित कर गुलाल-लीला में सम्मलित किया। मान्यताओं के अनुरूप जिस प्रकार द्वापर में भगवान शिव ने भगवान की प्रिय होली लीला के दर्शन किये और रंग में सरबोर भगवान शिव को देवताओं ने रंगेश्वर नाम से नमन किया ऐसे भगवान रंगेश्वर की प्रत्यक्ष अनुभूति श्रीकृष्ण की रंगारंग लठामार होली में हो रही थी।
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