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    श्रावस्ती में गर्भधारण-पूर्व पोषण सुधार परियोजना शुरू:डीएम की अध्यक्षता में 5 गांवों में पायलट प्रोजेक्ट का शुभारंभ

    3 hours ago

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    श्रावस्ती में गर्भधारण-पूर्व पोषण सुधार के लिए एक पायलट परियोजना 25 फरवरी दिन बुधवार से शुरू की गई है। जिलाधिकारी अश्विनी कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में इसका शुभारंभ हुआ। यह परियोजना यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से संचालित की जा रही है। यह पायलट परियोजना हरिहरपुर रानी ब्लॉक के पांच गांवों - जौगढ़, वर्गावर्गी, शिवगढ़ कला, अमवा और जरकुशहा में लागू की जाएगी। इन पांच में से चार ग्राम पंचायतों में महिला ग्राम प्रधान हैं, जो इस पहल के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उनके साथ आशा, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्य सखी और सीएचओ मिलकर जमीनी स्तर पर काम करेंगी। परियोजना का मुख्य लक्ष्य 30 वर्ष तक के नवविवाहित दंपति, पहली बार गर्भधारण की योजना बना रहे दंपति और एक संतान वाली माताएं हैं। चयनित गांवों में लाभार्थियों की सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद नियमित स्वास्थ्य जांच, पोषण परामर्श, सास-बहू सामुदायिक बैठकें और पुरुष सहभागिता सत्र आयोजित किए जाएंगे। जिलाधिकारी अश्विनी कुमार पाण्डेय ने बताया कि यह एक नवाचार आधारित परियोजना है, जिसमें स्वयं सहायता समूह की स्वास्थ्य सखी और ग्राम प्रधानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने जोर दिया कि सामुदायिक सहभागिता और स्थानीय नेतृत्व के माध्यम से इस पहल को एक मॉडल परियोजना के रूप में विकसित किया जा सकता है। मुख्य विकास अधिकारी शाहिद अहमद ने कहा कि परियोजना की सफलता के लिए सभी संबंधित विभागों की सक्रिय भूमिका आवश्यक है। स्वास्थ्य, पंचायती राज, महिला एवं बाल विकास और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन सहित सभी विभागों को समन्वित प्रयास करने होंगे। यूनिसेफ की न्यूट्रिशन ऑफिसर अर्पिता पाल ने प्रशिक्षण सत्र का संचालन किया। उन्होंने गर्भधारण-पूर्व पोषण, एनीमिया नियंत्रण, आयरन-फोलिक एसिड और कैल्शियम सेवन, बीएमआई आधारित पोषण प्रबंधन, उच्च रक्तचाप की स्थिति में आहार परामर्श और व्यवहार परिवर्तन संचार रणनीतियों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और प्रभावी बताया। सभी विभागों ने सामूहिक रूप से इस पायलट परियोजना को सफल बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहा, तो इसे अन्य विकासखंडों में भी विस्तारित किया जा सकता है।
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