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    टेंडर घोटाले में कानपुर नगर निगम के दो जेई सस्पेंड:फर्म रजिस्ट्रेशन में लापरवाही और विकास कार्यों की निगरानी नहीं करने का आरोप

    2 hours ago

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    कानपुर नगर निगम के टेंडर घोटाले के मामले में शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। नगर निकाय निदेशालय के निदेशक अनुज कुमार झा ने नगर निगम में तैनात दो अवर अभियंताओं (जेई) को निलंबित कर दिया है। दोनों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के भी आदेश दिए गए हैं। अवर अभियंता (सिविल) आकाशदीप और बालेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ कार्रवाई की गई है। दोनों पर फर्मों के रजिस्ट्रेशन में लापरवाही बरतने और विकास कार्यों की उचित निगरानी नहीं करने के आरोप लगे थे। विभागीय जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने दोनों के निलंबन की संस्तुति शासन से की थी। गोपनीय जांच में सामने आई थीं अनियमितताएं नगर आयुक्त ने नगर निगम में फर्म रजिस्ट्रेशन और टेंडर प्रक्रिया में सामने आई गड़बड़ी की गोपनीय जांच कराई थी। जांच के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद कुछ मामलों में संबंधित फर्मों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के साथ उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई भी की गई। आकाशदीप पर प्लांट परीक्षण में लापरवाही का आरोप शासन के आदेश के मुताबिक, आकाशदीप को नगर निगम के जोन-4 में प्लांट परीक्षण का दायित्व सौंपा गया था। आरोप है कि उन्होंने अपने दायित्व का पूरी तरह से निर्वहन नहीं किया। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। बालेंद्र पर लगे यह आरोप वहीं, बालेंद्र प्रताप सिंह पर जोन-6 के वार्ड 17 के खेड़ा गांव में आंतरिक गलियों की मरम्मत से जुड़े कार्य की निगरानी में लापरवाही बरतने का आरोप है। शासन के आदेश में कहा गया है कि उन्होंने निर्धारित जिम्मेदारी के मुताबिक कार्य की निगरानी नहीं की। उप निदेशक करेंगे विभागीय जांच दोनों निलंबित जेई के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू होगी। इसके लिए नगर निकाय निदेशालय के उप निदेशक को जांच अधिकारी नामित किया गया है। जांच के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी। मंडलायुक्त ने 2 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट मंडलायुक्त के. विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि नगर निगम टेंडर घोटाले की जांच मुख्य विकास अधिकारी के नेतृत्व में गठित टीम कर रही है। निर्धारित समय में रिपोर्ट नहीं आने पर टीम को दो दिन के अंदर जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद उसे शासन को भेजा जाएगा। इसके बाद भ्रष्टाचार के आरोपियों और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शासन स्तर से की जाएगी।
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