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    ‘दिक्कत है तो पाकिस्तान-बांग्लादेश चले जाइए...पैसे भी हमसे ले जाना’:मस्जिद टूटी तो बोले महामंडलेश्वर-योगी सरकार में नहीं चलेगी दादागिरी, कानून मानना पड़ेगा

    36 minutes ago

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    सहारनपुर की कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद हटाए जाने को लेकर विवाद के बीच उत्तराखंड से सहारनपुर पहुंचे महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानन्द गिरि ने गुरुवार को SSP कार्यालय पहुंचकर पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने SSP से मुलाकात कर कलेक्ट्रेट परिसर में हुई कार्रवाई के लिए बधाई दी। इस दौरान उन्होंने विवादित बयान देते हुए कहा कि “मस्जिद टूटने से दिक्कत है तो पाकिस्तान-बांग्लादेश चले जाइए, पैसे हमसे ले जाइए।” उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार है और यहां किसी की दादागिरी नहीं चलेगी। सभी को कानून का पालन करना पड़ेगा। स्वामी प्रबोधानन्द गिरि ने कहा कि कलेक्ट्रेट शासन और प्रशासन का केंद्र होता है। ऐसे स्थान पर धार्मिक गतिविधियों का कोई औचित्य नहीं है। कलेक्ट्रेट परिसर का इस्तेमाल प्रशासनिक कामकाज के लिए ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस-प्रशासन ने कलेक्ट्रेट को सुरक्षित करने की दिशा में सराहनीय काम किया है और इसके लिए SSP बधाई के पात्र हैं। ‘कप्तान ने कलेक्ट्रेट को सुरक्षित किया’ महामंडलेश्वर ने कहा कि कलेक्ट्रेट में लंबे समय से अवैध गतिविधियां चलने का आरोप था। प्रशासन की कार्रवाई के बाद परिसर को सुरक्षित किया गया है। उन्होंने पुलिस की भूमिका की तारीफ करते हुए कहा कि कार्रवाई किसी अधिकारी के निजी निर्णय से नहीं हुई, बल्कि मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद हुई है। पुलिस ने अपने स्तर से कोई फैसला नहीं लिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी पक्ष को कार्रवाई पर आपत्ति है तो उसके लिए अदालत का रास्ता खुला है। संबंधित पक्ष हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जा सकता है, लेकिन किसी को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में न्यायिक प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। वक्फ की जमीन के दावे पर उठाए सवाल मस्जिद की जमीन को वक्फ की जमीन बताए जाने के दावे पर भी स्वामी प्रबोधानन्द गिरि ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि जमीन वक्फ की थी तो संबंधित पक्ष को अदालत में इसके दस्तावेज प्रस्तुत करने चाहिए थे। मामला सिटी मजिस्ट्रेट से लेकर जिला अदालत तक पहुंचा और अदालत के आदेश के बाद कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि किसी भी जमीन पर अपना अधिकार बताने के लिए दस्तावेज और कानूनी प्रक्रिया जरूरी है। केवल दावा करने से किसी जमीन पर अधिकार साबित नहीं होता। मलबे में मिले कुएं को धार्मिक परंपरा से जोड़ा कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद हटाए जाने के बाद मलबे के नीचे मिली कुएं जैसी संरचना को लेकर भी महामंडलेश्वर ने बयान दिया। उन्होंने कहा कि कुएं का हिंदू समाज में धार्मिक महत्व माना जाता है। उनका दावा है कि कुएं के ऊपर मस्जिद का निर्माण किया गया था और इसकी पूरी जांच होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुएं की वास्तविक स्थिति को लेकर जांच अभी जारी है। उनके मुताबिक, SSP ने उन्हें बताया है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। इसलिए इस संबंध में अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। 1906-1909 लिखी ईंटों पर भी सवाल मलबे से सामने आई पुरानी ईंटों पर लिखे साल को लेकर भी स्वामी प्रबोधानन्द गिरि ने सवाल उठाए। उन्होंने 1906 और 1909 जैसी तारीखों वाली ईंटों का जिक्र करते हुए कहा कि ये संभवतः ईंट-भट्ठे के ट्रेडमार्क से संबंधित हो सकती है। केवल ईंट पर साल लिखा होने के आधार पर किसी निर्माण की उम्र तय नहीं की जा सकती। इसकी तकनीकी और ऐतिहासिक जांच जरूरी है। इस मामले में जो भी दावे किए जा रहे हैं, उनकी जांच होनी चाहिए और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए। ‘योगी सरकार में नहीं चलेगी दादागिरी’ स्वामी प्रबोधानन्द गिरि ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कानून-व्यवस्था की नीति की तारीफ करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून के अनुसार ही काम होगा। किसी भी व्यक्ति या पक्ष को यह अधिकार नहीं है कि वह प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध करते हुए कानून अपने हाथ में ले। उन्होंने कहा कि “योगी सरकार में दादागिरी नहीं चलेगी, कानून मानना पड़ेगा।” साथ ही उन्होंने कार्रवाई पर आपत्ति जताने वाले लोगों को न्यायिक रास्ता अपनाने की सलाह दी। उनका कहना था कि अगर किसी को प्रशासन के फैसले से असहमति है, तो वह हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रख सकता है। SSP कार्यालय पहुंचकर दी बधाई सहारनपुर पहुंचने के बाद महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानन्द गिरि SSP कार्यालय गए। यहां उन्होंने SSP से मुलाकात की और कलेक्ट्रेट परिसर में हुई कार्रवाई को लेकर उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि कलेक्ट्रेट प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है और उसकी सुरक्षा जरूरी है। उन्होंने पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई को बड़ा कदम बताते हुए कहा कि कार्रवाई अदालत और प्रशासनिक आदेशों के तहत हुई है। इसलिए इसे लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं फैलाया जाना चाहिए। आगे की स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।
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