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    थप्पड़ मारने वाले मेरठ SSP बोले-बाहरी लोगों ने माहौल बिगाड़ा:4 घंटे समझाने पर भी नहीं माने, तब लाठीचार्ज करना पड़ा

    16 hours ago

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    '"हमने प्रदर्शनकारियों को करीब 4 घंटे तक समझाया। बार-बार कहा कि पीड़ित परिवार अपनी बात अधिकारियों के सामने रखे। लेकिन, कुछ बाहरी लोग माहौल बिगाड़ने, सड़क जाम करने और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने पर अड़े रहे। जब सभी प्रयास फेल हो गए तो बल प्रयोग करना पड़ा। कई बाहरी प्रदर्शनकारियों पर आपराधिक केस है, सबकी क्राइम हिस्ट्री खंगाल रहे हैं।' यह बात मेरठ के SSP अविनाश पांडेय ने बुधवार को हुए बवाल पर दैनिक भास्कर से कहीं। उन्होंने कहा कि पुलिस अब भी पीड़ित परिवार के साथ है। लेकिन, कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की किसी को इजाजत नहीं दी जाएगी। दरअसल, दलित छात्रा ललिता गौतम की लाश 17 मई को गन्ने के खेत में मिली थी। इसके बाद परिवार के लोग और कुछ संगठन के लोगों ने चक्काजाम कर दिया था। हत्या में गिरफ्तार 2 आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की। SSP बोले- एसपी ट्रैफिक ने 1 घंटे तक लोगों को समझाया SSP अविनाश पांडेय ने कहा- जांच में पता चला कि बवाल में दूसरे जिलों के युवक आए थे। ऐसे युवक थे, जिन पर उनके जिलों में मुकदमे हैं। इनके आपराधिक इतिहास हैं। इसके बाद भी सीनियर ऑफिसर्स इन लोगों को समझाते रहे। खुद एसपी ट्रैफिक ने पूरे एक घंटे तक इन लोगों को बैठकर समझाया कि माहौल खराब न करें। यह गलत तरीका है। एसपी ग्रामीण अभिजीत भी लगातार बात करके समझा रहे थे। चार घंटे से ज्यादा बीतने पर भी लोग नहीं माने। माहौल खराब करते हुए नारेबाजी करने लगे। सरकारी काम और आम जनता के आने-जाने का रास्ता रोकने लगे। तब पुलिस को कम से कम बल प्रयोग कर ऐसे लोगों को वहां से हटाना पड़ा। इसी वजह से मैंने भी एक्शन लिया। अभी भी पीड़ित परिवार की हर मांग को हम सुनने के लिए तैयार हैं। लेकिन, बाहरी लोगों और माहौल खराब करने वालों को कानून व्यवस्था बिगाड़ने नहीं देंगे। 53 दिन बाद न्याय की मांग, फिर कैसे प्रदर्शन बवाल में बदला जिला मुख्यालय से करीब 35 किमी दूर टीपीनगर थाना क्षेत्र के थिरौट गांव है। यहां रहने वाली BA तीसरे साल की की छात्रा ललिता गौतम 15 मई को परीक्षा देने घर से निकली थी। इसके बाद वह नहीं लौटीं। घरवालों ने उसी दिन गुमशुदगी दर्ज करा दी। 17 मई को रोहटा थाना क्षेत्र के उकसिया गांव के गन्ने के खेत में ललिता का शव मिला। घरवालों ने गैंगरेप के बाद हत्या का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। पुलिस ने घरवालों की शिकायत पर 3 युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। जांच के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी अंकुश के अलावा एक अन्य को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में अंकुश ने बताया था कि 3 साल से उसकी ललिता से दोस्ती थी। उसे ललिता के किसी दूसरे युवक से बात करने का शक था। इसको लेकर दोनों के बीच झगड़ा हुआ था। इसी रंजिश में अंकुश ने अपने साथियों के साथ मिलकर ललिता की हत्या कर दी थी। दोनों आरोपियों को फांसी की सजा देने, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और पीड़ित परिवार को सहायता देने की मांग को लेकर 8 जुलाई (बुधवार) को दलित महापंचायत बुलाई गई थी। प्रशासन ने कमिश्नरी पार्क में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की इजाजत दी थी। लेकिन, प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट गेट के बाहर पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठ गए। पुलिस का कहना है कि इसी दौरान नोएडा, गाजियाबाद, अमरोहा, मुरादाबाद समेत कई जिलों से आए लोग भी प्रदर्शन में शामिल हो गए। सड़क पर लेटकर जाम लगाया, घंटों जाम रहा ट्रैफिक प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट के बाहर मुख्य सड़क जाम कर दी गई। प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और कुछ लोग तो सड़क पर लेट गए। इससे एंबुलेंस, स्कूली वाहन, महिलाओं, बच्चों और आम लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। पुलिस ने प्रदर्शन के मामले में 13 नामजद और 25 से 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने बिना इजाजत जमावड़ा किया। सड़क जाम की, सरकारी काम में बाधा डाली, पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की की और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास किया। अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें- अंकित कुमार, अरविंद कुमार, रवि कुमार उर्फ गौतम, ऋतिक, नवनीत कुमार, हिमांशु सिद्धार्थ और लवि उर्फ शुभम शामिल हैं। अन्य की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। मानवाधिकार आयोग, अनुसूचित जाति आयोग तक शिकायत SSP के एक्शन को लेकर एडवोकेट मनोज कुमार ने आयोग से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर अनावश्यक बल प्रयोग किया गया। हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों से मारपीट हुई। वायरल वीडियो को शिकायत के साथ संलग्न कर निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने भी इस पूरे घटनाक्रम को मानवाधिकार उल्लंघन बताते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत भेजी है। उन्होंने हिरासत में हुई कथित मारपीट, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। पूर्व IPS डॉ. बीपी अशोक ने कहा- अवैध भीड़ को हटाने की एक प्रक्रिया है। उसमें कभी अवैध बल प्रयोग की आवश्यकता नहीं होती। उचित बल प्रयोग करके भी भीड़ को हटाया जा सकता है। SSP मेरठ को दोबारा ट्रेनिंग लेने की जरूरत है। आज छात्रा के गांव पहुंचेंगे चंद्रशेखर और कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल मेरठ के इस बवाल में राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। शुक्रवार को नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद पीड़ित परिवार से मिलने थिरौट गांव पहुंचेंगे। इससे पहले चंद्रशेखर आजाद ने वीडियो साझा कर पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि उनके समर्थकों पर हाथ उठाया गया। इसका जवाब जनता लोकतांत्रिक तरीके से वोट के जरिए देगी। वहीं, कांग्रेस ने भी 32 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बनाया है। ये 32 नेता परिवार से मुलाकात कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे। पिछली घटनाओं का संज्ञान लेते हुए पुलिस बाहरी नेताओं, लोगों को जिले की सीमाओं के बाहर टोल प्लाजा के आसपास ही रोकने की तैयारी में है। सहारनपुर की ओर से चंद्रशेखर मेरठ में आएंगे। पुलिस उन्हें सिवाया टोल पर ही रोक सकती है। वहीं, कांग्रेस नेताओं को भी पुलिस बाहर ही रोकने की तैयारी में है। सभी थानों को अलर्ट किया गया है। गांव की बैरिकेडिंग, बाहरी लोगों की एंट्री पर रोक थिरौट गांव में पुलिस ने 9 जुलाई को ही बैरिकेटिंग कर दी। बाहरी लोगों की एंट्री रोक दी गई। केवल स्थानीय ग्रामीणों को ही आने-जाने की अनुमति दी जा रही। करीब 35 पुलिसवालों की ड्यूटी लगी है। पुलिस का कहना है कि यह कदम शांति व्यवस्था बनाए रखने और पीड़ित परिवार की सुरक्षा को देखते हुए उठाया गया है। पुलिस इस मामले से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और ऑडियो की भी निगरानी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रामक सूचना फैलाकर माहौल बिगाड़ने या हिंसा भड़काने की कोशिश करने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। -------------------------- ये खबर भी पढ़िए- बेटी का कन्यादान करने के बाद पिता का सुसाइड: रायबरेली में बेटा बोला- शादी से कर्ज हुआ, 2 बहनें और हैं, परेशान होकर जान दी रायबरेली में बेटी का कन्यादान करने के महज 8 घंटे बाद पिता ने फंदे से लटककर जान दे दी। बुधवार सुबह 11 बजे पिता बेटी की विदाई से पहले घर से निकल गए। जब विदाई की रस्म शुरू हुई, तो बेटी ने पिता को बुलाने को कहा। घरवालों ने तलाश शुरू की, लेकिन उनका पता नहीं चला। इसके बाद पिता से मिले बिना ही बेटी विदा हो गई। पढ़ें पूरी खबर…
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