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    धर्मांतरण मामले में फिर मिली तारीख:24 अगस्त को अगली सुनवाई, पुलिस को कोलकाता में मिली थी लापता बहनें

    3 hours ago

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    धर्मांतरण के चर्चित मामले में बुधवार को एडीजे-14 ज्योत्सना सिंह की अदालत में वादी से आरोपियों के वकीलों ने फिर सवाल-जवाब किए। सवाल-जवाब पूरे नहीं हो सके। इस पर अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 24 अगस्त की तारीख तय की है। सुनवाई के दौरान वादी के वकील जगदीश कुमार और सरकारी वकील एसपी भारद्वाज भी मौजूद रहे। 14 आरोपियों पर पहले ही आरोप तय थाना सदर में दर्ज इस मामले में अदालत ने 22 जून को 14 आरोपियों पर आरोप तय किए थे। इन सभी पर बीएनएस और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की अलग-अलग धाराओं में मुकदमा चल रहा है। आरोप तय होने के बाद अदालत में वादी की गवाही हुई थी। इसके बाद आरोपियों के वकीलों को वादी से सवाल-जवाब करने के लिए 19 अगस्त की तारीख दी गई थी। बुधवार को फिर जिरह हुई, लेकिन यह पूरी नहीं हो सकी। अब 24 अगस्त को वादी से दोबारा सवाल-जवाब किए जाएंगे। कोलकाता से सकुशल मिली थीं वादी की बेटियां इस मामले में सदर पुलिस ने वादी की बेटियों को कोलकाता के तपसिया इलाके से सकुशल बरामद किया था। पुलिस ने जांच के बाद कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इनमें एसवी कृष्णा उर्फ आयशा, रीथ बनिक उर्फ मोहम्मद, इब्राहिम, शमा खान, जुनैद कुरैशी, अबू तालिब, मोहम्मद रहमान कुरैशी, अब्दुल रहमान, मोहम्मद अली उर्फ पीयूष पंवार, मनोज कनोजिया उर्फ मुस्तफा, अब्दुल रहमान उर्फ महेंद्र पाल सिंह, अब्दुल रहीम और अब्दुल्ला समेत अन्य आरोपी शामिल हैं। क्या था मामला, शिकायत के बाद ऐसे खुला राज? पुलिस के अनुसार, मार्च 2025 में सदर क्षेत्र की दो सगी बहनें अचानक लापता हो गई थीं। परिजनों ने पुलिस में शिकायत देकर दोनों की तलाश की मांग की। पुलिस ने साइबर सेल की मदद से जांच शुरू की और तलाश के दौरान दोनों बहनों को कोलकाता के तपसिया इलाके से बरामद किया। इसके बाद पूछताछ और जांच में पुलिस ने धर्मांतरण से जुड़े नेटवर्क की जानकारी सामने आने का दावा किया। पुलिस ने मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया और जांच आगे बढ़ाई। इसी मामले में बाद में 14 आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप तय किए गए। दोनों बहनों ने हाईकोर्ट में दाखिल की थी याचिका इसी मामले से जुड़ी दोनों बहनों की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट ने दोनों को अदालत में पेश करने का आदेश दिया था। बाद में दोनों बहनों ने अदालत के सामने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन किया है और अपनी पसंद से जीवन जीना चाहती हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि बालिग व्यक्ति को बिना दबाव के अपने धर्म, विवाह और रहने को लेकर फैसला लेने का अधिकार है। हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उसका फैसला आगरा में चल रहे आपराधिक मामले में आरोपों की सच्चाई या धर्म परिवर्तन की वैधता पर फैसला नहीं है।
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