Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    यूपी बोर्ड एग्जाम में 10 हजार में स्टूडेंट बदलिए:टीचर से ऑन-कैमरा डील, बोला- घर में बैठाकर पेपर दिलाते हैं

    6 hours ago

    1

    0

    10 हजार रुपए दे देना। जो बच्चा आएगा… उसका आधार कार्ड लाएंगे… और जिसकी जगह पर आएगा… उसका प्रवेश-पत्र लाएंगे। आप मुझे दे जाएंगे… मैं उसका दूसरा आधार कार्ड बनवा कर दूंगा आपको। उसी के नाम का… फिर उसे एंट्री देंगे हम और वो एग्जाम दे देगा। ये टीचर यूपी बोर्ड एग्जाम में नकल कराकर पास कराने की गारंटी ले रहे हैं। ये 10 हजार रुपए में ओरिजिनल स्टूडेंट की जगह मुन्नाभाई स्टूडेंट यानी नकली छात्र को परीक्षा दिलाने के लिए उसका फर्जी आधार कार्ड तक खुद बनवाने को तैयार है। 18 फरवरी से यूपी में 10वीं और 12वीं के बोर्ड एग्जाम शुरू हुए हैं। इस बार दावा किया जा रहा कि एग्जाम में नकल माफिया बेअसर हैं। बिना नकल के परीक्षाएं कराई जा रहीं हैं। दैनिक भास्कर ने बोर्ड के इसी दावे का इन्वेस्टिगेशन किया। इसमें परीक्षा में बरती जा रही कड़ाई की पोल खुल गई। पढ़िए, पूरा खुलासा… हम लखनऊ से 350 किलोमीटर दूर आगरा पहुंचे। हमें आगरा के चंबल क्षेत्र से सटे एरिया फतेहबाद के शमशाबाद कस्बे के सरकारी स्कूल के बारे इनपुट मिला कि यहां पेपर देने के लिए छात्र बदल रहे हैं। हम यहां पहुंचे, 3 दिन नजर रखने के बाद टीचर योगेश कुमार सामने आया। हमने बातचीत की तो उसने पहले दिन मना कर दिया कि इस स्कूल में नकल नहीं हो रही। इसके बाद हम इसी एरिया यानी शमशाबाद के श्री नत्थीलाल इंटर कॉलेज पहुंचे। इसका सेंटर उसी सरकारी स्कूल में गया, जहां हमें छात्र बदलने का इनपुट मिला था। यहां हमें सोर्स मिला, जो हमारी बात कराने को तैयार हुआ। इसके बाद हमने एक स्टूडेंट का एडमिट कार्ड जुगाड़ा, जिससे अच्छे से डील हो सके। एडमिट कार्ड देखने के बाद सोर्स हमें स्कूल तक ले जाने के लिए तैयार हो गया। इसके बाद हम एसएमडी इंटर कॉलेज पहुंचे। जब टीचर योगेश ने हमें सोर्स के साथ देखा तो वह डील के लिए तैयार हो गया। योगेश बोर्ड एग्जाम में ड्यूटी कर रहा है। हमने खुद को स्टूडेंट का रिश्तेदार बताया। योगेश ने 10 हजार रुपए की डिमांड की। हमने 1500 रुपए एडवांस दिए। टीचर योगेश: अब आप बताओ… क्या कहना चाह रहे हो? रिपोर्टर: कल आए थे, आपके पास…। टीचर योगेश: हां, आए थे बताओ? रिपोर्टर: इसका भाई है। वो आपके यहां दे रहा है एग्जाम। वो क्या है… उसके दो पेपर खराब हो गए हैं। अब आपकी तरफ से क्या मदद हो सकती है? टीचर योगेश: मेरी तरफ से क्या मदद हो सकती है? ये तो आप बाजार से क्या खरीदने आए हैं, हमें क्या मालूम…? आप दुकान पर जाकर कहोगे कौन से कपड़े दोगे? वो कहेगा आप बताओ… क्या चाहते हो। पहले आपको कहना पड़ेगा। रिपोर्टर: मैं चाहता हूं कि एक बच्चा है… वो लड़का इनका रिश्तेदार है। ये बेचारे गरीब आदमी हैं, जैसे-तैसे गुजारा कर रहे। टीचर योगेश: हां, तो आपकी गाड़ी चला रहा है… आप इसकी मदद करेंगे…? रिपोर्टर: जी… मैं इसकी मदद करूंगा। टीचर योगेश: एक-दूसरे का यही तो होता है। रिपोर्टर: बिल्कुल, मानवता यही तो होती है। अब एक बच्चा दूसरा आएगा। वो एग्जाम इसकी जगह दे देगा। लास्ट वाले दो पेपर बचे हैं। टीचर योगेश: अभी तो 3 पेपर बचे हैं। दो ही तो हुए हैं अभी। रिपोर्टर: अब कैसे हो पाएगा? टीचर योगेश: अब उसका एडमिट कार्ड लाओ… जो है, जो पहले दे चुका है। रिपोर्टर: ये है उसका एडमिट कार्ड… 24 नंबर कमरे में है। टीचर योगेश: ठीक है… बिठवा दूंगा। रिपोर्टर: चार्ज क्या लगेगा…? टीचर योगेश: आप हमें कितने रुपए देना चाहते हो? क्या देना चाहते हो? रिपोर्टर: अब मैं ही दूंगा, ये क्या देगा? टीचर योगेश: दे देना, 10 हजार रुपए दे देना...। रिपोर्टर: 10 हजार रुपए… तीन पेपर के। कोई समस्या तो नहीं होगी? टीचर योगेश: नहीं…। रिपोर्टर: अभी कुछ देकर जाऊं या लड़के के हाथों भिजवा दूं…? टीचर योगेश: अभी भिजवाओगे… अभी दे दो। लड़के आएं तो मुझे रोल नंबर नोट करा दो। या मेरी उससे मुलाकात करा दो। जो आएगा उससे। रिपोर्टर: हां तो मैं ले आता हूं… (साथी से) कुछ पैसे दे दो सर को। रिपोर्टर का साथी: ऑनलाइन हैं, कैश तो हजार पंद्रह सौ हैं, कितने दे दूं? टीचर योगेश: अरे जितने पास हैं… कैश दे दे। ऑनलाइन दे दे… कैसे भी दे दे… ला…। रिपोर्टर: (पैसे देते हुए) सर… देख लेना… कोई दिक्कत नहीं हो। अब हम समझना चाहते थे कि एग्जाम में ओरिजिनल स्टूडेंट की जगह दूसरा स्टूडेंट आकर परीक्षा कैसे दे सकता है। क्योंकि प्रवेश-पत्र पर बच्चे का फोटो होता है और मौके पर उसका आधार कार्ड भी देखा जाता है। टीचर योगेश ने इसका भी तोड़ बताया। मैं दूसरा आधार कार्ड बनवा कर दूंगा टीचर योगेश: अरे… पहले आप उस लड़के को बुलाओ। और जो पेपर देगा, उसका आधार कार्ड लाओ। रिपोर्टर: अपना नंबर दे दो? टीचर योगेश: (नंबर देते हुए) अभी आ जाना। घंटे दो घंटे में… पैसे लेकर। रिपोर्टर: ठीक है सर। ऐसा है मैं इसको पैसे लेकर भिजवा दूंगा… 10 हजार रुपए। दूसरा लड़का बिठलवा देना… इसकी जगह पर। टीचर योगेश: ठीक है, उस लड़के को आज ही लाओगे। रिपोर्टर: वो तो मैं ले आऊंगा सर, मेरी बात…। टीचर योगेश: अरे मैं क्या कह रहा हूं, मेरी सुनिए। अब आप मेरी सुन लो… बाकी चीजें तो मैंने सुन ही लीं। रिपोर्टर: हम तो सर नए आदमी हैं, हमें डर है कि… टीचर योगेश: मैंने सब समझ लिया… मैं जो कह रहा हूं… मैंने सब समझ लिया। उसका कोई डर नहीं है। मैं बता तो रहा हूं आपको… उसका करना क्या है? जो बच्चा आएगा… उसका आधार कार्ड लाएंगे। और जो जिसकी जगह पर आएगा, उसका प्रवेश पत्र लाएंगे। आप मुझे दे जाएंगे। मैं उसका दूसरा आधार कार्ड बनवा कर दूंगा। उसी के नाम का… फिर उसे एंट्री देंगे हम। रिपोर्टर: मैं घंटेभर में आ रहा हूं, आपके पास। टीचर योगेश: और उस लड़के को लेकर आओगे… जो एग्जाम देगा, मेरे पास। मैं उसको रूम वगैरह बता दूंगा… कहां है? क्योंकि 2 पेपर में कोई और आया है… तो उसको रूम वगैरह का क्या पता? फिर तीसरे में आ कर रूम ढूंढेगा, तो उसमें पड़ेंगे नहीं कि 2 पेपर में तू कहां रहा? रिपोर्टर: बिल्कुल, बस आप नजर बनाए रखना। टीचर योगेश: पूरी…। अब चलिए, गोरखपुर… यहां बाबू के घर में नकल की डील गोरखपुर के खजनी इलाके का सरकारी नारायण इंटर कॉलेज शुरू से ही नकल को लेकर बदनाम है। यहां का कर्मचारी दिलीप पांडेय है। पूरा कॉलेज इनके ही इशारों पर चलता है। वो चाहे प्रिंसिपल हों या फिर कॉलेज प्रबंधक, सभी के नाम पर दिलीप डील करते हैं। हमें सोर्स के जरिए दिलीप पांडेय सहित इस कॉलेज के कुछ टीचर्स के बारे में जानकरी मिली। हमने पहले उनसे फोन पर संपर्क किया। इसके बाद समय लेकर हम उनसे मिलने रामपुर पांडेय स्थित उनके घर पहुंचे। जहां पर उनके ही नारायण इंटर कॉलेज के कुछ टीचर्स पहले से बैठे थे। दिलीप ने परीक्षा में कड़ाई होने की वजह से खुलकर नकल कराने की बात तो नहीं की। लेकिन, इतना जरूर कहा कि बच्चे की परीक्षा में पूरी मदद करा दी जाएगी। साथ ही दावा किया कि अगर इसके बाद भी बच्चा पास नहीं होता, तो अगले साल ऐसी जगह से उसका फॉर्म भरवा देंगे, जहां बिना एग्जाम दिए ही गारंटी के साथ पास हो जाएगा। रिपोर्टर: सर, कैसे होगी बच्चे की मदद? दिलीप पांडेय: क्या बताएं, एक समय था… यहीं मेरे घर पर कॉपियां आकर लिखाती थी। लेकिन, अब समय बहुत बदल गया है। एग्जाम सेंटर पर CCTV लगे हैं, प्लस वाइस रिकॉडिंग है। सब कुछ अफसरों तक कनेक्ट है। क्या बताएं? रिपोर्टर: फिर कैसे होगा सर? प्रिंसिपल या प्रबंधक से ही कुछ बात बन जाए अगर? दिलीप पांडेय: प्रिंसिपल और प्रबंधक तो फोन पर बात भी नहीं कर रहे हैं। सभी का मोबाइल फोन सर्विलांस पर लगा है। अब स्कूल जाएंगे तो बात कर लेंगे। रिपोर्टर: अरे सर, आप चाहेंगे तो इसी बार हो जाएगा। बच्चे की नौकरी की बात है, इसलिए परेशान हैं हम लोग। दिलीप पांडेय: चाहने वाली बात नहीं है, पूरी कोशिश करेंगे हम। वाइस रिकॉर्डर नहीं होता तो अभी प्रिंसिपल साहब से बात कर लेते। लेकिन आप परेशान मत होइए, मदद पूरी हो जाएगी। रिपोर्टर: सर, आप चाहेंगे तो सब हो जाएगा। दिलीप पांडेय: यही तो बात है। मेरा मामला इतना ज्यादा हाईलाइट हो गया है कि इस बार मेरी परीक्षा में ड्यूटी ही नहीं लगी है। मेरी ड्यूटी होती तो सब कुछ हो जाता… लेकिन ​आप परेशान मत होइए… जिसकी भी क्लास में ड्यूटी रहेगी… उसको बच्चे से मिलवा दिया जाएगा कि बच्चे की जो भी मदद हो करा दीजिए। रिपोर्टर: क्या बताएं सर, बच्चा एकदम बेवकूफ है। इसलिए हम लोग आपके पास आए हैं…। दिलीप पांडेय: आपका नंबर है मेरे पास… हम प्रिंसिपल साहब से बात करके बताएंगे कि और क्या मदद हो सकती है… ​कैमरा नहीं होता तो सब हो जाता… लेकिन अब बिना कैमरा लगे सेंटर ही नहीं बन सकता है… पहले हम अपने भतीजा, नाती, पोता सभी को घर बैठे पास कर चुके हैं… अब समय थोड़ा बदल गया है…। रिपोर्टर: सर… देखिए अगर 10-15 नंबर की भी मदद मिल जाएगी तो बच्चा कुछ तो अपने से कर ही लेगा…। दिलीप पांडेय: इतना तो हम करा देंगे… लेकिन सब लोग इसकी भी गारंटी नहीं लेंगे… विश्वनीय टीचर होगा तो वही कर पाएगा मदद… क्योंकि अब बाहरी टीचर की भी ड्यूटी लग रही है… सारे टीचर अपने ही स्कूल के नहीं हैं… इसलिए खुलकर नकल तो नहीं हो पा रही है… लेकिन जितनी मदद हो सके… करा दिया जाता है… देखिए पूरी मदद का प्रयास करेंगे… पास हो गया तो ठीक है… अगर नहीं हुआ तो मेरे पास आना… अगले साल बिना परीक्षा दिए पास करा देंगे… गारंटी के साथ…। रिपोर्टर: आप चाहेंगे तो कुछ न कुछ हो जाएगा। दिलीप पांडेय: देखिए, ये लोग जो बैठे हैं, उसी स्कूल के टीचर हैं। पूछिए कैसा माहौल है? दूसरा टीचर: जो परीक्षा दे रहा है, उसे नौकरी पानी है और जो परीक्षा करा रहा है, उसकी नौकरी जाएगी। इसलिए कोई भी अपनी नौकरी दांव पर नहीं लगाएगा। जितनी मदद हो सकेगी… उतना करा दिया जाएगा… डबल कैमरा लगा है। मैंने चुनाव ड्यूटी भी की है। इसलिए मुझे पता है कि कैमरे की रिकॉडिंग कहां तक जाती है? अगर हम लोगों ने यहां कुछ गड़बड़ की, तो 5 मिनट के अंदर सभी को पता चल जाएगा। रिपोर्टर: फिर कैसे होगा सर, कुछ बताइए? दिलीप पांडेय: बहुत कड़ाई है। वॉशरूम वगैरह जाते समय टीचर से बोल देंगे, वो बता देंगे। कमरे में जाकर कोई नहीं बताएगा… वहां कैमरा लगा है। आप आ गए हैं, तो हम इतनी मदद करा भी देंगे। जो भी कक्ष निरीक्षक होगा, उसको बच्चे के बारे में बता दिया जाएगा। लेकिन और किसी के लिए हम इतना भी नहीं करते। कोई अपनी नौकरी नहीं गंवाएगा, किसी बच्चे के लिए। इतना होगा कि टीचर कॉपी चेक करने। साइन करने जाएगा। किसी बहाने से और बच्चे को कुछ बता देगा… ​या फिर बच्चा जब वॉशरूम के बहाने बाहर आएगा तो उस समय टीचर बता देंगे… रिपोर्टर: बाकी क्या करना है…। प्रिंसिपल साहब या प्रबंधक जी कुछ नहीं बोलेंगे… उनको तो अभी फोन कर दें तो काम हो जाएगा… लेकिन फोन पर यह सब बात करना उचित नहीं है… मैं स्कूल जाकर उन्हें बता दूंगा…। रिपोर्टर: ठीक है गुरु जी… बस कैसे भी पास करा दीजिए… बच्चे को…। दिलीप पांडेय: देखिए… जो मदद होगी वो करा देंगे… लेकिन अभी पास कराने की गारंटी कोई नहीं लेगा… बहुत कड़ाई है… हां, इतना जरूर है कि अगर इस बार कुछ गड़बड़ हुआ तो बताइएगा… ऐसी जगह से बच्चे का फॉर्म भरवा देंगे कि मेरे घर पर ही आकर उसकी कॉपी लिख जाएगी… तब पास कराने की पूरी गारंटी ले लेंगे… बच्चे को परीक्षा भी नहीं देना पड़ेगा… हां, उसमें थोड़ा पैसा अधिक खर्च होगा…। रिपोर्टर: सर… कुछ जुगाड़ लगाइए… बच्चा बहुत कमजोर है… बस पास हो जाए कैसे भी…। दिलीप पांडेय: आप बच्चे का रोल नंबर और नाम दे दीजिए… हम स्कूल जाएंगे तो प्रिंसिपल साहब से बात कर लेंगे… कमरे में जो भी कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी लगेगी… उसको पूरी हिदायत दे दी जाएगी कि बच्चे की जितनी मदद हो करा दें… बच्चा अगर इधर-उधर से देखकर भी लिख लेगा तो उसे कोई मना नहीं करेगा… उसके लिए सभी को बता दिया जाएगा…। रिपोर्टर: हां… सर इतना भी हो जाए कि बच्चा पास हो जाए…। दिलीप पांडेय: देखिए, फिर वही बात… हम पास कराने की गारंटी अभी नहीं लेंगे… मदद जरूर करा देंगे… जब अगली बार हम ​दूसरे स्कूल से फॉर्म भरवाएंगे तब पास कराने की पूरी गारंटी देंगे बिना परीक्षा दिए…। रिपोर्टर: जो पर्वेक्षक लोग आए हैं… उनका क्या सिस्टम है… उनसे ही मदद अगर हो जाए तो करा दीजिए…? दिलीप पांडेय: सभी बाहर से आए हैं… वो लोग शिक्षा विभाग के ही नहीं हैं… कोई स्वास्थ्य विभाग का है तो कोई किसी और विभाग का… तो वो लोग मदद कैसे करेंगे… उनका काम है सिर्फ परीक्षा को वॉच करना… वो लोग कुछ बता ही नहीं पाएंगे… वो लोग तीन घंटा सिर्फ परीक्षा में घूमते रहते हैं…? रिपोर्टर: ठीक है सर… देखिए बस पास हो जाए बच्चा…। दिलीप पांडेय: कोशिश पूरी की जाएगी… लेकिन कोई स्टाम्प पर लिखकर गारंटी तो लेगा नहीं… जो भी मदद होगी वो कराई जाएगी। रिपोर्टर: परीक्षा वाले दिन बच्चे को लेकर आएंगे तो आपसे कैसे मुलाकात होगी सर…? दिलीप पांडेय: बस बच्चे का रोल नंबर हमें दे दीजिए… हम स्कूल जाकर प्रिंसिपल साहब से लेकर सभी टीचर्स को बता देंगे… बाकी तो हम हैं ही…। रिपोर्टर: बस आपका आशीर्वाद मिल जाता तो हम लोग निश्चिंत हो जाते…। दिलीप पांडेय: आशीर्वाद मिल नहीं जाता… आशीर्वाद पूरा है… बस जरूरी यह है कि आपका भी काम हो जाए और हम लोग भी सुरक्षित रहें…। रिपोर्टर: ठीक है गुरु जी… हां, कड़ाई तो बहुत हो गया है…। दिलीप पांडेय: अब क्या बताएं… जिन बच्चों को घर बैठे पास कराएं हैं… वो सब नौकरी कर रहे हैं… आपका भी बच्चा पास होकर कहीं नौकरी पा जाएगा तो जब भी मिलेगा याद तो रखेगा गुरुजी ने मदद की ​थी…। रिपोर्टर: हां, बिल्कुल… क्यों नहीं याद रखेगा… इतना एहसान करेंगे तो कोई क्यों नहीं मानेगा? दिलीप पांडेय: बाबू सिर्फ कुछ लोग ही मानते हैं। बाकी लोग तो काम निकल जाने के बाद कभी लौटकर धन्यवाद करने भी नहीं आते हैं। 17 साल की नौकरी में न जाने कितने बच्चों को पास करा दिए नकल से। लेकिन, लौटकर 17 लोग भी नहीं आए आज तक। किसी भी सेंटर पर नकल संभव नहीं गोरखपुर के जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) अमरकांत सिंह ने बताया- पूरी कड़ाई और पारदर्शिता के साथ यूपी बोर्ड की परीक्षाएं कराई जा रही हैं। किसी भी सेंटर पर नकल संभव नहीं। इसकी पूरी निगरानी की जा रही है। मंत्री और आगरा DIOS को सवाल भेजे यूपी माध्यमिक शिक्षा विभाग की मंत्री गुलाब देवी से बात करने के लिए हमने कॉल किया तो उनके पीए ने अटेंड किया। उन्होंने हमसे सवाल मांगे, जो हमने उन्हें भेज दिए हैं। जवाब आने पर अपडेट किया जाएगा। इसके अलावा आगरा के जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) चंद्रशेखर से हमने बात करने के लिए 3 दिन तक बार-बार कॉल किया, लेकिन उन्होंने फोन अटेंड नहीं किया। इसके बाद हमने उन्हें सवाल लिखकर वॉट्सएप कर दिए हैं, जिसे उन्होंने देख लिया है। जवाब आने पर अपडेट कर दिया जाएगा। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें… 180 रुपए की किताब पेरेंट्स 450 में खरीद रहे, यूपी में कमीशन खा रहे प्राइवेट स्कूल; कैमरे में देखिए सौदेबाजी ‘अभी हम जहां से कोर्स की बुक्स लेते हैं… वहां 65% कमीशन मिलता है। एकदम से पलटा नहीं मार पाएंगे… देखते हैं कौन-सी लगा सकते हैं… बात करेंगे आपसे। अगर आप ठीक होंगे तो वैरी गुड… बात चलेगी आगे…। अभी कमीशन की बात मत करिएगा… उस चीज की बात तो बाद में होती है। जब कोई बुक लगनी होती है… तो अभी से करना ठीक नहीं है…। मैं आपको बता रहा हूं… 11th-12th में आपकी हिस्ट्री आती हो… हिंदी मीडियम… इंग्लिश मीडियम… दोनों सेम वर्जन… लग जाएगी। आप लाकर दीजिए… हम लगा देंगे…।’ कोर्स की किताबों में ये कमीशन की सौदेबाजी है, जो प्राइवेट स्कूल चलाने वाले कर रहे। इस दलाली में प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट, प्रिंसिपल, उनके खास कर्मचारी और पब्लिशर शामिल हैं। इसलिए यूपी के प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहे बच्चों को लिए पेरेंट्स को कोर्स की बुक्स पर मोटा पैसा खर्च करना पड़ रहा। पढ़ें पूरी खबर
    Click here to Read more
    Prev Article
    ईरान-अमेरिका युद्ध से यूपी के 25 लाख लोग फंसे:होली में भी घर नहीं आ पाएंगे, जानिए क्यों खाड़ी देश जाते हैं युवा
    Next Article
    होली के लिए अलर्ट मोड पर स्वास्थ विभाग:गोरखपुर में CHC, PHC सहित डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में सुरक्षित किए गए बेड, तैनात मिलेंगे डॉक्टर

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment