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    यूपी में इस बार ठिठुरन वाली सर्दी नहीं पड़ेगी:अल नीनो का असर- तापमान 2°C ज्यादा रह सकता है; गर्मी समय से पहले सताएगी

    8 hours ago

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    अक्टूबर में तेज धूप पसीना छुड़ा रही है। आमतौर पर अक्टूबर में दिन का तापमान 31°C से 33°C रहता है। रात का तापमान 20°C से 22°C के बीच रहता है। महीने की शुरुआत में दिन थोड़े गर्म रहते हैं, लेकिन रातों में हल्की ठंडक महसूस होने लगती है। लेकिन, इस बार तापमान सामान्य से 1°C से 2°C ऊपर चल रहा है। दिन का तापमान 33°C से 35°C तक और रात का तापमान 22°C से 24°C के आसपास बना हुआ है। कुछ ऐसा ही इन सर्दियों में आपको महसूस होने वाला है। मौसम वैज्ञानिक प्रशांत महासागर में सक्रिय 'अल नीनो' को इसकी वजह बता रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार- अल नीनो का असर फरवरी, 2027 तक बना रहेगा। इस वजह से कड़कडाती ठंड पड़ने के आसार कम हैं। शीतलहर (कोल्ड वेव) का दौर भी बहुत लबां नहीं रहेगा। मार्च, 2027 से ही तापमान तेजी से बढ़ने लगेगा। पढ़िए ये रिपोर्ट… यूपी जैसे मैदानी इलाकों में शीतलहर अचानक से नहीं आती। इसकी शुरुआत हजारों किलोमीटर दूर भूमध्य सागर से होती है। वहां से उठने वाले चक्रवाती तूफान (पश्चिमी विक्षोभ या वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) भारत के पहाड़ी राज्यों (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड) तक पहुंचकर बर्फबारी कराते हैं। बर्फबारी से वहां का तापमान माइनस में चला जाता है। इसके बाद असली खेल शुरू होता है। बर्फबारी रुकने के बाद वहां जमी बर्फ को छूकर बेहद ठंडी और सूखी हवाएं नीचे मैदानी इलाकों की तरफ आती हैं। इन बर्फीली हवाओं को रोकने के लिए रास्ते में कोई पहाड़ या बड़ी रुकावट नहीं है। ये पूरे यूपी को अपनी चपेट में ले लेती हैं। कैसे अल नीनो ठंडी हवाओं में रुकावट बनेगा कोहरा उतना घना नहीं होगा, ‘कोल्ड डे’ भी कम होंगे सर्दियों में दिसंबर-जनवरी के 10 से 15 दिन ऐसे होते हैं, जब पूरे दिन धूप नहीं निकलती। सुबह और रात में घना कोहरा छाता है। सर्द हवाएं दिनभर ठिठुरन महसूस करवाती हैं। जब दिन का तापमान 10डिग्री से कम बना रहता है, तब मौसम विभाग इसको ‘कोल्ड डे’ यानी ठंडा दिन मानता है। मौसम विभाग का पूर्वांनुमान है कि इस बार सर्दियों में ‘कोल्ड डे’ के दिन कम रह सकते हैं। स्काईमेट वेदर के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत बताते हैं- घने कोहरे की वजह से धूप जमीन तक कम पहुंच पाती। इस वजह से दिन में भी तापमान बेहद कम रहता है। कैसे अल नीनो कोहरा नहीं बनने देगा अल नीनो के असर से सर्दियों का तापमान सामान्य से 1-2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रह सकता है। जबकि, घने कोहरे के लिए हवा में नमी और कम तापमान जरूरी है। घना कोहरा नहीं बनने से आसमान साफ रहेगा। सीधी धूप जमीन तक पहुंचेगी और कड़ाके की ठंड नहीं पड़ेगी। मार्च के आखिरी 15 दिन में तेजी से बढ़ेगा तापमान यूं तो मार्च महीने के आखिर तक गर्मी की शुरुआत मानी जाती है। मार्च में धीरे-धीरे तापमान बढ़ता है, लेकिन दिन का तापमान 32-35 डिग्री सेल्सियस तक बना रहता है। प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो का असर फरवरी-मार्च, 2027 तक बना रहेगा। इसकी वजह से मार्च के आखिरी 15 दिनों में तापमान तेजी से बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ठंड कम पड़ने से गेहूं-सरसो की फसल पर असर पड़ेगा यूपी देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य है। फरवरी-मार्च में गेहूं की फसल के दाना भरने और पकने के लिए ठंडे मौसम की जरूरत होती है। अगर सर्दियों में तापमान 1 से 2 डिग्री भी ऊपर रहता है, तो गेहूं का विकास चक्र छोटा हो जाएगा। मिट्टी में नमी की कमी और समय से पहले गर्मी बढ़ने के कारण फसलों के समय से पहले पकने का खतरा है। इससे दाने पतले रह सकते हैं और पैदावार घट सकती है। फसल बचाने के लिए ये तरीके अपनाए जा सकते हैं… नमी बचाना सबसे जरूरी: बांदा कृषि एवं प्रौद्यौगिकी विश्वविद्यालय में कृषि विभाग के प्रोफेसर डॉ. दिनेश शाह बताते हैं- अल नीनो से खेतों में सूखापन जल्दी आ सकता है। इसलिए खेत की बार-बार जुताई के बजाय रोटावेटर या हैरो से हल्की जुताई करके, तुरंत पाटा (प्लैंक) लगाएं। जिससे नमी अंदर लॉक हो जाए और फिर बुआई कर दें। इससे मिट्टी की नमी बची रहेगी। सिंचाई के लिए फव्वारा (स्प्रिंकलर) या टपक (ड्रिप) तकनीक का इस्तेमाल करें, जिससे पानी की बचत हो सके। घास-फूस पर तुरंत काबू: सूखे और कम पानी के मौसम में खरपतवार (घास-फूस) फसल का सारा पानी और खाद खुद सोख लेते हैं। इसलिए निराई-गुड़ाई समय पर करते रहें। मिट्टी की जांच के हिसाब से ही संतुलित खाद का उपयोग करें। क्या जल्दी बोई जाने वाली किस्में चुननी चाहिएं? जी हां, अल नीनो के असर को देखते हुए गेहूं और सरसों की जल्दी पकने वाली कम अवधि की किस्मों का चुनाव करें और समय से बुआई करें। इससे फसल मार्च की तेज धूप और गर्म हवाओं (लू) के आने से पहले ही पूरी तरह पककर तैयार हो जाएगी। गेहूं और सरसों के दाने सिकुड़ेंगे नहीं, इससे मुनाफा कम नहीं होगा। जल्दी तैयार होने वाली किस्मों को पकने के लिए कम सिंचाई की जरूरत होती है। अल नीनो के सूखे मौसम में किसानों के लिए बेहतर साबित होगा। ------------------------------------------------ ये मौसस एक्सप्लेनर भी पढ़िए… यूपी के 17 जिलों में सूखा, 68% तक कम बारिश: जौनपुर, शामली, गाजियाबाद में ‘गंभीर’ स्थिति; इसका पूरे प्रदेश पर क्या असर होगा? मानसून का सीजन खत्म हो चुका है। यूपी में सामान्य से 8% ज्यादा बारिश हुई है। इसके बावजूद 17 जिलों में सूखे के आसार हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने 30 सितंबर को सर्वे के आदेश दिए हैं। रिपोर्ट के आधार पर 31 अक्टूबर तक इन जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया जा सकता है। तो 17 जिलों में सूखा पड़ने से पूरे यूपी पर क्या असर पड़ेगा? सूखा घोषित होने की सरकारी प्रक्रिया क्या है? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में…
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