Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    आराधना मिश्रा ने कहा-अजय राय को हटाना रणनीति का हिस्सा:जिम्मेदारियों के साथ चुनौतियां आती हैं, मैं डरती नहीं हूं...

    22 hours ago

    1

    0

    यूपी कांग्रेस की नई प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद फुल फॉर्म में हैं। उन्होंने 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की प्राथमिकताएं, सपा से गठबंधन, महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और ब्राह्मण-सवर्ण वोटरों को लेकर खुलकर बात की। अजय राय को लेकर कहा- पद से किसी को हटाना, किसी को लाना…ये रणनीति का हिस्सा हो सकता है। मैं कांग्रेस के मजबूत सिपाही हूं। दैनिक भास्कर के एक सवाल के जवाब में आराधना ने 2022 में कांग्रेस के 40% टिकट महिलाओं को देने का हवाला दिया। भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि भाजपा महिला आरक्षण का बिल लागू नहीं करवाना चाहती थी। अगर ऐसा नहीं है, तो उसे यूपी चुनाव में कम से कम 33% महिलाओं को टिकट देना चाहिए। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल. आप यूपी में बड़ा ब्राह्मण चेहरा हैं, भाजपा में आप ब्राह्मणों की स्थिति को कैसे देखती हैं? जवाब. भाजपा ने हमेशा ब्राह्मण, दलित और पिछड़ों को सिर्फ वोटबैंक समझा है। वोट तो लिया, लेकिन सम्मान नहीं दिया। इससे अलग, कांग्रेस ने कभी किसी जाति को राजनीति का मुद्दा नहीं बनाया। आजादी की लड़ाई से आज तक सबको साथ लेकर चलने की विचारधारा बदली नहीं। आप देखिए, यूपी की हमारी टीम में सबका प्रतिनिधित्व दिखता है। यूपी में कांग्रेस सबको साथ लेकर चलने के लिए तैयार है। सवाल. सवर्ण भाजपा का कोर वोटर है, उसको आप अपने पक्ष में कैसे लाएंगी? जवाब. ये बहुत समझदार वर्ग है। समय आने पर वह अपना निर्णय बहुत बारीकी से देता है, इसलिए समय आने दीजिए। सवाल. अजय राय के समर्थक नाराज हैं? जवाब. देखिए, किसी को हटाना, किसी को बनाना…ये पार्टी की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। इसलिए पद महत्वपूर्ण नहीं है। संगठन सबसे ऊपर है। आज मैं पद पर हूं, कल नहीं रहूंगी, कोई और होगा…। पार्टी का कार्यकर्ता तो वहीं रहेगा। नेतृत्व कोई भी करे, संगठन को मजबूत बनाने के लिए कार्यकर्ता सबसे अहम है। सवाल. पार्टी में कई अंदरूनी विरोध चलते हैं, कैसे निपटेंगी? जवाब. टाइम कभी कम नहीं होता, सही समय पर ही चीजें होती हैं। 2024 के बाद हमारा संगठन और मजबूत हो गया है। इसका परिणाम आप 2027 में देखेंगे। जिम्मेदारियों के साथ चुनौतियां आती हैं। उससे मैं डरती नहीं हूं। कांग्रेस का कार्यकर्ता चुनौती को स्वीकार करेगा और परास्त भी करेगा। सवाल. पिछले चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन खास नहीं रहा। अब 2027 में कहां पर देखती हैं? जवाब. 2019 में प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश की कमान संभाली। बहुत मेहनत की, ब्लॉक और बूथ स्तर पर संगठन को बनाया। 2022 में भले ही परिणाम उतने अच्छे नहीं रहे। लेकिन जो संगठन तैयार हुआ था, उसका असर 2024 के लोकसभा चुनाव में देखा। भाजपा वालों को लग रहा था कि यूपी में पूरी 80 सीटें ले आएंगे। लेकिन हुआ क्या…? कांग्रेस और सपा इतनी मजबूती से लड़े कि भाजपा के अहंकार का रथ अगर कहीं रुका तो वह यूपी में थमा। इंडिया गठबंधन ने ही रोका। भाजपा की केंद्र की सरकार बैसाखी पर है। एक तरफ चंद्रबाबू नायडू हैं, दूसरी तरफ नीतीश। हमें भरोसा है कि 2027 में इंडिया गठबंधन यूपी में सरकार बनाएगा। सवाल. महिलाओं को एकजुट करने का भाजपा प्रयास कर रही, कांग्रेस ने यही जिम्मेदारी आपको दी है? जवाब. 2022 का नारा- लड़की हूं, लड़ सकती हूं। हमने 40% महिलाओं को टिकट देकर राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित की थी। मैं चुनौती देती हूं, आज उनकी (भाजपा) डबल और कहीं तो ट्रिपल इंजन की सरकार है। उन्हें 33% महिलाओं को टिकट देना चाहिए। 33% महिला आरक्षण का बिल तो आपने पास करवा लिया, लेकिन उनकी नीयत लागू करने की नहीं थी। कांग्रेस ने महिला सशक्तिकरण को कभी राजनीति का हिस्सा नहीं बनाया। देश की पहली प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं। पहली राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल भी कांग्रेस पार्टी ने दीं। तो आधी आबादी, यानी महिला समझेंगी कि कांग्रेस पार्टी सिर्फ कहती नहीं, बल्कि करके दिखाती है। सवाल. क्या कांग्रेस चुनाव में 33% टिकट महिलाओं को देगी? जवाब. हम तो 40% टिकट महिलाओं को दे चुके हैं। अगर भाजपा के नेताओं में नैतिकता है, तो भी टिकट दे। महिलाओं को प्रतिनिधित्व देना, हमारा कोई पॉलिटिकल एजेंडा नहीं है, ये हमारी विचारधारा है। सवाल. आपके अखिलेश यादव से सियासी रिश्ते अच्छे रहे, कैसे सामंजस्य बनाएंगी? जवाब. फ्लोर ऑफ द हाउस पर इंडिया गठबंधन के तहत 2023 से विधानसभा में सपा और कांग्रेस ने संघर्ष किया। हमें सरकार को घेरना होता है। एक स्ट्रैटजी बनती है, उसके तहत हमने सरकार को घेरा। विधानसभा में सरकार को चुनौती देते हुए मैंने कांग्रेस का पक्ष रखा है। मैं पूरी गारंटी देती हूं कि जो जिम्मेदारी मुझे दी गई, मैंने उसको निभाया है। सवाल. कांग्रेस सपा के साथ गठबंधन में है, कांग्रेस कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी? जवाब. देखिए, मैं यह साफ करना चाहती हूं कि इंडिया एलायंस राज्य स्तर पर नहीं बना है। ये राष्ट्रीय स्तर पर बना है। इसमें जो भी पार्टियां शामिल थीं, उनका निर्णय केंद्रीय नेतृत्व ने लिए। सबने देखा, कुछ दिन पहले ही बैठक में राष्ट्रीय स्तर के सारे नेता मौजूद थे। तो गठबंधन कब तक रहेगा? चुनाव कितनी सीटों पर लड़ेंगे? ये राष्ट्रीय नेतृत्व तय करता है। इतना जरूर कहूंगी कि जब ये निर्णय होगा, तब अपने नेतृत्व को यूपी के कार्यकर्ताओं की भावनाओं के बारे में जरूर बताऊंगी। सवाल. मुस्लिम, दलित, ब्राह्मण गठजोड़ की बात हो रही, क्या कांग्रेस अपने पुराने फॉर्मूले की तरफ लौट रही? जवाब. कांग्रेस के साथ हर जाति और धर्म के लोग जुड़े हैं। यूपी की टीम के जरिए ये साफ किया गया है कि सबको साथ लेकर चलेंगे। 2027 के मिशन को पूरा करेंगे। सवाल. रामपुर खास में ऐसा क्या खास है, जो कांग्रेस पूरे यूपी में नहीं कर पाई, वो इस सीट पर हो रहा? जवाब. ये सीट ही हमारा परिवार है। वहां के वोटर ही हमारा परिवार है। कांग्रेस पार्टी का झंडा कभी झुकने नहीं दिया है। सवाल. सपा से गठबंधन की घोषणा कब तक होगी? जवाब. बहुत जल्दी, हम सभी चाहते हैं कि निर्णय हो जाए, जिससे चुनाव की तैयारी में जुट जाए। सवाल. यूपी में आपको बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। क्या प्राथमिकता रहेंगी? जवाब. जिम्मेदारी बड़ी है…। कांग्रेस पार्टी की सेवा करने का हमारे परिवार का 4 पीढ़ियों का इतिहास है। मुझे इस विरासत को आगे लेकर जाना है। उत्तर प्रदेश के ऐसे हर कांग्रेस कार्यकर्ता, जिसके पिता स्वतंत्रता सेनानी रहे, आज संविधान और लोकतंत्र को बचाने की उसके मन में चाहत है। ऐसे कार्यकर्ता के विश्वास को और मजबूत करना ही मेरी प्राथमिकता है। सवाल. ब्लॉक प्रमुख, फिर 3 बार विधायक, अब कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष बनाया। कैसे देखती हैं? जवाब. केंद्रीय नेतृत्व, खासकर प्रियंका गांधी का आभार है, जिनके साथ मैंने लंबा काम किया। मैं पहले बीडीसी बनी, फिर ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ा, फिर 2014 के उपचुनाव में। जब पिता राज्यसभा गए, तब मैंने रामपुर खास से प्रतिनिधित्व किया। पार्टी ने 3 बार टिकट देकर जिताया। मुझे दो बार सीएलपी लीडर बनाया। ये भी इत्तेफाक है कि मेरे पिता 22 बार सीएलपी लीडर रहे। मुझे उस पद पर बैठने का मौका मिला। आज फिर पार्टी ने मुझ पर और मेरे परिवार पर भरोसा जताया है। --------------------------- ये इंटरव्यू भी पढ़िए - रोहिणी बोलीं- चुनाव लड़ने नहीं, लड़वाने आई हूं, वाल्मीकियों को हिस्सेदारी देने वाले को समर्थन देंगे स्विट्जरलैंड में 6 साल बिताने के बाद भारत लौटीं रोहिणी घावरी अब अपने वाल्मीकि समाज को राजनीतिक रूप से मजबूत करने की मुहिम में जुटी हैं। डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी करने और स्विट्जरलैंड में 2 साल नौकरी करने के बाद उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया। दिल्ली, हरियाणा और मेरठ के बाद वे लखनऊ पहुंचीं। पढ़िए पूरी खबर...
    Click here to Read more
    Prev Article
    'इकरा हसन शादी करें तो हिंदू लड़के तैयार':सहारनपुर में भाजपा विधायक का दावा; सपा सांसद ने पूछा था- आपकी बेटी नहीं हूं क्या
    Next Article
    अपर्णा की लखनऊ की 3 सीटों से दावेदारी मजबूत:मुलायम की छोटी बहू ने क्यों कहा- मैनपुरी से नहीं लड़ूंगी, टिकट भाजपा तय करे

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment