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    अंकित बालियान की हत्या की साजिश दो साल पहले रची:कनाडा से धमकी मिली, शूटर पकड़े गए फिर भी होतर रेकी

    4 hours ago

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    शामली में हरियाणवी गायक अंकित बालियान की हत्या की साजिश दो साल पहले शुरू हुई थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह मामला सिर्फ सुपारी और दो शूटरों तक सीमित नहीं है। घटनाक्रमों को जोड़ने पर एक लंबी साजिश नजर आ रही है। पहले एक गाने को लेकर विवाद हुआ। फिर विदेश से जान से मारने की धमकी मिली। दिसंबर 2025 में तीन शूटर सोनीपत पहुंचे थे। उन्होंने अंकित की रेकी की और 20 दिसंबर को उसकी कार में जीपीएस लगाने की कोशिश की। एसटीएफ ने इन शूटरों को पकड़ लिया था, लेकिन इसके बाद भी साजिश नहीं रुकी। कुछ समय बाद फिर अंकित की गतिविधियों पर नजर रखी जाने लगी और आखिर में उसकी हत्या कर दी गई। विदेश में बैठे गैंग के गुर्गों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। पुलिस अब पुराने घटनाक्रमों, कॉल डिटेल, सोशल मीडिया संपर्क, जीपीएस और सीसीटीवी फुटेज को जोड़कर यह पता लगा रही है कि इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड कौन था। साथ ही, विदेश में बैठे लोगों ने स्थानीय नेटवर्क को कैसे चलाया। पुलिस जांच के अनुसार, अंकित के एक गाने को लेकर विवाद बढ़ा था। आरोप है कि इस गाने में टिल्लू ताजपुरिया गिरोह से जुड़े लोगों का जिक्र था। इसके बाद गोगी गिरोह से जुड़े राहुल उर्फ भोलू शाहपुरिया के भतीजे चिराग ने अंकित को धमकी दी। चिराग उस समय कनाडा में था। उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए कॉल कर कथित तौर पर अंकित पर गाना बनाकर टिल्लू भाई की बेइज्जती करने का आरोप लगाया और जान से मारने की धमकी दी थी। अंकित ने इस संबंध में सोनीपत पुलिस को शिकायत भी दी थी। 2025 में रेकी के बाद हत्या कर प्लानिंग थी धमकी के बाद दिसंबर 2025 में अंकित की हत्या की कथित योजना को जमीन पर उतारने की कोशिश की गई। पुलिस के मुताबिक, तीन शूटर सोनीपत के सेक्टर-14 पहुंचे थे। उनका मकसद अंकित की रेकी करना और हत्या की तैयारी करना था। STF को इसकी भनक लगी और कार्रवाई कर तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में अंकित की हत्या की कथित योजना से जुड़े अहम तथ्य सामने आए। उस समय यह साफ हो गया था कि अंकित की जान को खतरा है। लेकिन शूटरों की गिरफ्तारी के बावजूद खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। 20 दिसंबर को जिम के बाहर खड़ी कार बनी निशाना पुलिस के अनुसार 20 दिसंबर को शार्प शूटर मोहित और सुमित अंकित की रेकी के लिए उसके जिम के बाहर पहुंचे। दोनों ने अंकित की कार में GPS लगाने की कोशिश की, ताकि उसकी लोकेशन पर नजर रखी जा सके। GPS सक्रिय नहीं हो सका। इसके बाद उसे कार में ही छोड़ दिया गया। पुलिस ने बाद में इस GPS को कब्जे में लिया। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि GPS कहां से आया, किसके निर्देश पर लगाया गया और इससे अंकित की गतिविधियों पर नजर रखने की योजना क्या थी। STF ने शूटर पकड़े, फिर भी जारी रही निगरानी दिसंबर में शूटरों की गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस के सामने यह सवाल बना रहा कि अंकित को लगातार निशाना क्यों बनाया जा रहा था। मौजूदा जांच में आरोप है कि पहली कोशिश नाकाम होने के बाद साजिश को नए सिरे से आगे बढ़ाया गया। पुलिस अब यह पता कर रही है कि STF की कार्रवाई के बाद विदेश में बैठे लोगों और स्थानीय आरोपियों के बीच किस तरह संपर्क बना रहा और नए शूटरों तक निर्देश कैसे पहुंचे। हत्या वाले दिन भी मिली थी धमकी जांच में सामने आया है कि अंकित की हत्या वाले दिन भी उसे फोन पर धमकी मिली थी। यह कॉल अब जांच की महत्वपूर्ण कड़ी बन गई है। पुलिस कॉल डिटेल और तकनीकी साक्ष्यों के जरिए यह पता कर रही है कि कॉल किस नंबर से आई थी, नंबर किसके नाम था, कॉल करने वाला कौन था और क्या धमकी देने वाला व्यक्ति हत्या की योजना से सीधे जुड़ा था। मोहित-सुमित की भूमिका की जांच अंकित हत्याकांड में पुलिस ने मोहित और सुमित को कथित शार्प शूटर बताया था। दोनों पर अंकित की रेकी में शामिल होने का आरोप है। बाद में पुलिस मुठभेड़ में दोनों मारे गए। अब जांच एजेंसियां दोनों के मोबाइल फोन, संपर्कों और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों के जरिए यह पता लगाने में जुटी हैं कि उनके संपर्क किन लोगों से थे और उन्हें निर्देश कौन दे रहा था। विदेश में बैठकर नेटवर्क चलाने का आरोप अंकित हत्याकांड की जांच ने पुलिस के सामने गैंग के विदेश तक फैले नेटवर्क की तस्वीर भी रखी है। पुलिस के अनुसार गोगी गिरोह से जुड़े कुछ लोग अमेरिका और कनाडा में बैठकर सोशल मीडिया के जरिए भारत में सक्रिय लोगों के संपर्क में हैं। पुलिस के मुताबिक सोनीपत के गैंगस्टर जितेंद्र उर्फ गोगी का भतीजा मोंटी मान कनाडा के टोरंटो में बैठकर गिरोह से जुड़े लोगों के संपर्क में है। वहीं अंकित हत्याकांड की जिम्मेदारी लेने वाले राहुल उर्फ भोलू शाहपुरिया का भतीजा चिराग भी विदेश में बैठकर सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से संपर्क करता है। पुलिस अब इन दावों की तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है। पहले दोस्ती, फिर गैंग से जोड़ने का आरोप पुलिस जांच के अनुसार विदेश में बैठे गैंग से जुड़े लोग सोशल मीडिया पर फर्जी नाम या पहचान से युवाओं से संपर्क करते हैं। शुरुआत सामान्य बातचीत से होती है। धीरे-धीरे विश्वास में लेकर युवाओं को अपराध की दुनिया में धकेलने का आरोप है। पुलिस को ऐसे नेटवर्क के बारे में भी जानकारी मिली है, जिसमें युवाओं को हत्या, रंगदारी और लूट जैसी वारदातों के बदले पैसे देने का लालच दिया जाता है। पुलिस अब ऐसे युवाओं की पहचान कर रही है, जो इस नेटवर्क के संपर्क में आए। इंस्टाग्राम, सिग्नल और स्नैपचैट से संपर्क जांच एजेंसियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की गतिविधियों को भी खंगाल रही हैं। पुलिस के अनुसार इंस्टाग्राम, सिग्नल और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म संपर्क के लिए इस्तेमाल किए जाने की जानकारी मिली है। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि विदेश में बैठे लोगों के सीधे संपर्क में कौन-कौन था और वारदात के लिए निर्देश किस माध्यम से दिए जाते थे। वारदात के बाद सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि वारदात के बाद गैंग के नाम से सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर जिम्मेदारी लेने की कोशिश की जाती है। अंकित हत्याकांड के बाद राहुल उर्फ भोलू शाहपुरिया के नाम से सामने आई पोस्ट भी जांच का हिस्सा है। पुलिस पोस्ट की सत्यता, उसे अपलोड करने वाले व्यक्ति और उसके पीछे मौजूद लोगों की भूमिका की तकनीकी जांच कर रही है। अमेरिका-कनाडा से पाकिस्तान तक कनेक्शन की जांच पुलिस अब इस नेटवर्क को देश की सीमाओं से बाहर तक जोड़कर देख रही है। अमेरिका और कनाडा में बैठे संदिग्धों की सोशल मीडिया गतिविधियों और भारत में सक्रिय लोगों से उनके संपर्क की जांच की जा रही है। जांच में संभावित पाकिस्तान कनेक्शन की बात भी सामने आई है। पुलिस को कुछ पाकिस्तानी लोगों से बातचीत के सुराग मिलने का दावा किया गया है। हालांकि, इस कनेक्शन की वास्तविक भूमिका और आपराधिक नेटवर्क से संबंध की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। भोलू शाहपुरिया भी जांच के केंद्र में अंकित हत्याकांड में राहुल उर्फ भोलू शाहपुरिया का नाम लगातार सामने आ रहा है। वह सोनीपत के शाहपुर का रहने वाला बताया जाता है और उसका नाम गोगी गैंग से जुड़े बदमाशों में लिया जाता है। उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और रंगदारी जैसे गंभीर मामलों में संलिप्तता की जानकारी पुलिस रिकॉर्ड में होने की बात सामने आई है। पुलिस अब भोलू, चिराग, विदेश में बैठे संदिग्धों और स्थानीय शूटरों के बीच संपर्क की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है।
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