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    अटेंडेंटस के नाम पर वसूली, विरोध पर उत्पीड़न:कानपुर के प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में छात्रों का हंगामा, बोले- मनमाने नियम नहीं चलेंगे

    9 hours ago

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    09 फरवरी: महाराणा प्रताप इंजीनियरिंग कॉलेज, छात्रों को पहुंचने में देर हुई तो गेट पर रोका गया। लेट फीस की बात पर छात्रों की पिटाई हुई। उसके बाद देर तक बवाल हुआ। शिक्षकों पर रिपोर्ट दर्ज की गई। 26 फरवरी: बुधवार को प्रणवीर सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (PSIT) में विवाद हुआ। यहां जेसीबी की टक्कर से अपने सहपाठी की मौत से भड़के छात्रों ने विरोध किया तो विवाद हुआ। छात्रों के 90 परसेंट अनिवार्य अटेंडेंस और कम हाजिरी पर जुर्माना की बात सामने आई। यह दो मामले कानपुर के प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्रों और मैनेजमेंट के टकराव की गवाही दे रहे हैं। दोनों ही जगहों पर वजह सामने आई कि देर होने पर लेट फीस वसूला जाता है। पक्ष सुना नहीं जाता। अपनी बात कहने पर उत्पीड़न तक का सामना करना पड़ता है। छात्रों का कहना है कि 90 प्रतिशत से कम अटेंडेंस होने पर उनसे फाइन लिया जाता है। दोनों संस्थानों में विवाद अलग-अलग कारणों से शुरू हुए, लेकिन लास्ट मामला अटेंडेंस और फाइन पर आकर टिक गया। छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के नियमों के अनुसार 75 प्रतिशत अनिवार्य अटेंडेंस को ही मान्य किया जाए। मनमाने नियम बनाकर धन उगाही बंद की जाए। पढ़िए रिपोर्ट… पहले यह 2 तस्वीर देखिए… पहले जानिए PSIT में क्या हुआ… पीएसआईटी कैंपस में छात्रों ने बुधवार को जमकर हंगामा किया। तोड़फोड़ भी की। गुस्साए छात्रों ने अपनी मांगें रखी व धरने पर बैठ गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने छात्रों को खदेड़ा। पुलिस पर छात्रों को पीटने का भी आरोप है। हंगामे में कई छात्र घायल भी हुए पीएसआईटी में हंगामे के दौरान छात्रों ने बताया- संस्थान में 90 प्रतिशत अटेंडेंस अनिवार्य है। इससे कम होने पर उनसे फाइन लिया जाता है। छात्रों ने हंगामें के दौरान अनिवार्य अटेंडेंस को 75 प्रतिशत करने की मांग की गई, जिसको संस्थान ने मान लिया है। इसके अलावा संस्थान में हुई घटना में किसी छात्र पर कार्रवाई न होने की बात भी संस्थान ने कही है। छात्र अर्पित सिंह यादव ने 90 प्रतिशत से कम अटेंडेंस होने पर फाइन लिए जाने की बात कही। कहा कि हमारा मेडिकल भी अमान्य कर दिया जाता है। बात नहीं सुनी गई तो छात्रों ने हंगामा शुरू किया। करीब 3 हजार छात्रों ने कॉलेज में घुसकर तोड़फोड़ की। दरवाजे, खिड़की, टेबल तोड़ दी। मौके पर सचेंडी, पनकी, अरमापुर, कल्याणपुर सहित 7-8 थानों की फोर्स, PAC पहुंची। दोपहर 1 बजे बवाल बढ़ गया। पुलिस और छात्रों में झड़प हो गई। पुलिस ने छात्रों को हटाने के लिए दौड़ा-दौड़ाकर लाठियां मारी। कई छात्र गिरकर घायल हो गए। बवाल के बाद छात्रों की सारी मांगे मान ली गई हैं। साथी छात्र की मौत पर भड़के दरअसल, सोमवार को कैंपस में निर्माण काम में लगी जेसीबी से टकरा कर BCA फाइनल ईयर के छात्र की मौत हो गई थी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि छात्र की किडनी, लंग्स, पैनक्रियाज डैमेज हो गया था। इसी के विरोध में छात्र न्याय की मांग करते हुए नारेबाजी करने लगे। छात्रों का आरोप है कि कॉलेज कैंपस में चल रहे निर्माण काम के दौरान सुरक्षा इंतजाम न होने से यह हादसा हुआ। वहीं, कॉलेज प्रबंधन ने घटना को कैंपस के बाहर का मामला बताया। मृतक की पहचान प्रखर सिंह निवासी रतनलाल नगर के रूप में हुई। प्रोटेस्ट के बाद 80 प्रतिशत पर हुए राजी महाराणा प्रताप इंजीनियरिंग कॉलेज में 9 फरवरी को हुए हंगामे में छात्रों ने बताया कि 90 प्रतिशत अटेंडेंस पूरी न होने पर उनसे फाइन लिया जाता है। एक साल की पढ़ाई में छात्रों से संस्थान 20 हजार रुपए तक फाइन वसूल लेता है। फाइन न भरने पर शैक्षिक दस्तावेज व कोर्स पूरा होने के बाद एनओसी समेत कई परेशानियां होती हैं। बताया कि यह फाइन कैश में जमा होता है। हालांकि हंगामे के बाद फिलहाल अनिवार्य अटेंडेंस को 80 प्रतिशत कर दिया गया है। धन उगाही की आ रहीं शिकायतें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कानपुर प्रांत मंत्री दिनेश यादव ने कहा कि अटेंडेंस के नाम पर निजी संस्थानों में छात्रों से धन उगाही की शिकायतें मिल रही हैं। बीते दिनों में केआईटी, महाराणा प्रताप और पीएसआईटी से शिकायतें आई हैं जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। हमारी मांग है कि यूजीसी के नियमों के अनुसार 75 प्रतिशत अनिवार्य अटेंडेंस को ही सभी संस्थानों में मान्य किया जाए। अपनी मनमर्जी से नियम बनाकर छात्रों से हो रही धन उगाही को तत्काल रोका जाए। यूजीसी व एआईसीटीई के अनुसार 75 प्रतिशत अटेंडेंस अनिवार्य यूजीसी व एआईसीटीई के दिशानिर्देशों के अनुसार निजी और सरकारी दोनों संस्थानों में सेमेस्टर परीक्षा में बैठने के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत अटेंडेंस अनिवार्य है। यह नियम सभी लेक्चर, प्रैक्टिकल और ट्यूटोरियल पर लागू होता है। 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति होने पर छात्र को परीक्षा से रोका जा सकता है ग्रुप डायरेक्टर बोले- फाइन नहीं लिया जाता अटेंडेंस कम होने पर फाइन लेने के मामले में पीएसआईटी के ग्रुप डायरेक्टर डॉ. मनमोहन शुक्ला ने बताया कि अनिवार्य अटेंडेंस को 75 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे पहले भी फाइन नहीं लिया जाता था। सिक्योरिटी डिपाजिट लिया जाता था जो कि अगले सेमेस्टर में वापस हो जाता था। 95 प्रतिशत से अधिक अटेंडेंस वाले छात्रों को संस्थान पैसा देता है। अब जानिए, महाराणा प्रताप इंजीनियरिंग कॉलेज का मामला कानपुर के महाराणा प्रताप इंजीनियरिंग कॉलेज में 04 फरवरी की सुबह बवाल हो गया। देर से पहुंचने पर टीचरों ने छात्र-छात्राओं को दौड़ा-दौड़ाकर डंडों और बेल्टों से पीटा। पिटाई से 10 स्टूडेंट्स घायल हो गए। इनमें चार छात्राएं हैं। एक छात्रा का हाथ फट गया। खून निकलते देख साथी भड़क गए। उन्होंने हंगामा कर दिया। कॉलेज का गेट बंद कर छात्र वी वांट जस्टिस जैसे नारे लगाने लगे। कॉलेज में तोड़फोड़ भी की गई। घायल छात्र-छात्राओं को कॉलेज के ही अस्पताल में भर्ती कराया गया। हंगामा बढ़ने पर पुलिस और पीएसी बुलानी पड़ी। पुलिस ने छात्रों को समझाकर उनका आंदोलन खत्म कराया है। एक छात्र के पिता की शिकायत पर 3 टीचरों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। कॉलेज प्रबंधन ने 2 टीचरों को सस्पेंड कर दिया है। पुलिस ने चार टीचरों को अरेस्ट किया है। -------------------- ये खबर भी पढ़िए- PSIT कॉलेज में ACP ने छात्रों को दौड़ाकर पीटा:लाठीचार्ज में कई छात्र घायल, कानपुर में छात्र की मौत के बाद हंगामा-तोड़फोड़ कानपुर के पनकी स्थित PSIT इंजीनियरिंग कॉलेज में बुधवार सुबह 10 बजे छात्रों ने हंगामा शुरू किया। करीब 3 हजार छात्रों ने कॉलेज में घुसकर तोड़फोड़ की। दरवाजे, खिड़की, टेबल तोड़ दी। मौके पर सचेंडी, पनकी, अरमापुर, कल्याणपुर सहित 7-8 थानों की फोर्स, PAC पहुंची। दोपहर 1 बजे बवाल बढ़ गया। पुलिस और छात्रों में झड़प हो गई। पुलिस ने छात्रों को हटाने के लिए दौड़ा-दौड़ाकर लाठियां मारी। कई छात्र गिरकर घायल हो गए। बवाल के बाद छात्रों की सारी मांगे मान ली गई हैं। पढ़ें पूरी खबर…
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