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    बदायूं में कदमनगला के बाद रैपुरा पर गंगा का कहर:गांव से 20 मीटर दूर रह गई नदी, कछला में खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर नीचे

    1 hour ago

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    बदायूं में गंगा नदी का कटान एक बार फिर चिंता बढ़ा रहा है। उसावां ब्लॉक के कदमनगला गांव को अपनी धारा में समेटने के बाद अब गंगा का रुख पड़ोसी गांव रैपुरा की ओर हो गया है। सिठौली खाम ग्राम पंचायत के रैपुरा में नदी तेजी से कटान कर रही है और धारा अब आबादी से महज 20 मीटर दूर रह गई है। कटान की रफ्तार को देखते हुए ग्रामीण दिन-रात गंगा किनारे निगरानी कर रहे हैं। ग्रामीणों को डर है कि अगर इसी तरह कटान जारी रहा तो पहले कृषि भूमि और फिर उनके घर भी नदी की धारा में समा सकते हैं। कदमनगला में हुई तबाही को अपनी आंखों से देखने वाले ग्रामीण अब रैपुरा को लेकर चिंतित हैं। रविवार को कछला में गंगा का जलस्तर 162.15 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 162.40 मीटर से 25 सेंटीमीटर नीचे है। जलस्तर खतरे के निशान से नीचे होने के बावजूद तेज बहाव के कारण कटान का खतरा बना हुआ है। वहीं, ऊपरी बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। धारा से गांव की दूरी सिर्फ 20 मीटर बची सिठौली खाम ग्राम पंचायत के रैपुरा गांव के सामने गंगा तेजी से जमीन काट रही है। नदी की धारा अब आबादी वाले हिस्से से करीब 20 मीटर दूर रह गई है। ग्रामीणों के मुताबिक कटान इसी तरह जारी रहा तो आने वाले दिनों में गांव के घरों तक खतरा पहुंच सकता है। ग्राम प्रधान राकेश कश्यप ने बताया कि कटान लगातार जारी है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते कटानरोधी कार्य नहीं कराया गया तो गांव के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। कदमनगला की तबाही से सहमे ग्रामीण ग्रामीणों का कहना है कि कदमनगला गांव में गंगा के कटान ने भारी तबाही मचाई है। अब उसी तरह का खतरा रैपुरा पर मंडरा रहा है। ग्रामीणों को आशंका है कि नदी की धारा पहले खेतों को काटेगी और इसके बाद आबादी की ओर बढ़ सकती है। ग्रामीण दिन-रात नदी के किनारे नजर रख रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मौके पर तत्काल कटानरोधी उपाय शुरू कराने और गांव को बचाने के लिए ठोस इंतजाम करने की मांग की है। खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर नीचे जलस्तर रविवार को कछला में गंगा का जलस्तर 162.15 मीटर रिकॉर्ड किया गया। खतरे का निशान 162.40 मीटर है। यानी नदी खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। हालांकि जलस्तर अभी खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन तेज धारा के कारण रैपुरा में कटान का खतरा लगातार बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल जलस्तर कम होना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि नदी का बहाव सीधे गांव के किनारे की जमीन को काट रहा है। ऊपरी बैराजों से छोड़ा गया पानी, बढ़ी चिंता शनिवार रात ऊपरी बैराजों से गंगा में पानी छोड़ा गया। नरौरा बैराज से 71,051 क्यूसेक, बिजनौर बैराज से 49,005 क्यूसेक और हरिद्वार से 63,715 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी दी गई है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह पानी रविवार रात तक क्षेत्र में पहुंचने की आशंका है। ऐसे में यदि नदी का बहाव बढ़ता है तो रैपुरा में कटान और तेज हो सकता है। कदमनगला के बाद अब रैपुरा के ग्रामीणों की निगाहें गंगा की धारा पर टिकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते कटान को रोकने के उपाय नहीं किए गए तो नदी कुछ ही दिनों में आबादी वाले क्षेत्र तक पहुंच सकती है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल मौके का निरीक्षण कर कटानरोधी कार्य शुरू कराने की मांग की है।
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