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    चंडीगढ़ की 1980 से बंद VIP रोड आज फिर खुला:PM मोदी का काफिला गुजरा; पंजाब सरकार ने SC जाकर आम लोगों की एंट्री बंद कराई

    15 hours ago

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    चंडीगढ़ में एक ऐसी रोड, जहां आम लोगों की एंट्री नहीं है। पिछले 45 साल से यह रास्ता बैरिकेड के पीछे बंद है। हाईकोर्ट के आदेश पर भी ये रोड नहीं खुली। हालांकि जैसे ही प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या कोई अन्य VIP शहर में आता है, बैरिकेड हट जाते हैं। VIP काफिला बड़े आराम से गुजरता है। PM नरेंद्र मोदी के दौरे के चलते आज (17 जुलाई) नयागांव-चंडीगढ़ बैरियर के पास स्थित 500 मीटर लंबा VIP रोड एक बार फिर खोला गया, जहां से उनका काफिला गुजरा। बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस सड़क में ऐसा क्या है कि हाईकोर्ट इसे खोलना चाहता है, पंजाब सरकार इसका विरोध करती है और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। आखिर कौन-सी है यह सड़क? महज 500 मीटर लंबी यह रोड नयागांव बैरियर से शुरू होकर पंजाब के मुख्यमंत्री आवास, हरियाणा मुख्यमंत्री आवास, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, पंजाब एवं हरियाणा सिविल सचिवालय, सुखना लेक और पंजाब राजभवन तक जाता है। राजेंद्र पार्क हेलीपैड से पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC) और राजभवन पहुंचने का यह सबसे छोटा और सबसे सुरक्षित VIP कॉरिडोर माना जाता है। 1980 में ऐसा क्या हुआ कि सड़क बंद करनी पड़ी? 1980 में पंजाब में आतंकवाद के दौर में तत्कालीन मुख्यमंत्री की सुरक्षा को देखते हुए इस सड़क को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया। इसके बाद यहां सामान्य ट्रैफिक पूरी तरह रोक दिया गया। तभी से यह मार्ग केवल सुरक्षा एजेंसियों और VVIP मूवमेंट के लिए इस्तेमाल होता रहा है। फिर लोग इसे खुलवाने पर क्यों अड़े हैं? इस सड़क के बंद होने का असर सिर्फ 500 मीटर तक सीमित नहीं है। नयागांव समेत करीब 25 गांवों के हजारों लोगों, वकीलों, कर्मचारियों और छात्रों को हाईकोर्ट, सचिवालय और सुखना लेक पहुंचने के लिए सेक्टर-3, 4 और 9 से लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। अगर यह सड़क खुल जाए तो हजारों लोगों का रोज का सफर छोटा हो जाएगा। टाइम और पेट्रोल-डीजल, दोनों की बचत होगी। शहर के कई बड़े चौराहों पर ट्रैफिक का दबाव घटेगा। वहीं हाईकोर्ट और सचिवालय तक सीधी पहुंच मिल जाएगी। कोर्ट में मामला कैसे पहुंचा, क्या आदेश आया? इस सड़क को खोलने की मांग नई नहीं है। 2014 में एडवोकेट रंजन लखनपाल ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा कि आतंकवाद का दौर खत्म हो चुका है, इसलिए सड़क खोल दी जानी चाहिए। करीब 10 साल तक चली सुनवाई के बाद 1 मई 2024 को हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को इस सड़क को ट्रायल आधार पर खोलने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि वर्किंग डेज में सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक लोगों को यहां से गुजरने दिया जाए और चंडीगढ़ पुलिस ट्रैफिक प्लान तैयार करे। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी माना कि सड़क बंद रहने से हजारों लोगों को रोजाना बेवजह लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। अदालत ने मुख्यमंत्री आवास और सड़क के बीच मौजूद ग्रीन बफर का भी जिक्र किया था। फिर पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंची? हाईकोर्ट के आदेश का पंजाब सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन ने कड़ा विरोध किया। सरकार का कहना था कि मुख्यमंत्री आवास के सामने आम ट्रैफिक शुरू करना सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा होगा। अदालत में यह दलील भी दी गई कि सुरक्षा एजेंसियों को हर बार सफल होना पड़ता है, जबकि आतंकियों को केवल एक बार सफल होना होता है। इसके बाद पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची और 3 मई 2024 को हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लग गई। तब से यह सड़क फिर आम लोगों के लिए बंद है। PM मोदी के लिए बार-बार यही सड़क क्यों चुनी जाती है? यह पहली बार नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस रोड से गुजरेंगे। इससे पहले भी 3 दिसंबर 2024 को चंडीगढ़ आए थे, तब भी उनके काफिले ने इसी रोड का इस्तेमाल किया था। सुरक्षा एजेंसियां हर दौरे में कई रूट का आकलन करती हैं, लेकिन आखिरकार इसी रोड को प्राथमिकता देती हैं। वजह सिर्फ इसकी लंबाई नहीं, बल्कि इसका पूरा सुरक्षा कॉरिडोर है। इसके पीछे की 5 बड़ी वजहें हैं…. सबसे बड़ा सवाल... क्या कभी आम लोगों के लिए खुलेगी? फिलहाल इसका जवाब नहीं है। मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। जब तक अदालत या सरकार कोई नया फैसला नहीं लेती, यह सड़क आम लोगों के लिए बंद रहेगी। हां, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या अन्य VVIP मूवमेंट के दौरान सुरक्षा जरूरतों के मुताबिक इसे अस्थायी रूप से खोला जाता रहेगा।
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