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    कलकत्ता High Court से Abhishek Banerjee को बड़ी राहत, Signature Forgery Case में बढ़ी गिरफ्तारी से सुरक्षा

    3 hours from now

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    तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी को MLA के जाली हस्ताक्षर वाले मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने गिरफ्तारी समेत किसी भी सख्त कार्रवाई से उन्हें मिली सुरक्षा को एक महीने और बढ़ा दिया है। जस्टिस कौशिक चंदा ने पहले दी गई अंतरिम सुरक्षा को जारी रखा और साथ ही निर्देश दिया कि इस मामले की सुनवाई के लिए इसे अगले हफ़्ते फिर से लिस्ट किया जाए। इस आदेश से बनर्जी को सुरक्षा मिलती रहेगी, जबकि CID उन आरोपों की जांच जारी रखेगी जिनमें कहा गया है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति के लिए जमा किए गए दस्तावेजों पर पार्टी विधायकों के जाली हस्ताक्षर किए गए थे। यह नया आदेश उस राहत को आगे बढ़ाता है जो सबसे पहले 11 जून को दी गई थी, जब हाई कोर्ट ने बनर्जी को भवानी भवन स्थित CID मुख्यालय में पेश होने और जांचकर्ताओं का सहयोग करने का निर्देश दिया था। इसके बाद बनर्जी एजेंसी के सामने पेश हुए और उनसे लगभग छह घंटे तक पूछताछ की गई। अंतरिम सुरक्षा बढ़ाए जाने के कारण, उन्हें सख़्त कार्रवाई से सुरक्षा मिलती रहेगी, साथ ही जांच में सहयोग करना भी उनकी ज़िम्मेदारी होगी।इसे भी पढ़ें: Bankipur By-Election: BJP उम्मीदवार Abhishek Sinha ने वापस लिया नामांकन, सियासी गलियारों में हलचलविधायकों के जाली हस्ताक्षर का मामलायह मामला उन आरोपों से जुड़ा है जिनमें कहा गया है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद, विपक्ष के अहम पदाधिकारियों की नियुक्ति के लिए विधानसभा स्पीकर रथिंद्र बोस को सौंपे गए एक प्रस्ताव पर कई तृणमूल कांग्रेस विधायकों के हस्ताक्षर जाली तरीके से किए गए या गलत तरीके से हासिल किए गए। इस प्रस्ताव में शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, असीमा पात्रा और नैना बंद्योपाध्याय को उप-नेता और फिरहाद हकीम को मुख्य व्हिप बनाने का सुझाव दिया गया था। विवाद तब शुरू हुआ जब TMC से निकाले गए विधायकों रिताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा ने आरोप लगाया कि प्रस्ताव को मंज़ूरी देने के लिए 6 मई को विधायकों की कोई बैठक नहीं हुई थी। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अटेंडेंस रजिस्टर पर सिर्फ़ 19 मई को हस्ताक्षर किए थे और पार्टी नेताओं पर रिकॉर्ड में हेरफेर करने का आरोप लगाया, साथ ही कई हस्ताक्षरों की प्रमाणिकता पर भी सवाल उठाए।इसे भी पढ़ें: ममता बनर्जी को तगड़ा झटका, Madan Mitra ने छोड़ा साथ, बागी खेमे में शामिलबाद में CID ने धोखाधड़ी, जालसाज़ी और आपराधिक साज़िश के आरोपों की जांच अपने हाथ में ले ली। जांचकर्ताओं ने मूल प्रस्ताव पुस्तिका और अटेंडेंस रजिस्टर के लिए TMC कार्यालयों की तलाशी ली और विवादित दस्तावेज़ों तथा विधानसभा अध्यक्ष को उनके सौंपे जाने के बारे में अभिषेक बनर्जी से पूछताछ की। यह जांच TMC की करारी चुनावी हार और उसके बाद हुई अंदरूनी बगावत के बीच हो रही है।
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