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    West Bengal में Voter List से नाम हटने पर भी नहीं रुकनी चाहिए सुविधाएं, Supreme Court ने ECI को भेजा नोटिस

    3 hours from now

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    सुप्रीम कोर्ट ने भारत के चुनाव आयोग (ECI), पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और राज्य सरकार से 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) प्रक्रिया के तहत अपील की प्रक्रिया से जुड़ी चिंताओं पर जवाब मांगा। इन चिंताओं में लगभग 34 लाख लंबित अपीलों का भविष्य और उन लोगों को कल्याणकारी लाभ न मिलने का आरोप शामिल है जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की SIR कमेटी के चेयरमैन प्रसेनजीत बोस की ओर से दायर जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किए। याचिका में ट्रिब्यूनल के सामने अपील की प्रक्रिया को बेहतर बनाने, ज़रूरी डेटा का खुलासा करने, ट्रिब्यूनल द्वारा अपनाई जा रही स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को पब्लिश करने और अपीलों के निपटारे के लिए एक समय-सीमा वाला सिस्टम बनाने के निर्देश देने की मांग की गई है।इसे भी पढ़ें: कर्तव्य नहीं तो Doctor कहलाने का हक नहीं, 4 साल की Rape Victim के इलाज में लापरवाही पर Supreme Court सख्त34 लाख अपीलें पेंडिंग, सिर्फ़ 38,000 पर सुनवाईयाचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने कोर्ट को बताया कि अपीलेट ट्रिब्यूनल के सामने लगभग 34 लाख अपीलें पेंडिंग हैं, जबकि अब तक सिर्फ़ 38,000 पर ही सुनवाई हुई है। उन्होंने तर्क दिया कि इन आंकड़ों को देखते हुए कोर्ट के लिए यह ज़रूरी हो गया है कि वह अपील की प्रक्रिया को और अधिक कुशल बनाने के लिए निर्देश जारी करे। शंकरनारायणन ने यह भी कहा कि ट्रिब्यूनल में सुनी गई लगभग 70 प्रतिशत अपीलें मंजूर कर ली गई थीं, इसलिए मामलों के निपटारे में तेज़ी लाने के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ों की एक न्यूनतम सीमा तय करना ज़रूरी है। उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले SIR अपीलों से निपटने वाले ट्रिब्यूनल के लिए एक SOP बनाने का निर्देश दिया था, लेकिन उस SOP को सार्वजनिक नहीं किया गया।इसे भी पढ़ें: कलकत्ता High Court से Abhishek Banerjee को बड़ी राहत, Signature Forgery Case में बढ़ी गिरफ्तारी से सुरक्षाउन्होंने कहा 40 लाख से ज़्यादा अपीलें लंबित होने के कारण गंभीर चिंताएँ हैं। वकील ने ट्रिब्यूनल के कामकाज को लेकर व्यावहारिक चिंताएँ भी जताईं और कहा कि 19 ट्रिब्यूनल हैं, जिनमें से दो जजों ने इस्तीफ़ा दे दिया है। उन्होंने कहा कि कोई औपचारिक वेबसाइट नहीं है और ट्रिब्यूनल के आदेश अपलोड नहीं किए जा रहे हैं, जिससे गड़बड़ियाँ और देरी हो रही है। शंकरनारायणन ने कहा जिन लोगों के मामले लंबित हैं, वे दूसरे मामलों का हवाला मिसाल के तौर पर नहीं दे सकते। हमें नहीं पता कि वे किस SOP का पालन कर रहे हैं। चीफ़ जस्टिस ने बताया कि ट्रिब्यूनल कलकत्ता हाई कोर्ट की देखरेख में हैं, हालाँकि वे उसके प्रशासनिक नियंत्रण में नहीं हैं, और हाई कोर्ट उनसे मदद कर रहा है।
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