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    CSJMU में रोबोटिक्स, ड्रोन पर 3-दिवसीय वर्कशॉप:छात्रों ने खुद की कोडिंग और लाइव असेंबलिंग का अभ्यास किया

    2 hours ago

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    तकनीक की तेजी से बदलती दुनिया में अब रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन टेक्नोलॉजी भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत बनती जा रही है। इसी दिशा में छत्रपति शाहू जी महाराज यूनिवर्सिटी (CSJMU) के छात्रों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के लिए स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के ईसीई, मैकेनिकल और सीएसई विभागों ने संयुक्त रूप से तीन दिवसीय ‘हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम: रोबोटिक्स एवं ड्रोन टेक्नोलॉजी’ का आयोजन किया। यह कार्यशाला 19 मई से 21 मई तक यूनिवर्सिटी की रोबोटिक्स एंड ड्रोन लैब में आयोजित हुई। कार्यक्रम में ‘सिमहैटल - पायनियरिंग ड्रोन टेक्नोलॉजी एंड एआई सॉल्यूशंस’ के विशेषज्ञों ने छात्रों को आधुनिक तकनीकों की बारीकियां सिखाईं। विशेषज्ञों ने कहा कि रोबोटिक्स और ड्रोन टेक्नोलॉजी केवल रिसर्च तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आने वाले समय में रोजगार, इनोवेशन और स्टार्टअप के बड़े अवसर भी तैयार करेंगी। वर्कशॉप को थ्योरी और प्रैक्टिकल दो सत्रों में बांटा गया, ताकि छात्र तकनीक को केवल समझें ही नहीं बल्कि उसे खुद करके भी सीख सकें। छात्रों ने खुद किया रोबोटिक्स और ड्रोन का प्रैक्टिकल रोबोटिक्स सत्र में छात्रों को ऑटोनॉमस सिस्टम, कंट्रोलर और नेविगेशन तकनीक के बारे में जानकारी दी गई। छात्रों ने रोबोटिक्स किट्स पर लाइव कोडिंग और असेंबलिंग का अभ्यास किया। वहीं ड्रोन टेक्नोलॉजी सत्र में ड्रोन के मैकेनिज्म, एयरोडायनामिक्स और फ्लाइंग नियमों को विस्तार से समझाया गया। छात्रों ने विशेषज्ञों की निगरानी में ड्रोन असेंबली और लाइव सिमुलेशन का अनुभव भी प्राप्त किया। ‘मेक इन इंडिया’ और इंटर-डिसिप्लिनरी प्रोजेक्ट्स पर जोर UIET के निदेशक डॉ. आलोक कुमार ने कहा कि आज के समय में केवल सैद्धांतिक ज्ञान काफी नहीं है। छात्रों को लाइव असेंबलिंग, कैलिब्रेशन और रियल टाइम कोडिंग का अनुभव होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल और कंप्यूटर साइंस के छात्रों को एक साझा मंच देकर इंटर-डिसिप्लिनरी प्रोजेक्ट्स के लिए तैयार करना है। छात्रों को कृषि, रक्षा, मेडिकल और सर्विलांस क्षेत्रों में ड्रोन और ऑटोनॉमस रोबोट्स के उपयोग पर रिसर्च और स्टार्टअप के लिए प्रेरित किया गया। इन लोगों ने निभाई अहम भूमिका कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. अजीत कुमार श्रीवास्तव, डॉ. गौरव पाण्डेय और कार्यक्रम समन्वयक डॉ. राजीव कुमार शाक्य ने प्रशिक्षकों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। कार्यशाला को सफल बनाने में डॉ. अजय तिवारी, डॉ. शैलजा अवस्थी, ओमपाल, ई. पारुल अवस्थी, ई. सोमेश कुमार मल्होत्रा, ई. आनंद गुप्ता, ई. अतुल कुमार अग्निहोत्री और राजेश कुमार वर्मा का विशेष सहयोग रहा। वहीं विशाल सिंह, दिव्यराज तोमर, सुधीर तिवारी, मनीष यादव समेत कई छात्र-छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी की।
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