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    डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 58 लाख ठगे:फर्जी CBI-ED अफसर बनकर भेजा गिरफ्तारी वारंट, छह पर गैंगस्टर एक्ट

    8 hours ago

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    पीलीभीत में लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर लाखों रुपये ठगने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह पर पुलिस ने शिकंजा कसा है। साइबर क्राइम पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत छह आरोपियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम 1986 की धारा 3(1) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। आरोपी सीबीआई, ईडी, सीबीसीआईडी और मुंबई क्राइम ब्रांच के फर्जी अधिकारी बनकर लोगों को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते थे। गिरोह के खिलाफ कार्रवाई एक पीड़ित से 57 लाख 89 हजार 776 रुपये की ठगी के मामले की जांच के बाद हुई। पुलिस की विवेचना में सामने आया कि दिल्ली-एनसीआर से संचालित यह नेटवर्क सुनियोजित तरीके से लोगों को अपना शिकार बनाता था। पुलिस ने सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ उनके कब्जे से मोबाइल फोन, फर्जी आधार कार्ड, बैंक दस्तावेज और नकदी भी बरामद की थी। सुप्रीम कोर्ट और क्राइम ब्रांच का अफसर बनकर डराया मामला पीलीभीत के जेल लाइन निवासी जगमोहन सैनी की शिकायत से सामने आया। आरोपियों ने 9 से 22 अगस्त 2024 के बीच उन्हें व्हाट्सएप पर वीडियो और ऑडियो कॉल कीं। कॉल करने वालों ने खुद को सुप्रीम कोर्ट, सीबीसीआईडी और मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। ठगों ने पीड़ित को बताया कि वह गंभीर कानूनी मामले में फंस गए हैं और उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया जा सकता है। इसके बाद फर्जी गिरफ्तारी वारंट भेजकर डराया गया। लगातार दबाव और कार्रवाई के भय में जगमोहन ने आरोपियों के बताए अलग-अलग बैंक खातों में 57 लाख 89 हजार 776 रुपये ट्रांसफर कर दिए। जांच में खुला दिल्ली-नोएडा तक फैला नेटवर्क ठगी की शिकायत के बाद 21 दिसंबर 2024 को पीलीभीत साइबर क्राइम थाने में मुकदमा अपराध संख्या 19/2024 दर्ज किया गया। शुरुआत में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत कार्रवाई हुई। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को गिरोह के अंतरराज्यीय नेटवर्क का पता चला। पुलिस के मुताबिक ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर निवासी मनीष कुमार इस गिरोह का सरगना और मुख्य संचालक था। उसके साथ दिल्ली के तिमारपुर निवासी विकास वर्मा, नोएडा एक्सटेंशन निवासी राजेंद्र शर्मा उर्फ राजन, द्वारका निवासी प्रशांत चौहान, नोएडा सेक्टर 126 निवासी संजय बोबी देशवाल और ओखला साउथ दिल्ली निवासी फैसल सिद्दीकी भी गिरोह में शामिल थे। छह आरोपी गिरफ्तार, मोबाइल से लेकर फर्जी आधार तक मिले पुलिस टीम ने निरीक्षक खुर्शीद अहमद के नेतृत्व में पांच आरोपियों को 5 सितंबर 2025 को गिरफ्तार किया। वहीं फैसल सिद्दीकी को निरीक्षक नरेश कुमार त्यागी की टीम ने 24 सितंबर 2025 को पकड़ा। आरोपियों के पास से 11 मोबाइल फोन, 4 लाख रुपये नकद, 13 फर्जी आधार कार्ड, चार चेकबुक, दो पासबुक, तीन एटीएम कार्ड और तीन सिम कार्ड बरामद हुए। विवेचना के दौरान पुलिस ने मुकदमे में बीएनएस की धारा 337, 338, 308(2) और 319(2) भी बढ़ाई। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद 15 अक्टूबर 2025 को न्यायालय में आरोप पत्र संख्या 02/2025 दाखिल किया गया। यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। गैंग चार्ट मंजूर होते ही छह पर गैंगस्टर एक्ट का केस पुलिस के मुताबिक गिरोह के सदस्य संगठित तरीके से साइबर ठगी करते थे और उससे मिली रकम से अपनी जरूरतें पूरी करते थे। इनके डर की वजह से लोग शिकायत या गवाही करने से भी बचते थे। इसी वजह से पुलिस ने अब इनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की संयुक्त बैठक में 24 जुलाई 2026 को गिरोह का गैंग चार्ट अनुमोदित किया गया था। इसके बाद प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र राम भारती की सूचना पर छहों आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में नया मुकदमा दर्ज किया गया। बुधवार रात पुलिस ने कार्रवाई की जानकारी दी। पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य संगठित साइबर अपराध के नेटवर्क को तोड़ना और आरोपियों की अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाना है।
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