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    जौनपुर सपा जिलाध्यक्ष-विधायक आमने-सामने:पार्टी से अलग कांशीराम जयंती मनाने पर तूफानी सरोज-नीरज पहलवान की अखिलेश से शिकायत

    2 hours ago

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    कांशीराम की 92वीं जयंती को पीडीए दिवस के रूप में मनाने वाली सपा में आंतरिक कलह जौनपुर में एक बार फिर सतह पर आ गया। जौनपुर जिले के सपा जिलाध्यक्ष राकेश मौर्य ने सीधे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को रिपोर्ट भेजकर केराकत विधायक तूफानी सरोज और विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष नीरज यादव पहलवान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राकेश मौर्य ने 16 मार्च 2026 को पत्रांक SPJ/028 के तहत लिखी दो पेज की रिपोर्ट में बताया है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के साफ निर्देश पर जनपद मुख्यालय पर एक होटल में भव्य समारोह आयोजित किया गया था। इसमें विधायक लकी यादव, डॉ. रागिनी सोनकर, पंकज पटेल, पूर्व मंत्री शैलेंद्र यादव ललाई, श्रीराम यादव सहित सैकड़ों नेता और हजारों की संख्या में पीडीए समाज के लोग शामिल हुए थे। कार्यक्रम बेहद शानदार और सफल रहा था। राकेश मौर्य ने रिपोर्ट में लिखा है कि आपके निर्देश के विपरीत केराकत विधायक तूफानी सरोज और उसी विधानसभा क्षेत्र के अध्यक्ष नीरज यादव पहलवान ने विधानसभा क्षेत्र कार्यालय पर अलग कार्यक्रम आयोजित किया। वहां कुछ लोगों को लेकर स्वतंत्र आयोजन किया गया, जिससे पार्टी की छवि धूमिल हुई और गुटबाजी का गलत संदेश गया। रिपोर्ट में इसे “घोर अनुशासनहीनता” करार देते हुए अखिलेश यादव से तत्काल संज्ञान लेने और कार्रवाई करने की मांग की गई है। क्या है पूरा मामला? अखिलेश यादव ने पूरे प्रदेश में जिला मुख्यालय पर एकीकृत रूप से कांशीराम जयंती को पीडीए दिवस के रूप में मनाने का निर्देश दिया था। जिलाध्यक्ष ने मुख्य कार्यक्रम जनपद मुख्यालय पर रखा, लेकिन केराकत से दोनों नेताओं ने अपनी अलग “मंडली” के साथ स्वतंत्र आयोजन किया। राकेश मौर्य ने इसे पार्टी एकता पर हमला बताते हुए रिपोर्ट में लिखा – “यह पार्टी के निर्देशों की अवहेलना है।” अब अखिलेश का लेना है अनुशासनहीनता पर फैसला जौनपुर जिलाध्यक्ष की दो पेज की रिपोर्ट सीधे लखनऊ पहुंच चुकी है। सपा में अनुशासन भंग करने पर पार्टी हमेशा सख्त रही है। तूफानी सरोज और नीरज यादव पहलवान पर अखिलेश के एक्शन का इंतजार किया जा रहा है। जौनपुर सपा में यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी PDA फॉर्मूले को लेकर कांशीराम जयंती को बड़ा मौका बता रही थी। लेकिन एक जिले में ही यह खुला विद्रोह अब सपा की आंतरिक एकता पर सवाल खड़ा कर रहा है। पार्टी में गुटबाजी पर क्या बोले केराकत विधायक दैनिक भास्कर से बातचीत में केराकत विधायक तूफानी सरोज ने कहा कि इस तरह के आयोजन को लेकर प्रदेश कार्यालय से लेटर आता है। कांशीराम जयंती मनाने की हमारी इच्छा विधानसभा स्तर पर थी। वहां क्षेत्र के काफी लोग शामिल भी हुए। सभी को जिला मुख्यालय पर ले जाना संभव भी नहीं होता। काफी अच्छा आयोजन हुआ। अब जिलाध्यक्ष इसे लेकर शिकायत कर रहे हैं तो करें, हमें इस पर कोई टिप्पणी नहीं करनी है। वहीं, इस मामले में जिलाध्यक्ष राकेश मौर्य ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि पार्टी लाइन से अलग कुछ होने पर जिलाध्यक्ष के नाते एक रिपोर्ट देनी होती है। मैंने वही रिपोर्ट प्रेषित की है। यह किसी की शिकायत नहीं है। प्रिया सरोज के पिता हैं केराकत विधायक तूफानी सरोज केराकत विधायक तूफानी सरोज क्रिकेटर रिंकू सिंह की मंगेतर मछलीशहर से सांसद प्रिया सरोज के पिता हैं। दलित मुद्दों पर वे काफी मुखर रहते हैं। तूफानी सरोज की गिनती सपा के कद्दावर नेताओं में होती है। वे तीन बार के सांसद भी रह चुके हैं। 2014 में वे मछलीशहर संसदीय सीट से हार गए थे। इसके बाद वे 2022 में केराकत विधानसभा से उतरे और विधायक चुने गए। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने मछलीशहर से उनकी बेटी प्रिया सरोज को उतारा था, जो जीतकर संसद पहुंचने में सफल रहीं। ------------------- ये खबर भी पढ़ें- मायावतीं बोली- सपा-कांग्रेस के दलित चमचे चुप रहें, बेहतर होगा:चुनाव नजदीक आया तो कांशीराम जयंती मनाने लगे यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस की दलित राजनीति पर बसपा प्रमुख मायावती भड़क उठी हैं। मंगलवार को तल्ख अंदाज में बसपा प्रमुख ने कहा, सपा-कांग्रेस के दलित चमचे चुप ही रहें तो बेहतर होगा। सपा-कांग्रेस हमेशा से दलित विरोधी पार्टियां रही हैं। लेकिन इस बार यूपी विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही इन्हें दलित वोटों की चिंता सताने लगी। यही कारण है कि ये दल अचानक कांशीराम जयंती मनाने लगे। सपा-कांग्रेस की असलियत जाननी हो तो कांशीराम की लिखित 'चमचा युग' किताब पढ़नी चाहिए। पढ़ें पूरी खबर…
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