Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    कानपुर के जेके मंदिर में सजा राधा-कृष्ण का अलौकिक दरबार:गुलाबी श्रृंगार में मोहित हुए भक्त, 'राधे-राधे' से गूंजा परिसर

    3 hours ago

    1

    0

    कानपुर के सुप्रसिद्ध जेके मंदिर में आज भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी का एक बेहद अलौकिक और दिव्य रूप देखने को मिला। मंदिर में दोनों विग्रहों का विशेष रूप से भव्य श्रृंगार किया गया, जिसे देखने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस खास श्रृंगार के बाद भगवान की महाआरती की गई, जिससे पूरा मंदिर परिसर 'राधे-राधे' के जयकारों से गूंज उठा। गुलाबी लहंगे और सोने के मुकुट में सजीं राधा रानी आज के विशेष श्रृंगार में श्री राधा रानी का रूप देखते ही बन रहा था। उन्होंने अत्यंत सुंदर गुलाबी रंग का लहंगा और चोली धारण की थी। इस पोशाक पर सुनहरे रंग की बारीक बूटियों का काम और गोटा-पट्टी का खूबसूरत बॉर्डर बना हुआ था। राधा रानी के शीश पर एक भव्य और चमकीला सोने का मुकुट सुशोभित था, और कानों में पहने गए विशेष स्वर्ण कर्णफूल उनके चेहरे की चमक को और बढ़ा रहे थे। गले में कई परतों वाले लंबे मोतियों और सोने के हार पहनाए गए थे, जबकि हाथों में बाजूबंद और कंगन सजे थे। इसके साथ ही, उनके गले से नीचे तक पीले और नारंगी गेंदे के फूलों की एक लंबी वरमाला सुशोभित हो रही थी। मैचिंग धोती पहने, मुरली बजाते दिखे ठाकुर जी राधा रानी के रूप से मेल खाती हुई पोशाक में ठाकुर जी भी नजर आए। भगवान श्री कृष्ण ने गुलाबी रंग की धोती और राजस्थानी शैली का विशेष पटका पहना हुआ था, जिसके पंख जैसे कोने बाहर की ओर फैले थे। उनके शीश पर गुलाबी और सफेद रंग की एक भारी पगड़ी सजी थी, जिसके ठीक ऊपर मोर पंख लगा हुआ था। दोनों हाथों में सुनहरी बांसुरी थामे ठाकुर जी अपनी प्रसिद्ध त्रिभंग मुद्रा में विराजमान थे। उनके गले में भी मोतियों और गेंदे के फूलों की लंबी मालाएं महक रही थीं। चांदी के सिंहासन पर विराजे भगवान इस पूरे दरबार को बहुत ही खूबसूरती से सजाया गया था। भगवान के पीछे लाल और सुनहरे रंग के काम वाला एक पर्दा लगा था, जो पृष्ठभूमि को भव्य बना रहा था। दोनों विग्रह चांदी के नक्काशीदार खंभों वाले एक आलीशान सिंहासन के अंदर, कमल के आकार के चांदी के आसनों पर विराजमान थे। मुख्य मूर्तियों के ठीक आगे नीचे की तरफ छोटे विग्रह और लड्डू गोपाल भी सुंदर पोशाक में नजर आ रहे थे। वहीं, सबसे आगे की तरफ रखीं चांदी की छोटी-छोटी गौमाता पूरे दृश्य को साक्षात द्वापर युग जैसा दिव्य और अलौकिक बना रही थीं। जिसने भी आज जेके मंदिर में प्रभु के इस रूप को देखा, वो देखता ही रह गया।
    Click here to Read more
    Prev Article
    रामपुर में सुहागरात से पहले खुला दुल्हन का राज:शादीशुदा और 4 बच्चों की मां निकली, कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा
    Next Article
    कार नहीं मिली तो पति ने कर ली दूसरी शादी:फतेहपुर में पहली पत्नी ने दर्ज कराई FIR, बोली- 6 महीने पर मारपीट कर घर से निकाला था

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment