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    लखनऊ की भाजपा मेयर के सभी अधिकार छिने:5 महीने से सपा पार्षद को शपथ नहीं दिलाई थी, हाईकोर्ट ने दिया आदेश

    6 hours ago

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    समाजवादी पार्टी के पार्षद को शपथ नहीं दिलाने पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने गुरुवार को लखनऊ की भाजपा मेयर सुषमा खर्कवाल के सभी वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार फ्रीज कर दिए। इसके बाद अब मेयर न तो अपने फंड से कोई खर्च कर सकती हैं और न ही किसी कर्मचारी पर कोई कार्रवाई कर सकती हैं। जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस कमर हसन रिजवी की पीठ ने आज साफ कहा कि जब तक सपा पार्षद को शपथ नहीं दिलाई जाती, तब तक मेयर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार फ्रीज रहेंगे। उनका सारा काम डीएम और नगर आयुक्त देखेंगे। मामला लखनऊ के वार्ड संख्या-73 (फैजुल्लागंज) का है। सेशन कोर्ट ने 19 दिसंबर, 2025 को समाजवादी पार्टी के ललित किशोर तिवारी को पार्षद पद पर निर्वाचित घोषित किया था। भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला का निर्वाचन रद्द कर दिया था। इसके 5 महीने बीतने के बाद भी अब तक उन्हें शपथ नहीं दिलाई गई। अब पूरा मामला विस्तार से… लखनऊ नगरीय निकाय चुनाव-2023 के दौरान भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला उर्फ टिंकू शुक्ला और सपा प्रत्याशी ललित तिवारी के बीच सीधा मुकाबला हुआ था। मतगणना में प्रदीप कुमार शुक्ला को 4,972 और ललित तिवारी को 3,298 वोट मिले थे। इस आधार पर प्रदीप कुमार शुक्ला को निर्वाचित घोषित कर दिया गया था। इसके बाद सपा प्रत्याशी ललित तिवारी ने 13 मई, 2023 को अपर जिला जज कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी थी। इसमें आरोप लगाया था कि भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला ने नामांकन पत्र दाखिल करते समय निर्वाचन प्रपत्रों में कुछ जरूरी जानकारियां नहीं दी थीं। ये जानकारियां देना कानूनन जरूरी था। याचिका में यह भी कहा गया था कि नामांकन प्रक्रिया में की गई चूक चुनावी नियमों का उल्लंघन है। इसे कदाचार की श्रेणी में माना जाना चाहिए। इसी आधार पर प्रदीप कुमार शुक्ला के निर्वाचन को चुनौती दी गई थी। साथ ही चुनाव परिणाम निरस्त करने की मांग की गई थी। 5 महीने पहले रद्द हुआ था निर्वाचन इस मामले में करीब ढाई साल तक सुनवाई चली। इस दौरान कोर्ट ने निर्वाचन के समय दाखिल एफिडेविट, शपथ पत्र और निर्वाचन फार्म की समीक्षा रिपोर्ट देखी। इसमें कोर्ट ने पाया था कि नामांकन के दौरान जरूरी जानकारी न देना गंभीर अनियमितता है। इससे चुनाव की वैधता प्रभावित होती है। इसी आधार पर कोर्ट ने 19 दिसंबर, 2025 को प्रदीप कुमार शुक्ला का निर्वाचन रद्द कर दिया था। साथ ही ललित तिवारी को वार्ड-73 से निर्वाचित घोषित कर दिया था। सपा पार्षद बोले- शपथ दिलाने में करते रहे टालमटोल पार्षद ललित किशोर ने बताया कि निर्वाचित होने के बावजूद उनको शपथ नहीं दिलाई गई। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। वहां उन्होंने बताया कि 19 दिसंबर, 2025 को उनको निर्वाचित घोषित किया था, लेकिन अब तक शपथ नहीं दिलाई गई है। जबकि, भाजपा पार्षद प्रदीप कुमार शुक्ला अभी भी पार्षद के रूप में काम कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि जिला मजिस्ट्रेट ने 23 जनवरी और 10 फरवरी, 2026 को लखनऊ के नगर आयुक्त को निर्वाचन न्यायाधिकरण के फैसले की जानकारी दी थी। उन्होंने धारा- 85 के तहत शपथ दिलाने की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश भी दिए थे। इसके अलावा राज्य सरकार ने भी 4 फरवरी, 2026 को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए थे। 12 मई को एक बार फिर हाईकोर्ट ने ललित तिवारी को एक सप्ताह में शपथ दिलाने का आदेश दिया था। इस पर भाजपा के प्रदीप कुमार शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसे कोर्ट ने रद्द किया था। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट ने लखनऊ मेयर, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर जवाब देने के आदेश दिए थे। ----------------------------- यह खबर भी पढ़िए… लखनऊ कोर्ट से भाजपा को झटका, सपा की जीत, झूठा हलफनामा देने पर प्रदीप शुक्ला की पार्षदी गई; सपा के ललित नए पार्षद बने लखनऊ कोर्ट ने भाजपा पार्षद को तगड़ा झटका दिया। हलफनामे में गलत जानकारी देने पर उनकी पार्षदी चली गई। कोर्ट ने कहा- शपथ पत्र में जरूरी कागजात नहीं देना, तथ्य छिपाना धांधली करना है। यहां पढ़ें पूरी खबर
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