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    ऑडिशन में बार-बार हुए रिजेक्ट, धुरंधर ने बदली किस्मत:नवीन कौशिक बोले- वक्त लगा पर मौका मिला, डोंगा बना करियर का टर्निंग पॉइंट

    2 hours ago

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    धुरंधर के पार्ट वन से अपनी अलग पहचान बनाने वाले एक्टर नवीन कौशिक अब फिल्म के दूसरे हिस्से को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में रिलीज हुए टीजर से लेकर अपने किरदार को मिले प्यार, इंडस्ट्री में सालों के संघर्ष, सेट पर बीते यादगार लम्हों और फिल्म को लेकर उठे विवादों तक नवीन ने हर मुद्दे पर खुलकर बात की। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि क्यों धुरंधर: द रिवेंज पहले से कहीं ज्यादा बड़ा, ज्यादा खतरनाक और ज्यादा इमोशनल होने वाला है, और कैसे यह फिल्म उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बनकर सामने आई है। सबसे पहले धुरंधर: द रिवेंज के टीजर की बात करते हैं। आप धुरंधर के पार्ट वन का अहम हिस्सा रहे हैं, ऐसे में टीजर देखकर आपका रिव्यू क्या रहा? मैं बहुत एक्साइटेड हूं, क्योंकि पार्ट टू में जबरदस्त एक्शन आने वाला है। बहुत सारे नए कैरेक्टर्स भी जुड़ने वाले हैं। पार्ट वन में लोगों के मन में कई सवाल छोड़े गए थे हमजा कौन है, कहां से आया है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि आर माधवन का किरदार कहता है कि हम ऐसे लोगों को चुनते हैं जिनकी जिंदगी में अब कुछ बचा नहीं है या तो जिन्हें उम्रकैद हो चुकी है या जो मरने के कगार पर हैं। ये सारे सवालों का जवाब पार्ट 2 में मिलेगा। मुझे बेहद दिलचस्पी है कि आगे क्या होने वाला है। टीजर में जो एक्शन सीक्वेंस दिखे हैं, वो पहले से कहीं ज्यादा बड़े, ज्यादा हिंसक और ज्यादा धमाकेदार लग रहे हैं। सोशल मीडिया पर कुछ फैंस टीजर से निराश भी दिखे। उन्हें लगा कि कुछ नया नहीं दिखाया गया। आप इसे कैसे देखते हैं? मेरे हिसाब से इसके तीन बड़े कारण हैं। पहला कि टीजर में जो सीन दिखाया गया है, वो असल में पार्ट वन के एंड में, क्रेडिट्स से पहले आता है। बहुत सारे लोग फिल्म खत्म होते ही उठकर निकल गए थे, उन्होंने वो प्री-क्रेडिट सीन देखा ही नहीं। अब वही सीन उनके लिए नया है। दूसरा कि टीजर में जो गाना है, वो नया है। रिलीज से पहले लोग पूछ रहे थे कि ये कौन सा गाना है, क्योंकि ट्रेलर वाला गाना ये नहीं है। तीसरा कि कुछ समय पहले ये अफवाहें थीं कि 19 मार्च की रिलीज डेट शिफ्ट हो सकती है, क्योंकि उसी दिन टॉक्सिक रिलीज हो रही है। मुझे लगता है टीजर का एक मकसद ये भी था बताना कि फिल्म 19 मार्च को ही रिलीज होगी। पार्ट 2 का ट्रेलर जल्द आएगा और वही लोगों को असली तस्वीर दिखाएगा। क्या आपको इस बात का मलाल है कि आप पार्ट टू का हिस्सा नहीं हैं? थोड़ा-सा तो है। मुझे खुद अंदाजा नहीं था कि पार्ट वन इतनी बड़ी हिट होगी और मेरे किरदार को इतना प्यार मिलेगा। शूटिंग के दौरान मुझे पता था कि ये कैरेक्टर यहीं खत्म हो जाएगा। जब पार्ट वन के दो हिस्सों में बनने की घोषणा हुई, तो ट्रेलर लॉन्च के वक्त मैंने आदित्य सर से मजाक में कहा था ‘सर, जिंदा कर दो, वापस ला दो।’ लेकिन सच्चाई ये है कि हर कहानी में हर किरदार की एक सीमा होती है। डोंगा का सफर पार्ट वन तक ही था। उसी एंडिंग की वजह से फिल्म ने लोगों पर गहरा असर छोड़ा। अच्छाई की जीत और बुराई का अंत हुआ। यही उम्मीद पार्ट टू के लिए जमीन तैयार करता है। फिर भी, थोड़ा-सा मलाल तो रहता ही है। धुरंधर से आप कैसे जुड़े? इस फिल्म के लिए आप किसे इसका सबसे बड़ा क्रेडिट देना चाहेंगे? इसका पूरा क्रेडिट मैं दिल से मुकेश छाबड़ा जी को देता हूं। वो मुझे दिल्ली थिएटर के दिनों से जानते हैं करीब 25 साल से। मुंबई में 16 सालों तक उन्होंने मेरे लिए कोई अच्छा रोल ढूंढने के लिए काफी कोशिश की, लेकिन मुझे ज्यादातर वही बॉस वाले रोल मिलते रहे। मैं बहुत फ्रस्ट्रेट हो गया था न आर्टिस्टिक सैटिस्फैक्शन, न फेम, न फाइनेंशियल संतुष्टि मिल रही थी। मैंने एक्टिंग तक छोड़ने का फैसला कर लिया था। तभी मुकेश जी का फोन आया। उन्होंने कहा कि एक फिल्म है और ये किरदार बिल्कुल अलग है। मैं तैयार नहीं था, लेकिन उन्होंने जोर देकर आदित्य धर सर से मिलने भेजा। आदित्य सर ने फिल्म और कैरेक्टर दोनों को इतनी डिटेल में समझाया कि मुझे लगा ये करना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर किरदार की अपनी कहानी और आर्क होगा और उन्होंने अपना वादा निभाया। फिल्म के सेट से कुछ ऐसे बीटीएस मोमेंट बताइए, जो दर्शक 70 एमएम के पर्दे पर नहीं देख पाए? जैसा कि आपने फिल्म देखी होगी, मेरा ज्यादातर काम रहमान डकैत की गैंग के साथ था। आमतौर पर फिल्में एक-दो महीने में खत्म हो जाती हैं, लेकिन धुरंधर का शूट करीब डेढ़ साल चला। दानिश, मैं, विक्रम सुनील और बाकी गैंग मेंबर्स लगातार मिलते रहे। शुरू में सेट पर एक औपचारिक डर रहता है कि ये हमारे सीनियर हैं, डायरेक्टर हैं, डीओपी हैं। लेकिन डेढ़ साल में वो सारी फॉर्मैलिटी टूट गई। फिर एक-दूसरे की लेग पुलिंग शुरू हो गई। विकास नोलखा (डीओपी) बार-बार आकर कहते थे ‘दाढ़ी की कंटिन्यूटी, दाढ़ी की कंटिन्यूटी।’ डेढ़ साल तक दाढ़ी मेंटेन करना आसान नहीं था। वो मुझे खूब छेड़ते थे वो कहते कि ‘बाल तो हैं नहीं, कम से कम दाढ़ी तो संभाल लो।’ रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना और संजय दत्त से सेट पर बातचीत का अनुभव कैसा रहा? रणवीर सिंह के साथ मेरे लगभग सारे सीन थे। अक्षय खन्ना के साथ भी कई सीन थे। शुरुआत में सब कुछ बहुत प्रोफेशनल रहता था। लेकिन डेढ़ साल तक साथ शूट करने के बाद वो बीच की दीवार गिर गई। अक्षय सर बहुत रिजर्व रहते हैं। उनका किरदार रहमान डकैत बहुत सीरियस है और उन्होंने उसे उसी लेवल की डिटेलिंग के साथ निभाया है। अगर आप उनसे बात करना चाहें, तो वो खुले दिल से बात करते हैं, लेकिन वो अटेंशन सीक नहीं करते। मैंने उनसे कहा था कि दिल चाहता है के समय मैं कॉलेज में था और थिएटर करता था। सब आमिर खान का किरदार बनना चाहते थे, लेकिन मुझे आपका कैरेक्टर सबसे ज्यादा रिलेटेबल लगा, क्योंकि वो एक आर्टिस्ट था। इसपर उन्होंने आगे कहा कि अक्सर लोग डायलॉग पर ही फोकस करते हैं, कैरेक्टर की बारीकियों पर नहीं। धुरंधर आपकी पहली एक्शन फिल्म थी। इतने बड़े एक्शन सीक्वेंस करते वक्त क्या डर या घबराहट महसूस हुई? बहुत लगा एक्सपीरियंस था। खासकर गाड़ी के अंदर फाइट सीन में। मेरे दिमाग में यही चलता रहता था कि गलती से रणवीर सिंह या अक्षय सर को लग गई तो? मैं अपने पंचेस होल्ड कर रहा था। लेकिन उन्होंने समझाया कि कैसे फुल फोर्स दिखाना है, बिना किसी को चोट पहुंचाए। आदित्य सर और पूरी टीम ने मुझे इस पूरे प्रोसेस में गाइड किया। इतने बड़े स्टार्स के साथ काम करते हुए नर्वसनेस रहती है? नर्वसनेस हमेशा रहती है और रहनी भी चाहिए। एक्टर के तौर पर डर रहता है कि कहीं डायलॉग फंबल न हो जाए। भले ही अब डिजिटल हो गया है, लेकिन फिल्म रोल वाली मेंटालिटी अभी भी दिमाग में रहती है कि गलती हुई तो टाइम और पैसा वेस्ट हो जाएगा। लेकिन रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, अर्जुन रामपाल किसी ने भी मुझे कभी नर्वस महसूस नहीं होने दिया। सबका मकसद यही था कि हर किसी का काम अच्छे से निकले। रिलीज से पहले फिल्म को लेकर बॉयकॉट और प्रोपेगेंडा की बातें हुईं। आपने इसे कैसे लिया? मुझे सिर्फ ये डर था कि लोग फिल्म देखे बिना उसे खारिज न कर दें। अगर आप इंडिया-पाकिस्तान जैसे विषय पर फिल्म बनाएंगे, तो पॉलिटिकल अंडरटोन आएगा ही। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप किसी कम्युनिटी के खिलाफ हैं। फिल्म में कहीं नहीं कहा गया कि मुसलमान गलत हैं या पाकिस्तान के लोग बुरे हैं। हमने सिर्फ उस सिस्टम को दिखाया है जिसने आतंकवाद को बढ़ावा दिया। रिलीज के बाद जनता के प्यार ने सब साफ कर दिया। धुरंधर: द रिवेंज के पार्ट टू से आप किस तरह की उम्मीदें रखते हैं? अगर पार्ट वन ने लगभग 1300 करोड़ कमाए हैं, तो मैं चाहता हूं पार्ट टू 2000 करोड़ कमाए। जिन्हें पार्ट वन का एक्शन पसंद आया है, उन्हें पार्ट टू और भी ज्यादा पसंद आएगी। 19 मार्च को धुरंधर: द रिवेंज की रिलीज टॉक्सिक से क्लैश कर रही है। आप इस टकराव को किस तरह देखते हैं? ये इंडियन सिनेमा के लिए अच्छा है। दर्शकों के पास चॉइस है। मैं चाहता हूं दोनों फिल्में चलें। अगर ऐसी फिल्में हिट होंगी, तो ऐसी कहानियां और बनेंगी। आखिर में फायदे में ऑडियंस ही है।
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