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    POCSO एक्ट के दोषी को 8 साल की कठोर कारावास:गैंगेस्टर एक्ट में भी 2 साल की सजा, 8 और 5 हजार का जुर्माना भी लगा

    3 hours ago

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    बलिया में न्यायालय ने पॉक्सो एक्ट और गैंगेस्टर एक्ट के अलग-अलग मामलों में फैसला सुनाया है। अदालत ने पॉक्सो एक्ट के दोषी को 8 वर्ष के सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं, गैंगेस्टर एक्ट के एक अभियुक्त को दो वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। यह फैसला पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के "ऑपरेशन कनविक्शन" अभियान के तहत प्रभावी पैरवी का परिणाम है। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) कोर्ट संख्या 08 ने थाना दोकटी में पंजीकृत मु0अ0सं0-718/2017 के अभियुक्त जयप्रकाश यादव पुत्र श्यामबिहारी यादव को दोषी पाया। अभियुक्त पर वादी की लगभग 16 वर्षीय नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने का आरोप था। न्यायालय ने जयप्रकाश यादव को 8 वर्ष के सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। यदि अभियुक्त अर्थदंड का भुगतान नहीं करता है, तो उसे छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस मामले में अभियोजन अधिकारी विमल राय ने प्रभावी पैरवी की। इसी तरह, विशेष न्यायाधीश (गैंगेस्टर एक्ट)/अपर सत्र न्यायाधीश ने थाना गड़वार में पंजीकृत मु0अ0सं0-661/2014 के तहत गैंगेस्टर एक्ट के मामले में फैसला सुनाया। इस मामले में तीन अभियुक्तों, सुभाष मुसहर, श्रीकांत उर्फ झबरी मुसहर और कैलाश मुसहर, में से कैलाश मुसहर को दोषी ठहराया गया। यह मुकदमा उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम 1986 की धारा 2/3 (1) के तहत दर्ज किया गया था। अदालत ने कैलाश मुसहर को दो वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर उसे एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस मामले में विशेष लोक अभियोजन अधिकारी अजय कुमार तिवारी ने पैरवी की। बलिया पुलिस के मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन विभाग की प्रभावी पैरवी के कारण ही इन दोनों महत्वपूर्ण मामलों में न्यायालय का यह फैसला आया है, जो "ऑपरेशन कनविक्शन" अभियान की सफलता को दर्शाता है।
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