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    ‘सहारा शहर’ पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की:अब इसी जमीन पर बनेगा नया विधानभवन भवन; यूपी सरकार का कब्जा बरकरार

    2 hours ago

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    लखनऊ के गोमतीनगर स्थित ‘सहारा शहर’ को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। सहारा इंडिया कमर्शियाल कॉर्पोरेशन लिमिटेड को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली और सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार का कब्जा बरकरार हो गया है। अब इसी जमीन पर नया विधानभवन बनाने की कवायद तेज हो गई है, जिसके लिए एलडीए ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट से सहारा को बड़ा झटका सहारा इंडिया ने ‘सहारा शहर’ की लीज रद्द किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। 16 मार्च को हुई सुनवाई में कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट के फैसले के बाद सहारा को कोई अंतरिम राहत नहीं मिली। इससे साफ हो गया कि राज्य सरकार द्वारा की गई कार्रवाई फिलहाल पूरी तरह लागू रहेगी। इस फैसले के बाद सहारा समूह का इस प्रोजेक्ट पर नियंत्रण लगभग समाप्त हो गया है। सरकार का कब्जा बरकरार, पहले ही हो चुकी थी कार्रवाई यूपी सरकार ने पहले ही ‘सहारा शहर’ की लीज रद्द करते हुए प्रशासनिक कब्जा ले लिया था। सरकार का कहना था कि लीज की शर्तों का उल्लंघन हुआ है, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई। इसके बाद सहारा समूह ने इस फैसले को चुनौती दी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से उसे राहत नहीं मिल सकी। अब इसी जमीन पर बनेगा नया विधानभवन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब इस जमीन के इस्तेमाल को लेकर सरकार की योजना स्पष्ट होती नजर आ रही है। गोमतीनगर स्थित इस बड़े भूखंड पर नया विधानभवन बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। एलडीए ने शासन के निर्देश पर कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो इस परियोजना की डीपीआर और डिजाइन तैयार करेगा। जमीन की पैमाइश पूरी, रिपोर्ट शासन को भेजी गई शासन के निर्देश पर सहारा शहर की जमीन की पैमाइश कर रिपोर्ट पहले ही भेजी जा चुकी है। उच्च स्तर पर इस स्थान को विधानभवन निर्माण के लिए उपयुक्त मानते हुए सहमति भी बन चुकी है। एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार के अनुसार, अब आगे की प्रक्रिया के तहत कंसल्टेंट की नियुक्ति और परियोजना की विस्तृत योजना पर काम तेजी से किया जा रहा है। 200 एकड़ जमीन की तलाश खत्म नए विधानभवन के लिए सरकार पिछले कई वर्षों से करीब 200 एकड़ जमीन की तलाश में थी। सहारा शहर की जमीन इस जरूरत को पूरा करती नजर आई है। यहां लखनऊ नगर निगम की लगभग 170 एकड़ और एलडीए की करीब 75 एकड़ जमीन मिलाकर कुल 245 एकड़ क्षेत्र उपलब्ध है। लोकेशन और कनेक्टिविटी के लिहाज से भी यह क्षेत्र बेहद उपयुक्त माना जा रहा है, जिससे यहां बड़े प्रशासनिक ढांचे के निर्माण में सहूलियत होगी। ‘सहारा शहर’ विवाद: क्या है पूरा मामला ‘सहारा शहर’ लखनऊ का एक प्रमुख रियल एस्टेट प्रोजेक्ट रहा है, जिसे सहारा समूह ने विकसित किया था। इसमें आवासीय और व्यावसायिक दोनों तरह की सुविधाएं शामिल थीं। पिछले कुछ समय से लीज और स्वामित्व को लेकर विवाद गहराता गया, जिसके बाद सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए लीज रद्द कर दी और जमीन अपने कब्जे में ले ली। रियल एस्टेट और राजनीति दोनों में हलचल सुप्रीम कोर्ट के फैसले और नए विधानभवन की योजना ने लखनऊ के रियल एस्टेट और राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। एक ओर जहां यह मामला सरकारी नियंत्रण और नियमों के पालन का उदाहरण बन रहा है, वहीं दूसरी ओर राजधानी के केंद्र में एक नए प्रशासनिक परिसर के निर्माण की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है।
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