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    सावन के अंतिम सोमवार पर प्रयागराज के शिवालयों में भीड़:मनकामेश्वर में भक्तों ने गंगाजल, दूध और शहद से किया जलाभिषेक

    2 hours ago

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    प्रयागराज में सावन के चौथे और अंतिम सोमवार को शिवालयों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से हो रही बारिश भी भगवान भोलेनाथ के भक्तों की आस्था को डिगा नहीं सकी। भोर होते ही शहर के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। भक्त हाथों में गंगाजल, दूध, बेलपत्र और पूजन सामग्री लेकर दर्शन व जलाभिषेक के लिए पहुंचे। संगम क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध मनकामेश्वर महादेव मंदिर में अंतिम सावन सोमवार को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। भोर से ही हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे। मंदिर के बाहर भी भक्तों की लंबी कतारें दिखाई दीं, जहां वे अपनी बारी का इंतजार करते हुए भगवान भोलेनाथ के जयकारे लगा रहे थे। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का गंगाजल और दूध से अभिषेक किया, साथ ही बेलपत्र, धतूरा, मदार और पुष्प अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। बारिश के बावजूद मंदिर में श्रद्धालुओं का पहुंचना लगातार जारी रहा। कई भक्तों ने सावन के अंतिम सोमवार का व्रत रखा और परिवार की खुशहाली के लिए भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। सिविल लाइंस स्थित हनुमत निकेतन मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकादश रुद्र के दर्शन और अभिषेक के लिए पहुंचे। यहां भक्तों ने पंचगव्य, दूध, शहद और गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक किया। शहर के अन्य प्रमुख शिवालयों में भी भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तिमय माहौल बना रहा और हर-हर महादेव तथा बम-बम भोले के जयकारों से क्षेत्र गूंजता रहा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है और सावन के सोमवार का विशेष महत्व होता है। भक्तों का विश्वास है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सुहागिन महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी उम्र के लिए पूजा करती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की कामना से भगवान शिव का पूजन करती हैं। इस वर्ष सावन का महीना 30 जुलाई को शुरू हुआ था और 28 अगस्त को रक्षाबंधन के साथ इसका समापन होगा।
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